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आयुर्वेद में सिर्फ दवा नहीं, इन 4 चीजों पर भी दिया जाता है ध्यान, जानिए कैसे साथ करते हैं काम

Times Network India Health Summit and Awards 2026 में विशेषज्ञों ने आयुर्वेद की भूमिका, इसके इस्तेमाल और आधुनिक चिकित्सा पद्धति के साथ इसके तालमेल पर चर्चा की।

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आयुर्वेद में सिर्फ दवा नहीं, इन 4 चीजों पर दिया जाता है ध्यान- लिक्विड, डाइट, लाइफस्टाइल और मेडिसिन कैसे साथ करते हैं काम

आयुर्वेद का नाम सुनते ही अक्सर हमारे दिमाग में जडी-बूटियों और देसी दवाओं की तस्वीर उभरती है। कई लोगों को लगता है कि यह इलाज की ऐसी पद्धति है, जिसका असर होने में लंबा समय लगता है। लेकिन आयुर्वेद की चर्चा सिर्फ दवाओं तक सीमित नहीं है। इसमें खानपान, तरल पदार्थों और रोजमर्रा की जीवनशैली को भी अहम माना जाता है।

नई दिल्ली में आयोजित Times Network India Health Summit and Awards 2026 में विशेषज्ञों ने आयुर्वेद की भूमिका, इसके इस्तेमाल और आधुनिक चिकित्सा पद्धति के साथ इसके तालमेल पर चर्चा की। इस दौरान आयुर्वेद को लेकर बनी धारणाओं के साथ रिसर्च, निवेश और पारंपरिक चिकित्सा को बढावा देने की जरूरत पर भी बात हुई।

समिट में डॉ. बिस्वरूप रॉय चौधरी, संस्थापक, बीआरसी क्लीनिक्स हेल्थ और डॉ. तन्मय गोस्वामी, संस्थापक, गोस्वाल ने अपने विचार रखे। डॉ. तन्मय गोस्वामी ने बताया कि आयुर्वेद में केवल दवाओं पर नहीं, बल्कि चार प्रमुख पहलुओं- लिक्विड, डाइट, लाइफस्टाइल और मेडिसिन पर ध्यान दिया जाता है। आइए समझते हैं कि ये चारों चीजें किस तरह अहम हैं।

लिक्विड: शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखना जरूरी

शरीर को ठीक से काम करने के लिए पानी और दूसरे तरल पदार्थों की जरूरत होती है। पानी शरीर का तापमान नियंत्रित रखने, पाचन में मदद करने और शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।

हालांकि, हर व्यक्ति को एक जैसी मात्रा में पानी पीने की जरूरत नहीं होती। गर्मी, शारीरिक मेहनत, उम्र और स्वास्थ्य की स्थिति के हिसाब से इसकी जरूरत बदल सकती है। इसलिए पर्याप्त पानी पीना जरूरी है, लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी सही नहीं है।

डाइट: आप क्या खाते हैं, इसका असर सेहत पर भी पडता है

आयुर्वेद में भोजन को खास महत्व दिया जाता है। क्या खाया जा रहा है, कितनी मात्रा में खाया जा रहा है और खाने का समय क्या है, ये सभी बातें सेहत से जुडी हैं। संतुलित डाइट में फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और प्रोटीन के अच्छे स्रोत शामिल होने चाहिए। भोजन में विविधता रखने से शरीर को अलग-अलग पोषक तत्व मिलते हैं।

समिट में डॉ. बिस्वरूप रॉय चौधरी ने अपनी डीआईपी डाइट यानी डिसिप्लिंड एंड इंटेलिजेंट पर्सन्स डाइट का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, यह प्लांट-बेस्ड डाइट है, जिसमें कच्चे, साबुत और मौसमी खाद्य पदार्थों पर ध्यान दिया जाता है। उन्होंने दावा किया कि इस तरह का खानपान वजन संभालने और पाचन में मदद कर सकता है। हालांकि, किसी खास डाइट का असर व्यक्ति की जरूरतों और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। बीमारी होने पर खानपान में बडा बदलाव करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

लाइफस्टाइल: अच्छी सेहत के लिए दिनचर्या भी अहम

सिर्फ अच्छा खाना और दवा लेना ही काफी नहीं है। हमारी रोजमर्रा की आदतें भी सेहत को प्रभावित करती हैं। देर रात तक जागना, शारीरिक गतिविधि की कमी और अनियमित दिनचर्या लंबे समय में स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं।

नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और दिनभर सक्रिय रहना सामान्य स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। डायबिटीज, मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं को संभालने में भी खानपान और शारीरिक गतिविधि की अहम भूमिका होती है। लेकिन जीवनशैली में बदलाव को हर बीमारी का इलाज नहीं माना जा सकता। कई स्थितियों में डॉक्टर की निगरानी और दवाओं की जरूरत बनी रहती है।

मेडिसिन: व्यक्ति की जरूरत के हिसाब से उपचार

आयुर्वेद के चौथे पहलू में दवाएं शामिल हैं। डॉ. तन्मय गोस्वामी के मुताबिक, आयुर्वेदिक दवाओं में प्राकृतिक सामग्री और कच्चे पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा कि इनका चुनाव व्यक्ति की जरूरत और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

हालांकि, प्राकृतिक सामग्री से बनी हर दवा को पूरी तरह सुरक्षित मान लेना सही नहीं है। कुछ आयुर्वेदिक औषधियों के दुष्प्रभाव हो सकते हैं और वे दूसरी दवाओं के साथ प्रतिक्रिया भी कर सकती हैं। इसलिए किसी भी आयुर्वेदिक दवा को शुरू करने से पहले योग्य चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है। यदि आप पहले से कोई दवा ले रहे हैं, तो अपने डॉक्टर को इसकी जानकारी जरूर दें।

क्या आयुर्वेद तेजी से असर करता है?

समिट के दौरान आयुर्वेद के असर को लेकर प्रचलित धारणा पर भी चर्चा हुई। डॉ. बिस्वरूप रॉय चौधरी ने दावा किया कि आयुर्वेद तेजी से असर करने वाली और सुरक्षित चिकित्सा पद्धति है। उन्होंने मेडिकल इमरजेंसी और ट्रॉमा में भी इसके इस्तेमाल की बात कही। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान रूस में खून बहने से रोकने के लिए शहद के इस्तेमाल का उदाहरण दिया। साथ ही, एंटीबायोटिक-रेसिस्टेंट बैक्टीरिया से निपटने में आयुर्वेद की संभावित भूमिका का भी जिक्र किया।

हालांकि, ये विशेषज्ञ के दावे हैं। किसी उपचार की प्रभावशीलता और सुरक्षा तय करने के लिए मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण जरूरी होते हैं। हार्ट अटैक, स्ट्रोक, गंभीर चोट या बहुत ज्यादा खून बहने जैसी स्थिति में तुरंत इमरजेंसी मेडिकल सहायता लेनी चाहिए। ऐसे समय में आयुर्वेद या किसी दूसरे वैकल्पिक उपचार के लिए अस्पताल पहुंचने में देरी नहीं करनी चाहिए।

आयुर्वेद को आगे बढाने के लिए रिसर्च और निवेश जरूरी

समिट में आयुर्वेद और दूसरी आयुष चिकित्सा प्रणालियों को आगे बढाने के लिए निवेश, वैज्ञानिक शोध और इलाज तक लोगों की पहुंच बढाने की जरूरत पर भी चर्चा हुई।

डॉ. तन्मय गोस्वामी ने भारत के आयुर्वेद क्षेत्र का अनुमानित मूल्य 17 से 18 अरब डॉलर बताया। उन्होंने चीन की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली का मूल्य करीब 30 अरब डॉलर होने का भी उल्लेख किया। डॉ. बिस्वरूप रॉय चौधरी ने आयुष प्रणालियों के लिए बजटीय सहायता बढाने की जरूरत बताई, जबकि डॉ. गोस्वामी ने फार्मास्युटिकल कंपनियों से रिसर्च और डेवलपमेंट में सहयोग करने की अपील की।

पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए केवल उसकी विरासत का जिक्र करना काफी नहीं है। इसके लिए व्यवस्थित शोध, उपचार की गुणवत्ता की जांच और सुरक्षा से जुडे प्रमाण भी जरूरी हैं।

आयुर्वेद को समझने के लिए जरूरी है व्यापक नजरिया

आयुर्वेद में लिक्विड, डाइट, लाइफस्टाइल और मेडिसिन को महत्व देने की बात से पता चलता है कि इस पद्धति में सेहत को कई पहलुओं से देखने की कोशिश की जाती है। खानपान, पानी, नींद और शारीरिक गतिविधि का महत्व आधुनिक स्वास्थ्य सलाह में भी स्वीकार किया जाता है।

वैसे किसी खास बीमारी में आयुर्वेदिक उपचार कितना असरदार और सुरक्षित है, इसका फैसला वैज्ञानिक प्रमाणों और योग्य चिकित्सक की सलाह के आधार पर ही किया जाना चाहिए। सेहत से जुडे किसी भी फैसले में दावों के साथ उनके प्रमाणों को समझना जरूरी है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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