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कैसे पैदा होते हैं जुड़वा बच्चे, इन कपल के साथ होता है ऐसा, केरल का ये गांव है फेमस

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Nov 21, 2022, 06:51 PM IST

How Twin Baby Born:जुड़वा बच्चों पर आई दुनिया की पहली स्टडी में कई अहम खुलासे हुए हैं। उसके अनुसार दुनिया में जुड़वा बच्चे पैदा होने का ट्रेंड 33 फीसदी बढ़ गया है। दुनिया में प्रति 1000 डिलिवरी पर 12 जुड़वा बच्चे पैदा हो रहे हैं। सबसे ज्यादा उत्तरी अमेरिका में जुड़वा बच्चे पैदा होने की दर में इजाफा हुआ है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर: दुनिया में जुड़वा बच्चों की जन्म दर बढ़ी

KEY HIGHLIGHTS
  • दुनिया में हर साल करीब 16 लाख बच्चे पैदा हो रहे हैं।
  • केरल का कोडिन्ही गांव जुड़वा बच्चों के लिए फेमस है।
  • जुड़वा बच्चे दो तरह के होते हैं, उनके पैदा होने की वजह भी अलग-अलग होती हैं।

How Twin Baby Born:रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी की बेटी ईशा अंबानी (Isha Ambani) मां बन गई हैं। उन्होंने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया है। ईशा अंबानी ने अपने बेटे कृष्णा और बेटी आदिया (Isha Ambani Twin Children) को जन्म दिया है। ईशा अंबानी खद भी जुड़वा हैं, और अब उनके बच्चे भी जुड़वा पैदा हुए हैं। दुनिया में जुड़वा बच्चे पैदा होने का ट्रेंड हमेशा से रहा है, लेकिन साल 2021 में जुड़वा बच्चों पर आई दुनिया की पहली स्टडी में में कई अहम खुलासे हुए हैं। उसके अनुसार दुनिया में जुड़वा बच्चे (Twins Baby) पैदा होने का ट्रेंड 33 फीसदी बढ़ गया है। रिपोर्ट के अनुसार 1000 डिलिवरी पर 12 जुड़वा बच्चे पैदा हो रहे हैं। दुनिया भर में करीब 16 लाख जुड़वा बच्चे हर साल पैदा होते हैं। और जहां तक भारत की बात है तो यहां भी जुड़वा बच्चों का ट्रेंड बढ़ता जा रहा है। जुड़वा बच्चों के मामले बढ़ने की एक प्रमुख वजह IVF जैसे आधुनिक मेडिकल तकनीकी भी है।

कैसे पैदा होते हैं जुड़वा बच्चे

जुड़वा बच्चे कैसे पैदा होते हैं, इस पर डॉ किरन राय का कहना है कि एक से ज्यादा बच्चों को जन्म देने के मामले को मेडिकल टर्म में मल्टीपल प्रेग्नेंसी कहा जाता है। यानी किसी महिला के गर्भ में दो या उससे ज्यादा बच्चे हैं। इसमें भी दो तरह के जुड़वा बच्चे होते हैं। इसमें एक प्रक्रिया के तहत जुड़वा बच्चे एक ही अंडे से पैदा हो सकते हैं, वहीं दूसरी प्रक्रिया में अलग-अलग अंडे से जुड़वा बच्चे पैदा होते हैं। अलग-अलग अंडे से पैदा होने वाले बच्चे फ्रैटरनल कहलाते हैं। ऐसा तब होता है जब दो या ज्यादा अंडे अलग-अलग स्पर्म से फर्टिलाइज होते हैं।

अगर महिला के परिवार में पहले से ही फ्रेटरनल ट्विन्स हैं तो इसकी संभावना बढ़ जाती है। ज्यादातर जुड़वा इसी तरह के होते हैं। वहीं जब जुड़वा बच्चे एक ही अंडे से पैदा होते हैं, तो उन्हें आइडेंटिकल बच्चे कहा जाता है। हालांकि ऐसे मामलों की संख्या बेहद कम होती है। इस तरह के बच्चे दिखने में काफी समान होते हैं।

यहां पर सबसे ज्यादा जुड़वा बच्चे

ह्यूमन रिप्रोडक्शन रिपोर्ट 2021 के अनुसार, वैज्ञानिकों ने साल 2010-2015 के बीच 165 देशों में जुड़वा बच्चे पैदा होने की दर का विश्लेषण किया गया। और इसके अलावा साल 1980-85 के दौरान 112 देशों में जुड़वा बच्चे पैदा होने की दर का विश्लेषण किया गया। जिसमें यह पाया गया कि सबसे ज्यादा उत्तरी अमेरिका में जुड़वा बच्चे पैदा होने की दर में इजाफा हुआ है। यहां पर 71 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं एशिया में 32 फीसदी की दर से बढ़ोतरी हुई। और इसी का असर है कि 1980-85 के दौरान दुनिया भर में जहां प्रति 1000 डिलिवरी पर 9 जुड़वा बच्चे पैदा हो रहे थे। वह 2010-2015 में बढ़कर 12 हो गए।

महाद्वीपजुड़वा बच्चों में हिस्सेदारीपैदा होने की दर
अफ्रीका41%17.1 %
एशिया42 %9.2%
यूरोप7%14.4%
उत्तरी अमेरिका4%16.9%
दक्षिण अमेरिका1%14.8%
ओसियाना6%9.3%
दुनिया100 %12%
स्रोत: Human Reproduction Report

केरल का यह गांव जुड़वा बच्चे के लिए फेमस

रिपोर्ट्स के अनुसार केरल के मलप्पुरम जिले में स्थित कोडिन्ही गांव में पैदा होने वाले ज्यादातर बच्चे जुड़वा ही होते हैं। 2008 में एक आधिकारिक अनुमानों ने गांव में 280 जुड़वां बच्चों की लिस्ट जारी की थी। लेकिन तब से ये संख्या बस बढ़ ही रही है। और यहां पर कहैं, लेकिन केरल के इस गांव में 1000 बच्चों में 42 ट्विन्स बच्चे जन्म लेते हैं। और रिपोर्ट के अनुसार कोडिन्ही में करीब 550 जुड़वा बच्चे हैं।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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