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प्रकृति का अनोखा खजाना है कचनार, शरीर से बीमारियों को रखता है कोसों दूर, फायदे जान रह जाएंगे हैरान

बड़ी से बड़ी बीमारियों को दूर करने के लिए कचनार को अगर प्रकृति का खजाना कहा जाए तो बिल्कुल भी गलत नहीं होगा। इसमें ऐसे अनगिनत फायदे छिपे हैं, जो जोड़ों के दर्द से लेकर थायराइड, गांठों की समस्या से लेकर पेट के पाचन को दुरुस्त करने तक ‘कचनार’ का जादू हर बीमारी पर असर दिखाता है। आइए जानते हैं इससे जुड़े फायदों के बारे में।

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benefits of kachnaar

Photo : iStock

‘कचनार’ का पौधा अपनी खूबसूरत फूलों की वजह से जाना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम ‘बौहिनिया वैरीगेटा’ है, यह चीन से लेकर दक्षिण-पूर्व एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप तक पाया जाता है। भारत में खास तौर पर पहाड़ी इलाकों में इसे बहुत पसंद किया जाता है और हिमाचल प्रदेश इसका एक प्रमुख स्थान है। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेस में छपी एक स्टडी के मुताबिक, इस पौधे का आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और पारंपरिक चीनी चिकित्सा में मधुमेह, सूजन, श्वसन संबंधी समस्याओं और त्वचा रोगों जैसे विभिन्न रोगों के उपचार में कारगर बना गया है। इसके औषधीय महत्व के अलावा, बी. वेरिएगाटा कई क्षेत्रों में सांस्कृतिक महत्व भी रखता है। इसे अक्सर इसकी सुंदरता और प्रतीकात्मक मूल्य के लिए सम्मानित किया जाता है, इसके फूलों का उपयोग धार्मिक समारोहों, त्योहारों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में किया जाता है। लोककथाओं, पौराणिक कथाओं और स्थानीय परंपराओं के साथ पौधे का जुड़ाव विभिन्न समुदायों में इसके सांस्कृतिक महत्व को और भी रेखांकित करता है। हमारे देश में देवी लक्ष्मी और मां सरस्वती को अर्पित किया जाता है।

आयुर्वेद ने गिनाए फायदे

आयुर्वेद के विभिन्न ग्रंथों में इसका जिक्र है। चाहे वह इसकी छाल हो, फूल हो या पत्तियां या अन्य हिस्सा, यह एक दवा की तरह काम करता है। ‘कचनार’ की सब्जी पेट के पाचन में सुधार करती है, जो कब्ज, गैस और अपच को दूर करने में मददगार साबित होती है।

त्वचा रोगों में लाभ

इसे त्वचा के लिए भी फायदेमंद माना गया है। ‘कचनार’ के फूल और छाल में एंटीसेप्टिक गुण पाए जाते हैं, जो खुजली, फोड़े-फुंसियों और दाद जैसी त्वचा संबंधित समस्याओं को राहत दिलाती है। साथ ही, इसे थायराइड और गांठों को ठीक करने में असरदार माना जाता है।

थायराइड में लाभ

आयुर्वेद में ‘कचनार’ को थायराइड और शरीर में गांठों को कम करने के लिए उपयोगी माना जाता है। यह रक्त-पित और इससे जुड़ी समस्याओं को दुरुस्त करने में लाभकारी माना गया है।

काचनार का इस्तेमाल

इतना ही नहीं, ‘कचनार’ की सब्जी भी बनाई जाती है। हिमाचल में इसे स्थानीय भाषा में ‘कराली’ या ‘करयालटी’ कहा जाता है। इसका स्वाद थोड़ा सा कड़वा होता है, लेकिन पकने के बाद यह खाने में बेहद ही स्वादिष्ट होता है।

इनपुट - भाषा

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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