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क्या सच में भारत में जनवरी के बाद माइकोप्लाज्मा निमोनिया के एक भी मरीज नहीं, स्वास्थ्य मंत्रालय ने कही ये बात, जानें इस बीमारी के लक्षण

  • Edited by: Ritu raj
  • Updated Dec 8, 2023, 06:56 AM IST

चीन में माइकोप्लाज्मा निमोनिया तेजी से फैलता जा रहा है। चीन में यह बीमारी बच्चोंको लगातार अपना शिकार बना रहा है। लेकिन क्या आपको मालूम है माइकोप्लाज्मा निमोनिया क्या है। दरअसल इस जीवाणु से होने वाला निमोनिया आमतौर पर हल्का होता है, इसलिए इसे 'वॉकिंग निमोनिया' (Walking pneumonia) भी कहा जाता है, लेकिन इसके गंभीर मामले भी हो सकते हैं।

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Mycoplasma pneumonia

चीन में माइकोप्लाज्मा निमोनिया तेजी से फैलता जा रहा है। चीन में यह बीमारी बच्चोंको लगातार अपना शिकार बना रहा है। लेकिन क्या आपको मालूम है माइकोप्लाज्मा निमोनिया क्या है। दरअसल इस जीवाणु से होने वाला निमोनिया आमतौर पर हल्का होता है, इसलिए इसे 'वॉकिंग निमोनिया' (Walking pneumonia) भी कहा जाता है, लेकिन इसके गंभीर मामले भी हो सकते हैं। ऐसे में समय रहते इसका इलाज कराना बेहद जरूरी है। लेकिन स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने इस बीमारी को लेकर एक बड़ी बात कही है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबित जनवरी के बाद से भारत में कोई माइकोप्लाज्मा निमोनिया नहीं पाया गया, मीडिया रिपोर्ट में गलत जानकारी दी गई है।

माइकोप्लाज्मा निमोनिया के लक्षण

माइकोप्लाज्मा निमोनिया से ग्रसित बच्चों में ये लक्षण देखने को मिलते हैं।

  • खांसी
  • जुकाम
  • फेफड़ों में जलन
  • तेज बुखार
  • गला खराब
  • थकान महसूस होना
  • सिर दर्द

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने गुरुवार को उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया, जिनमें दावा किया गया था कि एम्स दिल्ली ने चीन में निमोनिया के मामलों में हालिया वृद्धि से जुड़े सात जीवाणु मामलों का पता लगाया है और समाचार रिपोर्ट को भ्रामक" करार दिया है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा : "एक राष्ट्रीय दैनिक की हालिया मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एम्स दिल्ली ने चीन में निमोनिया के मामलों में हालिया वृद्धि से जुड़े सात जीवाणु मामलों का पता लगाया है। समाचार रिपोर्ट गलत जानकारी वाली है और भ्रामक जानकारी देती है। "

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इन सात मामलों का चीन सहित दुनिया के कुछ हिस्सों से हाल ही में बच्चों में श्‍वसन संक्रमण में हुई वृद्धि से कोई संबंध नहीं है।

इसमें कहा गया है, "सात मामलों का पता एम्स दिल्ली में छह महीने की अवधि (अप्रैल से सितंबर 2023) में चल रहे अध्ययन के एक हिस्से के रूप में लगाया गया है और यह चिंता का कोई कारण नहीं है।"

इसमें आगे कहा गया है कि जनवरी 2023 से अब तक आईसीएमआर के मल्टीपल रेस्पिरेटरी पैथोजन सर्विलांस के एक हिस्से के रूप में एम्स दिल्ली के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में परीक्षण किए गए 611 नमूनों में "कोई माइकोप्लाज्मा निमोनिया" नहीं पाया गया, जिसमें मुख्य रूप से गंभीर तीव्र श्‍वसन बीमारी (एसएआरआई) शामिल थी, जिसमें वास्तविक समय पीसीआर द्वारा लगभग 95 प्रतिशत मामले शामिल थे।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने आगे कहा कि माइकोप्लाज्मा निमोनिया समुदाय से प्राप्त निमोनिया का सबसे आम जीवाणु कारण है। यह ऐसे सभी संक्रमणों में से लगभग 15-30 प्रतिशत का कारण है।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया, "भारत के किसी भी हिस्से से इस तरह की वृद्धि की सूचना नहीं मिली है।" इसने यह भी कहा कि वह राज्य स्वास्थ्य अधिकारियों के संपर्क में है और रोजमर्रा के आधार पर स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है।

रितु राज
Ritu rajauthor

<p>ऋतु राज टाइम्स नाऊ नवभारत डिजिटल में लाइफस्टाइल डेस्क में बतौर चीफ कॉफी एडिटर कार्यरत हैं। उनकी हेल्थ और लाइफस्टाइल की खबरों पर अच्छी पकड़ है। यहां वो एक्सप्लेनर और लाइफस्टाइल की ट्रेंडिंग खबरों को लोगों के लिए परोसने का काम करते हैं। उनकी फूड, पैरेंटिंग, ब्यूटी पर अच्छी पकड़ है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की। वो बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से ताल्लुक रखते हैं। ऋतु राज ने पिछले 6 सालों में एनडीटीवी, जनसत्ता जैसे बड़े संस्थानों में अलग अलग बीट्स पर काम किया है। हालांकि उनकी खास रूची न्यूज, लाइफस्टाइल और एंटरटेनमेंट में रही है। ऋतु राज एक वॉयस ओवर आर्टिस्ट भी रहे हैं। उन्होंने एनडीटीवी में वॉयस ओवर आर्टिस्ट के तौर पर भी काम किया है। यहां उन्होंने लोकसभा चुनाव 2019 को भी कवर किया और खबरों को धार देना सीखा। साल 2021 में एनडीटीवी से इस्तीफा देने के बाद ऋतुराज ने जनसत्ता के साथ जुड़े और यहां वेब स्टोरीज पर अपनी रफ्तार बनाई और अलग अलग एंगल से खबरों को बनाना सीखा।</p>

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