Chemical Properties of Mango: आम खाना किसे पसंद नहीं होता? गर्मी शुरू होने का सभी को बेसब्री से इंतजार है। हालांकि फिलहाल आम का सीजन नहीं है, लेकिन बाजार और दुकानों पर आम नजर आ रहे हैं। लेकिन ये सभी आम प्राकृतिक रूप से नहीं पके होते हैं। आम खाने के उत्साह में अक्सर लोग केमिकल युक्त आम खरीद लेते हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की 2019 की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 13,000 लोगों के बीच किए गए एक सर्वेक्षण में, लगभग 78 प्रतिशत लोगों को कृत्रिम रूप से पके आमों की पहचान करने के बारे में जानकारी नहीं थी। इसलिए आज हम आपको केमिकल युक्त आम की पहचान करने के कुछ टिप्स देने जा रहे हैं।
कई व्यापारी भारी मुनाफा कमाने के लिए केमिकल और कार्बाइड का इस्तेमाल कर आम पकाते हैं। अगर आप इसे खाते हैं तो यह शरीर के नर्वस सिस्टम में पहुंच जाता है, जिससे सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचता है। इसलिए ऐसे आम खाना हानिकारक हो सकता है।
स्वाभाविक रूप से आम पकने का एक अलग तरीका है। इसके लिए आम को पेड़ से काटकर गर्म स्थान पर पुआल में ढक कर रखा जाता है। लेकिन आजकल केमिकल्स का इस्तेमाल कर आम पकाए जा रहे हैं। यानी इसमें कार्बन मोनोऑक्साइड, एसिटिलीन, कार्बाइड (carbon monoxide, acetylene, carbide) का इस्तेमाल किया जाता है। ये आपकी सेहत के लिए खतरनाक है।
ब्रेन डैमेज हो सकता है
केमिकल युक्त आम खाने से नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचता है। इससे ब्रेन डैमेज हो सकता है। इसके अलावा कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी भी हो सकती है। इनमें स्किन कैंसर, कोलन कैंसर, नर्वस सिस्टम, ब्रेन डैमेज, सर्वाइकल कैंसर (Skin Cancer, Colon Cancer, Nervous System, Brain Damage, Cervical Cancer) शामिल हैं।
कैल्शियम कार्बाइड के हानिकारक प्रभाव क्या हैं? | What are the harmful effects of Calcium Carbide?
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने अपने खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम (PFA-Prevention Of Food Adulteration Act) के नियमों के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा और मानक विनियमों के तहत कैल्शियम कार्बाइड (CaC2), जो गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है जिसके उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था।
FSSAI के मुताबिक कैल्शियम कार्बाइड (Calcium Carbide) में कार्सिनोजेनिक गुण होते हैं और इसका उपयोग अक्सर वेल्डिंग में किया जाता है। यह स्थानीय बाजारों में सस्ता और आसानी से उपलब्ध है, जिससे इसका अंधाधुंध उपयोग होता है।
इसके अलावा, रसायन में आर्सेनिक और फॉस्फोरस हाइड्राइड के निशान विषाक्तता का कारण बन सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उल्टी, दस्त, कमजोरी, त्वचा पर अल्सर, आंखों की स्थायी क्षति (Vomiting, Diarrhoea, Weakness, Ulcers on the skin, Permanent damage to the eyes) और सांस की तकलीफ हो सकती है। यह न्यूरोलॉजिकल सिस्टम को भी प्रभावित कर सकता है जिससे सिरदर्द, चक्कर आना, नींद न आना, मानसिक भ्रम, स्मृति हानि, सेरेब्रल एडिमा (Headache, Dizziness, Sleeplessness, Mental confusion, Memory loss, Cerebral edema) आदि हो सकते हैं। कैल्शियम कार्बाइड के अलावा, एथिलीन पाउडर जैसे कई अन्य रसायन भी हैं जिनका उपयोग इसी उद्देश्य के लिए किया जाता है।
नकली आमों की ऐसे करें पहचान | How to identify fake mangoes
रसायनों के प्रयोग से पकाए जाने वाले आमों की पहचान करना बहुत मुश्किल नहीं है। ये आम कहीं पीले तो कहीं हरे रंग के दिखाई देते हैं। प्राकृतिक रूप से पके हुए आमों पर हरे धब्बे नहीं देखे जाते हैं। इसलिए ऐसे फलों से दूर रहें जिन पर हरे धब्बे हों।
केमिकल से पकाए गए आम को जब काटा जाता है तो वह अंदर से पीला और सफेद नजर आता है। जबकि प्राकृतिक रूप से पके आम अंदर से बिल्कुल पीले नजर आते हैं। केमिकल से भरे फल खाने से मुंह में कसैला स्वाद और मुंह में हल्की जलन होती है। ऐसे में आपको महंगे आम खरीदते और खाते समय इन सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए।
