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क्या सच में सूर्यास्त से पहले कर लेना चाहिए डिनर? जानिए क्या कहते हैं डॉ. एस के. सरीन

डॉ. सरीन के मुताबिक, कोशिश करनी चाहिए कि रात का खाना सूर्यास्त से पहले खा लिया जाए। अगर काम की वजह से ऐसा संभव नहीं है, तो देर रात भारी भोजन करने से बचना चाहिए।

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डॉ. एस के सरीन ने बताया कब औऱ कैसा करना चाहिए डिनर

दिनभर की भागदौड़ के बाद रात को देर से डिनर करना आजकल आम बात हो गई है। ऑफिस से देर से घर लौटना, फिर खाना बनाना और खाते ही सोने चले जाना। वैसे क्या आपने कभी सोचा है कि रात में खाने का समय आपकी सेहत पर भी असर डाल सकता है? इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (ILBS) के निदेशक डॉ. एसके सरीन ने Times Network India Health Summit & Awards 2026 के मंच से देर रात खाना खाने की आदत को लेकर आगाह किया है। उनका कहना है कि डिनर हल्का रखने के साथ-साथ उसे सही समय पर करना भी जरूरी है।

डॉ. सरीन के मुताबिक, कोशिश करनी चाहिए कि रात का खाना सूर्यास्त से पहले खा लिया जाए। अगर काम की वजह से ऐसा संभव नहीं है, तो देर रात भारी भोजन करने से बचना चाहिए। हालांकि, सूर्यास्त के बाद खाना पूरी तरह बंद कर देना हर व्यक्ति के लिए जरूरी है, ऐसा साबित करने वाले पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं।

देर रात खाना खाने से क्या हो सकती है परेशानी?

डॉ. सरीन ने बताया कि देर रात भारी खाना खाने और उसके तुरंत बाद सोने से पाचन और नींद प्रभावित हो सकते हैं। शरीर की जैविक घड़ी दिन और रात के हिसाब से काम करती है। ऐसे में खाने का समय भी शरीर में शुगर के इस्तेमाल और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर सकता है।

कुछ शोध में पाया गया है कि देर से खाने की तुलना में दिन में जल्दी भोजन करने से ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि सिर्फ देर से खाना खाने के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि किसी व्यक्ति को डायबिटीज जरूर हो जाएगी।

ऑफिस से देर से लौटते हैं तो क्या करें?

अगर आप रात 10 या 11 बजे घर पहुंचते हैं, तो भूखे रहने के बजाय भोजन की योजना बनाना बेहतर है। दिन में समय पर संतुलित भोजन करें और रात में जरूरत के हिसाब से हल्का खाना खाएं। कोशिश करें कि सोने और खाने के बीच पर्याप्त अंतर रहे। रात में बहुत ज्यादा तला-भुना, मीठा या भारी भोजन करने से बचें।

ध्यान रखें कि हल्का डिनर करने का मतलब शरीर की जरूरत से कम खाना नहीं है। भोजन में पर्याप्त प्रोटीन, सब्जियां और दूसरे जरूरी पोषक तत्व होने चाहिए। रात का खाना कितना और कब खाना है, यह आपकी दिनचर्या, स्वास्थ्य और कुल पोषण की जरूरत पर निर्भर करता है।

फैटी लिवर है तो खानपान पर दें खास ध्यान

डॉ. सरीन ने फैटी लिवर की समस्या से जूझ रहे लोगों को भी खानपान और देर रात खाने की आदत पर ध्यान देने की सलाह दी। फैटी लिवर में लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है। अधिक वजन, इंसुलिन रेजिस्टेंस और खानपान की कुछ आदतें इसका जोखिम बढ़ा सकती हैं।

ऐसे में संतुलित डाइट, नियमित शारीरिक गतिविधि और जरूरत के अनुसार वजन कम करना मददगार हो सकता है। मीठे पेय और ज्यादा चीनी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना भी उपयोगी है।

क्या 40 की उम्र के बाद दिन में सिर्फ एक बार खाना चाहिए?

डॉ. सरीन ने बातचीत में 40 साल की उम्र के बाद दिन में एक बार भोजन करने की सलाह भी दी। हालांकि, इसे सभी लोगों के लिए जरूरी या सुरक्षित नियम नहीं माना जा सकता। दिन में सिर्फ एक बार खाना हर व्यक्ति की पोषण संबंधी जरूरतें पूरी नहीं करता। खासकर डायबिटीज के मरीज, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं या नियमित दवाएं लेने वाले लोग डॉक्टर की सलाह के बिना ऐसी डाइट न अपनाएं।

यहां देखें डॉ. एस सरीन से पूरी बातचीत:

Dr. S.K.Sarin
डॉ एसके सरीनauthor

प्रो. (डॉ.) एस.के. सरीन प्रख्यात गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, हेपेटोलॉजिस्ट, एवं क्लिनिशियन साइंटिस्ट हैं। वह नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (ILBS) के निदेशक हैं। लिवर संबंधी बीमारियों, हेपेटाइटिस, सिरोसिस और लिवर कैंसर के उपचार एवं शोध में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। 350 से अधिक अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रों के लेखक डॉ. सरीन ने चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और उपचार संबंधी दिशानिर्देशों के विकास में अहम भूमिका निभाई है। चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है।

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