healthy diet: एक समय था जब घर की दाल, रोटी, सब्जी, दही और सलाद को ही सबसे हेल्दी खाना माना जाता था। लेकिन अब सोशल मीडिया खोलते ही हेल्दी खाने की तस्वीर बदल जाती है। कहीं ओवरनाइट ओट्स दिखते हैं, कहीं चिया सीड्स, प्रोटीन कॉफी, एवोकाडो टोस्ट और तरह-तरह के हेल्थ स्नैक्स। इन्हें देखकर लगता है कि फिट रहने के लिए यही सब खाना जरूरी है। लेकिन असली सवाल ये है कि क्या हर भारतीय इतना महंगा खाना खरीद सकता है? जवाब है नहीं।
संयुक्त राष्ट्र (UN) की स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन इन द वर्ल्ड (SOFI) 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में करीब 35.5% लोग यानी 52 करोड़ से ज्यादा लोग ऐसे हैं जो पौष्टिक और संतुलित आहार का खर्च नहीं उठा सकते। आसान शब्दों में कहें तो देश का हर तीसरा व्यक्ति हेल्दी खाना खरीदने की स्थिति में नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में पौष्टिक भोजन की कीमत करीब 33% बढ़ गई है। अब एक व्यक्ति के लिए रोजाना हेल्दी डाइट का खर्च करीब 400 रुपये तक पहुंच गया है। ऐसे में कम आय वाले परिवारों के लिए रोज फल, दूध, दाल, हरी सब्जियां, अंडे या दूसरे पौष्टिक खाद्य पदार्थ खरीदना आसान नहीं है।
आजकल हेल्दी खाने का मतलब भी काफी बदल गया है। लोग सुबह उठते ही नींबू पानी, एप्पल साइडर विनेगर या चिया सीड्स लेने लगे हैं। सोशल मीडिया पर यही चीजें हेल्दी लाइफस्टाइल की पहचान बन गई हैं। लेकिन सच यह भी है कि इनमें से कई चीजें काफी महंगी होती हैं और हर परिवार इन्हें अपनी रोज की डाइट में शामिल नहीं कर सकता।
दिलचस्प बात यह है कि भारत में पहले से ही कई ऐसे पारंपरिक खाद्य पदार्थ मौजूद हैं जो बेहद पौष्टिक हैं। दाल, बाजरा, ज्वार, रागी, मौसमी फल, हरी सब्जियां, दही और छाछ जैसी चीजें शरीर के लिए बहुत फायदेमंद हैं। लेकिन मार्केटिंग और सोशल मीडिया के दौर में लोगों को लगने लगा है कि हेल्दी रहने के लिए सिर्फ महंगे और विदेशी फूड ही जरूरी हैं। भारत दुनिया के सबसे बड़े दूध, फल, सब्जी और दाल उत्पादकों में शामिल है। इसके बावजूद करोड़ों लोगों की थाली में पर्याप्त पोषण नहीं पहुंच पा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह है बढ़ती महंगाई और लोगों की सीमित आय।
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आज जरूरत इस बात की है कि हेल्दी खाना सिर्फ अमीर लोगों तक सीमित न रह जाए। सरकार, खाद्य कंपनियों और समाज को मिलकर ऐसे कदम उठाने होंगे जिससे पौष्टिक भोजन हर वर्ग की पहुंच में आए। साथ ही लोगों को यह भी समझाने की जरूरत है कि अच्छी सेहत के लिए हमेशा महंगे सुपरफूड खरीदना जरूरी नहीं होता। हमारे घरों में बनने वाली साधारण दाल, रोटी, सब्जी, बाजरा और मौसमी फल भी शरीर को पूरा पोषण दे सकते हैं।
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अच्छी बात यह है कि लोगों में हेल्दी खाने को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। लेकिन अगर लोग सही खाना खरीद ही नहीं पाएंगे, तो यह जागरूकता अधूरी रह जाएगी। स्वस्थ जीवन सिर्फ जानकारी से नहीं, बल्कि सस्ती और पौष्टिक थाली से भी आता है। इसलिए अब वक्त आ गया है कि हेल्दी डाइट को हर भारतीय की पहुंच में लाया जाए, न कि इसे सिर्फ एक महंगा लाइफस्टाइल ट्रेंड बनाकर छोड़ दिया जाए।
