बिहार की ऐतिहासिक विरासत को दुनिया में खास पहचान मिली है। पटना स्थित बिहार म्यूजियम को साल 2026 की दुनिया के 100 बेहतरीन म्यूजियम की लिस्ट में 9वां स्थान मिला है। खास बात यह है कि इस लिस्ट में जगह बनाने वाला यह भारत का एकमात्र म्यूजियम है।
बिहार म्यूजियम बिहार की राजधानी पटना में नेहरू पथ यानी बेली रोड पर स्थित है। इसका उद्घाटन साल 2015 में हुआ था। 13 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में फैला यह म्यूजियम प्राचीन इतिहास, कला और संस्कृति को आधुनिक अंदाज में पेश करता है। पटना एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन से यहां पहुंचना भी आसान है।
बिहार म्यूजियम की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि 2026 की लिस्ट में इसने न्यूयॉर्क के मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट को पीछे छोड़ दिया है। वहीं, पेरिस का मशहूर लूव्र म्यूजियम इस सूची में 31वें स्थान पर है। यह रैंकिंग जर्मनी के ट्रैवल गाइड Worth a Journey ने जारी की है।
बिहार म्यूजियम की सबसे खास कलाकृतियों में से एक है दीदारगंज यक्षी की प्रसिद्ध मूर्ति। प्राचीन भारतीय मूर्तिकला की यह महत्वपूर्ण कृति 1917 में पटना के पास मिली थी। इसके अलावा यहां प्राचीन मूर्तियां, सिक्के, पुरातात्विक अवशेष और ऐतिहासिक कलाकृतियां देखने को मिलती हैं। इतिहास और कला में दिलचस्पी रखने वालों के लिए यह जगह खास है।
अगर आप परिवार के साथ घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो बिहार म्यूजियम अच्छा विकल्प हो सकता है। यहां बच्चों के लिए अलग गैलरी है, जहां जानवरों, विज्ञान, लोककला और संस्कृति से जुड़ी चीजों को रोचक तरीके से दिखाया गया है। यहां आकर बच्चे खेल-खेल में इतिहास और अपने आसपास की दुनिया के बारे में जान सकते हैं।
बिहार म्यूजियम घूमने के लिए भारतीय पर्यटकों को भी टिकट लेनी होगी। वयस्कों के लिए म्यूजियम का टिकट 100 रुपये का है तो बच्चों के टिकट का 50 रुपया देना होगा। हालांकि शाम 5 से 7 बजे तक भारतीय वयस्कों के लिए ₹50 और बच्चों के लिए ₹25 का रियायती टिकट भी उपलब्ध है। म्यूजियम सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुलता है और हर सोमवार को बंद रहता है।
बिहार म्यूजियम, नेहरू पथ, पटना, बिहार में स्थित है। यहां एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन या शहर के दूसरे हिस्सों से टैक्सी और ऑटो के जरिए पहुंच सकते हैं। म्यूजियम में इतिहास की अलग-अलग गैलरी देखने के साथ बिहार की कला और संस्कृति को करीब से जानने का मौका मिलता है। परिसर में बिहारी व्यंजनों का रेस्टोरेंट और पारंपरिक कला से जुड़े स्मृति चिह्नों की दुकान भी है।