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हत्या के मामले में पकड़े गए लड़के के पक्ष में क्यों खड़ा हो गया मानवाधिकार आयोग? जानें- महाराष्ट्र का ये मामला

MSHRC Order Against Pune CP Amitesh Kumar: महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने पुणे में हत्या के मामले में हिरासत में लिए गए नाबालिगों को गाड़ी के बोनट पर बांधने और हिरासत में यातना देने के मामले में पुणे पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार समेत वरिष्ठ अधिकारियों पर प्राथमिकी दर्ज करने की सिफारिश की है।

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हत्या के मामले में पकड़े गए लड़के के पक्ष में क्यों खड़ा हो गया मानवाधिकार आयोग? जानें- महाराष्ट्र का ये मामला

Pune Police Custodial Torture Minors MSHRC FIR: महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग (एमएसएचआरसी) ने कथित रूप से बच्चों को वाहन के बोनट से बांधकर उन्हें घुमाने, अवैध रूप से हिरासत में लेने, उन्हें यातना देने के मामले में पुणे पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की सिफारिश की है।

आयोग ने मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का हवाला देते हुए महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को उसकी तथ्यान्वेषण रिपोर्ट को प्राथमिकी के रूप में दर्ज करने का निर्देश दिया है।

आयोग की पूर्ण पीठ में अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए. एम. बादर और सदस्य संजय कुमार तथा स्वप्ना जोशी शामिल थे। आदेश में कहा गया, 'हम सिफारिश करते हैं कि चूंकि आरोप वर्तमान पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार के खिलाफ भी हैं, जो अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) स्तर के अधिकारी हैं, इसलिए पुलिस महानिदेशक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जांच का जिम्मा अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक या उससे ऊपर के स्तर के अधिकारी को सौंपा जाए।'

पुलिस की बर्बरता, मानसिक उत्पीड़न

यह आदेश विशेष पुलिस महानिरीक्षक दत्तात्रय कराले, पुलिस अधीक्षक विश्वास पांधरे और एमएसएचआरसी के रजिस्ट्रार विजय केदार की तीन सदस्यीय समिति द्वारा की गई प्रारंभिक तथ्यान्वेषण के बाद आया है। समिति की दो हिस्सों वाली रिपोर्ट में पुलिस की कथित बर्बरता और व्यवस्थित मानसिक उत्पीड़न के गंभीर विवरण सामने आए।

रिपोर्ट के अनुसार, इस साल 21 जुलाई को भारती विद्यापीठ थाने के कर्मियों ने हत्या के एक मामले में हिरासत में लिए गए तीन नाबालिगों को रस्सियों से पुलिस वाहन के बोनट पर बांध दिया था। जांच में यह भी सामने आया कि नाबालिगों को कथित तौर पर हिरासत में हिंसा का सामना करना पड़ा।

रिपोर्ट में कहा गया कि उन्हें 20 जुलाई एवं 24 जुलाई के बीच निर्धारित कानूनी सीमा से अधिक समय तक अवैध रूप से पुलिस लॉकअप में रखा गया, जिसके बाद उन्हें किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया गया।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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