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दुनिया मे हर घंटे 1000 मौतें! WHO रिपोर्ट में हाई ब्लड प्रेशर को लेकर खौफनाक खुलासा

ब्लड प्रेशर को लेकर हाल ही में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की ओर से जो आंकड़े पेश किए हैं, वो चौंकाने वाले हैं। कई देशों में इस समस्या को लेकर सामान्य इलाज भी उपलब्ध नहीं है जिसकी वजह से लाखों लोग अपनी जान समय से पहले ही गंवा सकते हैं। जानें इस बारे में।

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नया काल बना हाई ब्लड प्रेशर (Pic: iStock)

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन पर अपनी नई रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बताया गया है कि साल 2024 में दुनिया भर में 1.4 अरब लोग हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित थे। इनमें से केवल 20 प्रतिशत से भी कम लोग ऐसे हैं जिनका ब्लड प्रेशर नियंत्रण में है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो लाखों लोग समय से पहले अपनी जान गंवाएंगे और देशों को आर्थिक तौर पर भी भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

रिपोर्ट के बड़े खुलासे:

  • हर घंटे 1000 से ज़्यादा मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक के कारण होती हैं, जिनका मुख्य कारण हाई ब्लड प्रेशर होता है।
  • केवल 28% गरीब देशों में ही सभी ज़रूरी दवाइयां सामान्य तौर पर उपलब्ध हैं।
  • हाई ब्लड प्रेशर पूरी तरह से रोका और इलाज किया जा सकता है, फिर भी यह करोड़ों की जान ले रहा है।
  • 195 देशों में से 99 देशों में हाइपरटेंशन कंट्रोल रेट 20% से कम है।

क्यों नहीं हो रहा है इलाज?

WHO रिपोर्ट के मुताबिक, निम्न और मध्यम आय वाले देशों में हाइपरटेंशन के इलाज में कई बड़ी बाधाएं हैं:

  • हेल्थ सिस्टम में संसाधनों की कमी
  • दवाइयों की अनियमित उपलब्धता और महंगाई
  • प्रशिक्षित डॉक्टरों की कमी
  • ब्लड प्रेशर जांच के उपकरणों की कमी
  • धूम्रपान, शराब, नमक और फैट से जुड़ी जागरूकता की कमी
  • सस्ती दवाएं, लेकिन लोगों की पहुंच से बाहर
ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए सस्ती और असरदार दवाइयां मौजूद हैं, लेकिन WHO ने बताया कि लाखों लोगों को ये दवाएं मिल ही नहीं पा रही हैं। इससे हर साल करोड़ों का नुकसान और लाखों मौतें हो रही हैं।

बांग्लादेश ने 2019 से 2025 के बीच कुछ इलाकों में ब्लड प्रेशर नियंत्रण दर 15% से बढ़ाकर 56% कर दी। दक्षिण कोरिया में सस्ती दवाएं और मरीजों पर कम खर्च ने ब्लड प्रेशर कंट्रोल को 59% तक पहुंचाया। फिलीपींस में WHO की HEARTS योजना के ज़रिए पूरे देश में गांव-स्तर पर इलाज की व्यवस्था की गई।

WHO की अपील

WHO ने सभी देशों से अपील की है कि हाइपरटेंशन को उनकी यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC) नीतियों में शामिल किया जाए। अगर रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू किया जाए तो लाखों जिंदगियां बचाई जा सकती हैं और भारी आर्थिक नुकसान को टाला जा सकता है।

हाइपरटेंशन क्या है?

WHO के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का

  • सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 140 mmHg या अधिक
  • डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर 90 mmHg या अधिक
दो अलग-अलग दिनों पर मापा गया हो, तो उसे क्लीनिकल हाइपरटेंशन माना जाता है।

हालांकि इससे कम स्तर पर भी, यानी 130 mmHg से ऊपर होने पर भी, खतरा बढ़ सकता है। हाई ब्लड प्रेशर एक "साइलेंट किलर" है, इसका इलाज मुमकिन है, दवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन सिस्टम की कमजोरियां और जागरूकता की कमी के कारण करोड़ों लोगों की जान जोखिम में है। WHO ने चेताया है कि अगर अब भी समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले समय में यह एक वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल बन सकता है।

WHO रिपोर्ट की खास बातें

1. 1.4 अरब लोग दुनियाभर में हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) से ग्रसित हैं।

2. इनमें से केवल 20% लोग ही इलाज से इसे कंट्रोल कर पा रहे हैं।

3. हर घंटे 1000 से ज़्यादा मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक से होती हैं – जो हाई बीपी से जुड़ी हैं।

4. कम और मध्यम आय वाले देशों में इलाज और दवाओं की भारी कमी है।

5. केवल 28% गरीब देश WHO की सभी सुझाई गई दवाएं उपलब्ध करा पाते हैं।

6. हाइपरटेंशन के इलाज में बाधाएं जो कि जागरूकता की कमी, महंगी दवाओं, जांच उपकरणों की कमी, प्रशिक्षित डॉक्टरों और नर्सों की कमी की वजह से हैं।

7. बांग्लादेश, फिलीपींस और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने काफ़ी सुधार दिखाया है।

8. WHO का आग्रह –

सभी देशों को इसे यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज में शामिल करना चाहिए। सस्ती और जरूरी दवाएं हर जगह उपलब्ध हों।

bhawana gupta
भावना किशोरauthor

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर मूल की भावना ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIMC से 2014 में पत्रकारिता की पढ़ाई की. 12 सालों से मीडिया में काम कर रही हैं. न्यूज़ नेशन, इंडिया न्यूज़, टीवी 9 भारतवर्ष और ज़ी न्यूज़, न्यूज 18 में काम करने का अनुभव. अभी Times Now में Special correspondent हैं.दिल्ली सरकार, स्वास्थ्य ,रेल, कल्चरल, शिक्षा मंत्रालयों के साथ दिल्ली क्राइम ,पॉलिटिक्स और राजधानी की हर छोटी बड़ी खबरों पर खास तौर से नजर रखती हैं. लोगों से जुड़ी खबरों पर काम करने और लोगों तक सही और सटीक खबरें पहुंचाने को अपना मकसद मानती हैं।

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