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Brics Summit के लिए दिल्ली पहुंचे पुतिन : टिश्यू से टॉवल तक, क्या है रूसी राष्ट्रपति की बायोलॉजिकल सिक्योरिटी का राज!

Brics Summit: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की विदेश यात्राओं में सुरक्षा सिर्फ हथियारबंद कमांडो तक ही सीमित नहीं रहती है। बल्कि भोजन, पानी, होटल और कथित जैविक निशानों तक को सुरक्षित रखने का विशेष प्रोटोकॉल चर्चा में रहता है।

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पुतिन जैसी सुरक्षा किसी की नहीं, जानें Biological सिक्योरिटी में क्या-क्या होता है

Brics Summit में शामिल होने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) दिल्ली पहुंच गए हैं। भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बीच आज उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय बैठक होगी। लेकिन पुतिन की सुरक्षा सिर्फ बुलेटप्रूफ कार, हथियारबंद कमांडो और स्नाइपर तक ही सीमित नहीं मानी जाती है। उनकी सुरक्षा व्यवस्था का एक बेहद संवेदनशील हिस्सा बायोलॉजिकल सिक्योरिटी भी है। यानी उनके शरीर से जुड़े बाल, त्वचा के कण या अन्य जैविक निशान किसी दूसरे देश के हाथ न लगें, इसे लेकर भी खास सावधानी बरती जाती है।

24 घंटे साथ रहते हैं बॉडीगार्ड्स

पुतिन की सुरक्षा की बात की जाए तो उनके हर कदम पर सैकड़ों बॉडीगार्ड बहुत करीबी नजर रखते हैं और यह उनके साथ 24 घंटे रहते हैं। BBC न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार पुतिन का खाना भी चुपके से तैयार होता है। यही नहीं अगर वह कुछ पीते भी हैं तो पहले उनके नजदीकी सलाहकार उसकी जांच करते हैं। क्योंकि पुतिन KGB के पूर्व अधिकारी रह चुके हैं, इसलिए वह खतरों के बारे में अच्छी तरह से जानते हैं।

ऐसे होते हैं पुतिन के सुरक्षा गार्ड्स

राष्ट्रपति और उनके परिवार की सुरक्षा के लिए समर्पित एक खास बल 'SBP' है, जो संघीय सुरक्षा सेवा (FSO) को रिपोर्ट करती है। इसका गठन रूस की खुफिया एजेंसी KGB से हुआ है। पुतिन के यह सुरक्षा अधिकारी हमेशा काले सूट पहने रहते हैं, कानों में ईयरफोन लगाए हुए यह हर समय पुतिन के साथ साए की तरह रहते हैं। रूसी मीडिया रशिया बियॉन्ड के अनुसार, 'जब ये एजेंट विदेश में पुतिन के साथ जाते हैं, तो स्वयं को चार मंडलियों में बांट लेते हैं।'

पुतिन की सुरक्षा के चार घेरे

पुतिन का सबसे पहला और करीबी घेरा उनके निजी गार्ड्स का होता है। दूसरे घेरे में वह गार्ड्स होते हैं, जिन पर जनता का ध्यान भी नहीं जाता। तीसरा घेरा वहां मौजूद भीड़ की परिधि को घेरता है और इसमें संदिग्ध लोगों को आने से रोकता है। जबकि चौथा और सबसे अंतिम घेरा पुतिन की मौजूदगी वाले इलाके में आसपास की इमारतों की छतों पर स्नापर के साथ मौजूद होता है।

विदेशी दौरों के दौरान राष्ट्रपति पुतिन की सुरक्षा टीम होटल, भोजन, पानी, परिवहन और कम्युनिकेशन से जुड़े इंतजामों पर खास निगरानी रखती है। दावा यहां तक किया जाता है कि उनके इस्तेमाल किए गए टिश्यू, गिलास और टॉवल जैसी चीजों को भी उनकी टीम अपने साथ वापस रूस ले जाती है।

पुतिन के हर Touch की क्यों की जाती है सुरक्षा?

पुतिन की बायोलॉजिकल सिक्योरिटी के पीछे प्रमुख चिंता यह बताई जाती है कि जैविक नमूने किसी व्यक्ति की पहचान या स्वास्थ्य से जुड़ी संवेदनशील जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं। हालांकि, पुतिन की सुरक्षा से जुड़े कई बेहद खास प्रोटोकॉल की आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है।

बता दें कि इस सुरक्षा सोच का एक ऐतिहासिक संदर्भ सोवियत दौर से जोड़ा जाता है। BBC की एक रिपोर्ट में पूर्व सोवियत खुफिया अधिकारी इगोर अतामानेंको के हवाले से दावा किया गया था कि साल 1949 में चीनी नेता माओ जेदोंग की मॉस्को यात्रा के दौरान उनके जैविक नमूनों को गुप्त तरीके से इकट्ठा कर उनकी जांच की गई थी। दावा था कि इसके जरिए माओ का मनोवैज्ञानिक प्रोफाइल तैयार करने की कोशिश हुई। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

पानी और खाने की भी जांच

रिपोर्टों के अनुसार, पुतिन के विदेशी दौरों में रूस से विशेष सुरक्षा और मेडिकल टीम के साथ जरूरी लॉजिस्टिक सामान भी भेजा जाता है। उनके भोजन और पानी की जांच के लिए खास इंतजाम किए जाने की बात भी सामने आती रही है।

बताया जाता है कि साल 2010 के आसपास विदेश यात्राओं में मोबाइल फूड लैब जैसी व्यवस्था का इस्तेमाल शुरू किया गया, जहां भोजन और पानी की जांच की जाती है। होटल में उनके कमरे की सुरक्षा, सैनिटाइजेशन और मेडिकल सुविधाओं को भी प्राथमिकता दी जाती है।

पुतिन के दिल्ली दौरे में भी दिखेगा सुरक्षा कवच

पुतिन के आज दिल्ली पहुंच गए हैं। उनके हर दौरे की तरह इस बार भी उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर खास नजर होगी। यूक्रेन युद्ध के बाद पुतिन की सुरक्षा को लेकर खतरे और बढ़े हैं। ऐसे में ड्रोन जैमर, एंटी-ड्रोन सिस्टम, बुलेटप्रूफ गाड़ियों और विशेष कमांडो की तैनाती जैसे इंतजाम सुरक्षा घेरे को और मजबूत करते हैं।

पुतिन स्वयं सोवियत संघ की KGB में अधिकारी रह चुके हैं। यही कारण है कि उनकी सुरक्षा व्यवस्था में सिर्फ हमले से बचाव नहीं, बल्कि संभावित जासूसी और संवेदनशील जानकारी के लीक होने से बचने को भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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