What is Toxic Shock Syndrome (टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम क्या होता है) : बैक्टीरियल इंफेक्शन होना सुनने में इतना खतरनाक नहीं लगता है, जितना ये वाकई में होता है। टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम एक ऐसा ही बैक्टीरियल संक्रमण है। जो खासतौर से महिलाओं को प्रभावित करता है, तथा स्थिति बिगड़ने पर उनकी जान पर भी खतरा बन सकता है। बता दें कि ये दुर्लभ माना जाने वाला सिंड्रोम स्टैफिलोकोकस ऑरियस या स्टैफ नाम के जीवाणु के संपर्क में आने से होता है। वैसे तो ये बीमारी पुरुषों को, बच्चों को और पोस्टमेनोपॉज़ल महिलाओं में से किसी को भी प्रभावित कर सकती हैं। लेकिन देखा गया है कि, ये बैक्टीरिया खासतौर से पीरियड्स के समय में महिलाओं के शरीर पर अत्यधिक नकारात्मक प्रभाव डालता है।
अब पीरियड्स के दौरान कुछ महिलाएं पैड्स का इस्तेमाल करती हैं, तो कुछ टैम्पोन और मेंस्ट्रुअल कप्स का। तीनों के ही उपयोग से उन दिनों की दिक्कत कुछ हद तक कम हो सकती है। लेकिन टैम्पोन का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं में टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम ज्यादा होने की संभावना होती है। अब आप सोच रही होंगी कि ऐसे कैसे और क्यों होता है? तो बता दें कि ये बीमारी जीवाणुओं द्वारा उत्पादित विषाक्त पदार्थों के कारण होता है। ये रही इस खतरनाक स्थिति से जुड़ी कुछ अन्य खास बातें, जिन्हें नजरअंदाज करने की गलती आपको भी बिल्कुल नहीं करनी चाहिए।
क्या होता है टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम
ये एक ऐसा जीवाणु संक्रमण है, जो दुर्लभ होने के साथ साथ बेहद जानलेवा भी है। दरअसल जब ये जीवाणु मरीज के शरीर में घुसकर ब्लड वेसल्स में प्रवेश करकर उसे दूषित कर देता है। तब वो व्यक्ति इस जानलेवा बीमारी का शिकार हो जाता है। बैक्टीरिया के संपर्क में आने और मरीज के शरीर में प्रवेश करने के बाद। अपनी तादाद में गुणा करते हैं, तथा व्यक्ति के शरीर में विषाक्त पदार्थ का उत्पादन करने लगते हैं। इस पदार्थ की मात्रा जब बहुत होकर, पूरे शरीर में फैल जाती है। तो स्थिति हाथ से निकल जाती है।
ये जीवाणु पीड़ित का ब्लड प्रेशर तुरंत बहुत तेजी से कम करने के पीछे जिम्मेदार होते हैं। जिस कारण मरीज के शरीर में सही तरीके से ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। दिल और फेफड़े अपना काम करना बंद कर देते हैं। और सही समय पर सटीक इलाज न मिल पाने के कारण, सदमा लगना, किडनी या हार्ट फेल होने के साथ साथ मरीज की मौत होने तक का भी बहुत रिस्क होता है।
कैसे होता है टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम
महिलाओं में इस खतरनाक कंडीशन के होने के कारक होते हैं। जिनमें टैम्पोन, गर्भनिरोधक स्पंज, मेन्स्ट्रुअल स्पॉन्ज, डायाफ्राम, सर्वाइकल कैप का इस्तेमाल मुख्य माना जाता है या फिर ऐसा बच्चा पैदा करने के तुरंत बाद भी हो सकता है। इसी के साथ पुरुष और महिलाएं दोनों ही इस बैक्टीरिया के संपर्क में तब आ सकते हैं, जब कोई सर्जरी हुई हो, त्वचा जली हो, कोई खुले घाव हो, नकली उपकरण का इस्तेमाल हुआ हो। फ्लू और चिकनपॉक्स जैसे वायरल संक्रमण के बाद भी टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम के होने की संभावना होती है।
जब ये बैक्टीरिया मरीज के शरीर में इन माध्यमों से प्रवेश कर जाता है। तो उस व्यक्ति स्किन इंफेक्शन हो जाता है, और ये जीवाणु व्यक्ति के शरीर में फैल कर जहर बनाना शुरू कर देता है। जो धीरे धीरे पूरे शरीर और खून में मिल जाता है। बता दें कि वैसे तो ये बैक्टीरिया वजाइना में पहले से ही मौजूद होता है। लेकिन इससे महिलाओं को किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होता। लेकिन जब वे टैम्पोन का इस्तेमाल करती हैं, तो इस बैक्टीरिया को शरीर में प्रवेश करने का मौका मिल जाता है। खासतौर पर सूती और रेयान से बने टैम्पोन की तुलना में पॉलिएस्टर फोम से बने टैम्पोन खतरनाक माने जाते हैं। वहीं बहुत देर एक ही मेन्स्ट्रुअल स्पॉन्ज के उपयोग से भी ये बैक्टीरिया जन्म ले लेता है।
टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम के लक्षण हिंदी में
- अचानक तेज बुखार
- तेजी से कम होता ब्लड प्रेशर
- उल्टी
- डायरिया
- हथेलियों और तलवों पर रेशेज (सनबर्न जैसे दिखने वाले)
- मांसपेशियों में दर्द
- अत्यधिक सिर दर्द
- आंख, गला और मुंह लाल होना
- भ्रम की स्थिति
- दौरे पड़ना
अगर आपको इस तरह के कोई भी लक्षण देखने को मिलते हैं। तो आपको इन्हें नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। नहीं तो आपकी जान जाने की संभावना अत्यधिक हो सकती है। इसी के साथ अगर आप अपने पीरियड्स में हैं और इस दौरान टैम्पोन का इस्तेमाल करती हैं। तथा इस तरह के लक्षणों का अनुभव करती हैं, तो आपके लिए बीमारी की रिस्क ज्यादा हो सकती है।
टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम का इलाज क्या है
इस बीमारी का इलाज एंटीबायोटिक्स के माध्यम से किया जा सकता है। साथ ही मरीज को ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रखने की और शरीर में पानी की मात्रा बढ़ाए रखने की खास जरूरत होती है। खैर जरूरी ये है कि, ऐसे किसी भी प्रकार के लक्षण दिखने की स्थिति में समय बर्बाद या घर पर उपचार करने के बजाय। किसी जानकार डॉक्टर से सलाह लेना इलाज करना बेहद जरूरी है।
