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औषधीय गुणों की खान है ये आयुर्वेदिक सुपरफूड, डिहाड्रेशन से बचाने के साथ सेहत को भी देगा ये गजब फायदे

Labhera ke Fayde: लभेर या लसोड़ा एक आयुर्वेदिक औषधि है जो डिहाइड्रेशन, लू, फोड़े-फुंसी और गले की समस्याओं से राहत दिलाता है। इसकी छाल, फल और पत्तियां पारंपरिक इलाज में उपयोगी हैं। लेकिन हाई ब्लड प्रेशर और गैस से परेशान लोग करें सावधानी से सेवन। जानिए इसके फायदे और प्रयोग का सही तरीका।

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Labhera ke Fayde

Labhera ke Fayde: भारत की धरती पर ऐसे कई देसी फल और पौधे हैं, जिनकी खूबियों से आज भी ज़्यादातर लोग अनजान हैं। इन्हीं में से एक है लभेर, जिसे अलग-अलग राज्यों में लसोड़ा, लमेड़ा या गोंदी भी कहा जाता है। यह पेड़ सिर्फ स्वाद या छाया देने तक सीमित नहीं है, बल्कि आयुर्वेद में इसे एक बहुउपयोगी औषधि माना गया है।

कैसा होता है लभेर का फल और पेड़?

लभेर का वैज्ञानिक नाम Cordia dichotoma है। इसके पत्ते चमकदार और चिकने होते हैं, और इसका फल पकने पर पीला हो जाता है। जून के अंत तक इसके फल पूरी तरह पक जाते हैं। दिलचस्प बात यह है कि मानसून के आगमन का अंदाज़ा भी इस फल के पकने से लगाया जाता है।

इसका फल मीठा और चिपचिपा होता है, जिस वजह से लोग इसे सीधे खाने से बचते हैं। लेकिन अचार बनाने में इसका खूब उपयोग होता है। पत्तों का स्वाद पान जैसा होता है, इसलिए कई जगह लोग इसे पान की जगह भी इस्तेमाल करते हैं। खासकर राजस्थान, गुजरात और दक्षिण भारत में इसकी खूब मांग है।

लभेर के पेड़ की लकड़ी भी कमाल की

लभेर की लकड़ी चिकनी और मजबूत होती है। इसका उपयोग तख्त बनाने से लेकर बंदूक के कुंदे तक में किया जाता है। गांवों में इससे बनी चीजें आम तौर पर देखी जा सकती हैं।

डिहाइड्रेशन और लू से बचाव में कारगर

गर्मी के दिनों में जब शरीर का पानी तेजी से सूखने लगता है, तब लभेर का अचार या रस शरीर को ठंडक देने और डिहाइड्रेशन से बचाने में मदद करता है। यह लू से भी बचाव करता है और शरीर में ऊर्जा बनाए रखता है।

फोड़े-फुंसी और दाद में राहत

लभेर के पत्तों की पोटली बनाकर फोड़े-फुंसी पर बांधने से आराम मिलता है। इसके बीजों को पीसकर दाद पर लगाने से खुजली और जलन में राहत मिलती है। यह एक प्रभावी घरेलू इलाज माना जाता है, खासकर गांवों में जहां आज भी देसी नुस्खे प्रचलित हैं।

गले की खराश और खांसी में उपयोगी

लभेर की छाल से बना काढ़ा गले की खराश, खांसी और अन्य गले की बीमारियों में लाभदायक होता है। इसकी छाल से गरारे करने से गले में जमा कफ निकल जाता है और राहत मिलती है।

ब्लड प्रेशर और कैंसर रोधी गुण

लभेर के अचार में पाए जाने वाले एंटी-कैंसर और एंटी-एलर्जिक गुण इसे और भी खास बनाते हैं। यह ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में भी मददगार माना जाता है, लेकिन कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं।

कब नहीं खाना चाहिए लभेर का अचार?

हालांकि लभेर का अचार स्वाद और फायदे दोनों देता है, लेकिन जिन लोगों को पाचन से जुड़ी समस्याएं हैं, जैसे गैस, अपच, पेट दर्द, सीने में जलन या हाई ब्लड प्रेशर, उन्हें इसका अचार खाने से बचना चाहिए। इसकी वजह यह है कि अचार में सोडियम की मात्रा अधिक होती है, जो इन समस्याओं को और बढ़ा सकती है।

देसी जड़ी-बूटी की ताकत

लभेर सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि एक देसी सुपरफूड है जिसमें अनेक औषधीय गुण छिपे हैं। सही तरीके से इसका उपयोग किया जाए तो यह गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने, त्वचा रोगों से बचाने और गले की समस्याओं से राहत देने में कारगर हो सकता है।

Inputs: IANS

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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