HIV कैसे फैलता है और क्यों
HIV AIDS FAQs In Hindi: एचआईवी या एड्स का नाम सुनते ही बहुत से लोग घबरा जाते हैं। डर लगना भी स्वाभाविक है, क्योंकि इसके बारे में आधी-अधूरी बातें ही सबसे ज्यादा फैलती हैं। कोई कह देता है कि ये रोजमर्रा की चीजों से फैल जाता है, तो कोई बोल देता है कि एचआईवी (HIV) मतलब जिंदगी खत्म। लेकिन सच यह है कि सही इलाज और सही जानकारी से HIV को कंट्रोल किया जा सकता है और एकदम सामान्य जिंदगी जी जा सकती है।
लोग इंटरनेट पर बहुत सारे सवाल बार-बार सर्च करते हैं जैसे HIV कैसे फैलता है, लक्षण क्या होते हैं, क्या इलाज है, क्या HIV होने पर AIDS होना तय है? आज के इस लेख में हम आपको एचआई और एड्स से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों के जवाब देंगे। तो चलिए आगे बढ़ते हैं..
सबसे पहले तो आपको बता दें कि ये दोनों एक ही चीज नहीं हैं, बल्कि अलग-अलग स्थितियां हैं।
आसान भाषा में कहें तो HIV बीमारी की शुरुआत है और AIDS उसका आखिरी, सबसे गंभीर पड़ाव है। लेकिन अच्छी बात यह है कि अगर इलाज समय पर शुरू कर दिया जाए तो ज्यादातर लोगों में AIDS बनता ही नहीं है।
शुरुआत में HIV के लक्षण बहुत हल्के हो सकते हैं, जैसे
बता दें कि HIV कुछ खास स्थितियों में ही फैलता है जैसे,
ऐसा बिल्कुल नहीं है। HIV हाथ मिलाने, गले लगाने, साथ बैठने, खाना शेयर करने, एक ही कप या प्लेट से खाने, छींकने या खांसने से नहीं फैलता है। तो अगर आपके आसपास कोई HIV पॉजिटिव है, तो उससे दूरी बनाना या डरना बिल्कुल गलत है। क्योंकि उसे आपकी सपोर्ट की जरूरत है, दूरी की नहीं।
बता दें कि फिलहाल HIV को पूरी तरह खत्म करने वाली कोई दवा मौजूद नहीं है, लेकिन ART (Antiretroviral Therapy) नाम की दवाएं इसके उपचार में बहुत असरदार हैं। ये दवाएं,
हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो एचआईवी से बचाव ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है, इसलिए हमेशा इन बातों ध्यान रखें -
एचआईवी को लेकर ये सबसे बड़ा मिथ है। अगर एचआईवी संक्रमित मरीज की ART दवाएं समय पर शुरू कर दी जाएं, तो HIV को बहुत सालों तक, बल्कि अक्सर जिंदगी भर AIDS बनने से रोका जा सकता है।
भारत में HIV टेस्ट करवाना बहुत आसान है। आप कई तरीकों से इसकी जांच करा सकते हैं,
क्या एचआईवी मां से बच्चे में ट्रांस्मिट हो सकता है (Kya Maa Se bachche Ko HIV Transmit Ho Sakta Hai)
हां, ऐसा हो सकता है। लेकिन यह जोखिम 95% तक कम किया जा सकता है अगर,
हा, ऐसा बिल्कुल हो सकता है। अगर कोई संक्रमित व्यक्ति ART दवाएं लेता है तो,
इसका मतलब है कि एचआईवी संक्रमित व्यक्ति जिंदगी भी उतनी ही लंबी और स्वस्थ हो सकती है, जितनी किसी सामान्य व्यक्ति की। सबसे जरूरी है दवा समय पर लेना और हौसला बनाए रखना।
विंडो पीरियड वह समय होता है जब वायरस शरीर में तो आ जाता है, लेकिन टेस्ट में तुरंत दिखाई नहीं देता। यह समय आमतौर पर 10 दिन से 90 दिन तक हो सकता है। इसलिए अगर किसी को लगता है कि वह HIV के संपर्क में आया है, तो डॉक्टर आमतौर पर दोबारा टेस्ट करने की सलाह देते हैं।