Stress Anxiety And Tension Can Affect Brain: क्या आप भी हर छोटी बात पर टेंशन लेने लगते हैं? हर समय किसी न किसी चिंता में डूबे रहते हैं? अगर हां, तो आपको बता दें कि ये आदत आपकी मेंटल हेल्थ को धीरे-धीरे खा रही है। आज की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में टेंशन लेना जैसे आम बात हो गई है, लेकिन लगातार चिंता करना दिमाग पर बहुत भारी पड़ सकता है। आपको जानकर हैरानी हो सकती है कि ज्यादा सोचने की आदत ब्रेन फंक्शन को बिगाड़ देती है। सिर्फ इतना ही नहीं, कई बार इस तरह की समस्याएं मानसिक बीमारियां के विकास में भी योगदान दे सकती हैं। इसलिए अगर आप हर वक्त परेशान रहते हैं, तो अब आपको अलर्ट होने और दिमागी सेहत पर ध्यान देने की जरूरत है।
दिमाग की बैटरी हो जाती है डाउन
जब हम बार-बार एक ही बात को सोचते रहते हैं, तो दिमाग पर लोड बढ़ जाता है। ये ऐसा है जैसे मोबाइल को बिना ब्रेक के इस्तेमाल करते रहो, बैटरी खत्म हो जाती है। ठीक वैसे ही, चिंता करने से ब्रेन की ताकत धीरे-धीरे कम हो जाती है और दिमाग थकने लगता है।
बढ़ जाता है स्ट्रेस हार्मोन
चिंता के समय शरीर में कोर्टिसोल नाम का स्ट्रेस हार्मोन बढ़ने लगता है। जब ये हार्मोन लंबे वक्त तक बना रहता है, तो दिमाग के वो हिस्से प्रभावित होते हैं जो याददाश्त और ध्यान से जुड़े होते हैं। इसका सीधा असर आपकी सोचने-समझने की क्षमता पर पड़ता है।
मूड स्विंग और चिड़चिड़ापन बढ़ता है
हर वक्त टेंशन में रहने से आपका मूड बार-बार बदलता है। कभी गुस्सा, कभी दुख, कभी बेचैनी ये सब नॉर्मल हो जाता है। छोटी-छोटी बातें भी परेशान करने लगती हैं और इंसान खुद को अंदर से कमजोर महसूस करने लगता है।
नींद भी हो जाती है खराब
तनाव का सबसे पहला असर आपकी नींद पर पड़ता है। टेंशन में दिमाग को आराम नहीं मिल पाता और सोना मुश्किल हो जाता है। कई बार रातभर नींद टूटती रहती है, जिससे सुबह थकान महसूस होती है और पूरा दिन सुस्त बीतता है।
मेंटल हेल्थ पर आता है लंबा असर
लगातार चिंता करने से ब्रेन की हेल्थ पर लंबा असर पड़ता है। इससे एंग्जायटी, डिप्रेशन, और पैनिक अटैक जैसी मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स शुरू हो सकती हैं। इसलिए इसे हल्के में लेना सही नहीं है।
वक्त रहते संभलना जरूरी
हर वक्त चिंता करने की आदत को नजरअंदाज न करें। यह धीरे-धीरे आपके दिमाग को कमजोर कर सकती है। इसलिए खुद को रिलैक्स रखने की कोशिश करें, दिन में कुछ वक्त मेडिटेशन या वॉक के लिए निकालें और जरूरत पड़े तो एक्सपर्ट की मदद लें। क्योंकि दिमाग का ख्याल रखना भी उतना ही जरूरी है, जितना शरीर का।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
