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AI से बढ़ रहा डिप्रेशन का खतरा? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

  • Authored by: Srishti
  • Updated Jan 23, 2026, 01:43 PM IST

हाल ही में किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि जो लोग एआई चैटबॉट्स का अधिक उपयोग करते हैं, उनमें अवसाद के लक्षण विकसित होने की संभावना 30 प्रतिशत अधिक होती है। यह अध्ययन JAMA Network Open में प्रकाशित हुआ है और इसे मैसाचुसेट्स जनरल अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. रॉय पर्लिस द्वारा किया गया। विशेष रूप से, 45 से 64 वर्ष की आयु के नियमित एआई उपयोगकर्ताओं में अवसाद का जोखिम 54 प्रतिशत अधिक होता है। अध्ययन में यह भी बताया गया है कि एआई चैटबॉट्स का उपयोग संतुलित तरीके से किया जाना चाहिए, ताकि वे वास्तविक संबंधों और पेशेवर देखभाल के स्थान पर न आएं।

AI से बढ़ रहा डिप्रेशन (pc: pinterest)

AI से बढ़ रहा डिप्रेशन (pc: pinterest)

हाल के समय में, AI चैटबॉट्स का उपयोग तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके साथ ही मानसिक स्वास्थ्य पर इसके प्रभावों पर चिंता भी बढ़ रही है। एक नए अध्ययन के अनुसार, जो लोग एआई चैटबॉट्स का भारी उपयोग करते हैं, उनमें अवसाद के लक्षण विकसित होने की संभावना 30 प्रतिशत अधिक होती है। यह अध्ययन जर्नल JAMA Network Open में प्रकाशित हुआ है और इसका नेतृत्व मैसाचुसेट्स जनरल अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. रॉय पर्लिस ने किया।

किन लोगों को है ज्यादा खतरा?

अध्ययन के अनुसार, विशेष रूप से मध्य आयु वर्ग के लोग, यानी 35 वर्ष से अधिक आयु के लोग, AI के अधिक उपयोग के कारण अवसाद के उच्च जोखिम में होते हैं। 45 से 64 वर्ष के नियमित एआई उपयोगकर्ताओं में अवसाद का जोखिम 54 प्रतिशत अधिक होता है, जबकि 25 से 44 वर्ष की आयु के लोगों में यह आंकड़ा 32 प्रतिशत है। हालांकि, शोधकर्ताओं का कहना है कि यह पता लगाना मुश्किल है कि क्या AI का उपयोग अवसाद का कारण बन रहा है या अवसाद से ग्रस्त लोग एआई का अधिक उपयोग कर रहे हैं। यह संभव है कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोग अपने लक्षणों के लिए सहायता खोजने के लिए एआई का सहारा ले रहे हों।

मेंटल हेल्थ पर असर

विशेष रूप से किशोरों के लिए, एआई चैटबॉट्स का उपयोग जोखिम भरा हो सकता है। एक हालिया सर्वेक्षण में पाया गया कि 64 प्रतिशत अमेरिकी किशोर एआई चैटबॉट्स का उपयोग कर रहे हैं, जिनमें से 30 प्रतिशत हर दिन इसका उपयोग करते हैं। इस आयु वर्ग में मस्तिष्क विकास की तेजी से हो रही प्रक्रिया के कारण वे विभिन्न नई चीजों के संपर्क में आते हैं, जो मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं। एआई चैटबॉट्स कभी-कभी नकारात्मक विचारों को बढ़ावा दे सकते हैं। अगर कोई उपयोगकर्ता बार-बार अपने डर, उदासी या आत्म-संदेह के बारे में बात करता है, तो चैटबॉट इन विषयों पर चर्चा जारी रख सकता है, जो अवसादित सोच को और गहरा कर सकता है।

AI इस्तेमाल करने का सही तरीका

हालांकि, शोधकर्ता यह भी मानते हैं कि एआई चैटबॉट्स स्वाभाविक रूप से हानिकारक नहीं हैं। यदि इनका उपयोग संतुलित तरीके से किया जाए, तो ये उत्पादकता, सीखने और यहां तक कि तात्कालिक भावनात्मक समर्थन के लिए उपयोगी उपकरण हो सकते हैं। कुछ मानसिक स्वास्थ्य ऐप्स एआई का जिम्मेदारी से उपयोग करते हैं ताकि उपयोगकर्ताओं को पेशेवर मदद लेने, माइंडफुलनेस का अभ्यास करने या स्वस्थ मुकाबला करने की रणनीतियों को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ उपयोगकर्ताओं को चैटबॉट्स के उपयोग में सीमाएं निर्धारित करने और वास्तविक जीवन की बातचीत को प्राथमिकता देने की सलाह देते हैं। यदि कोई व्यक्ति निरंतर उदासी, अलगाव या भावनात्मक समर्थन के लिए एआई पर निर्भरता के लक्षण महसूस करता है, तो उसे अपने दोस्तों और परिवार से सहायता मांगने की आवश्यकता है।

Srishti
Srishti author

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्... और देखें

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