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गले में कफ और खराश नहीं हो रही ठीक, ये आयुर्वेदिक बूटी खींच निकालेगी छाती का सारा बलगम, सूजन भी होगी कम

  • Authored by: Vineet
  • Updated Jan 20, 2026, 03:15 PM IST

Ayurvedic Herb Baheda Benefits In Winter: अक्सर हम देखते हैं कि सर्दियों में लोगों के गले में कफ, खराश और सीने की जकड़न समस्या बन जाती है। इस तरह की समस्याओं के लिए आमतौर पर लोग दवा लेने से बचते हैं। वे इससे राहत के लिए तरह-तरह के घरेलू नुस्खे आजमाते हैं। लेकिन कई बार हम देखते हैं कि घरेलू उपाय भी कुछ काम नहीं करते हैं। ऐसे में आयुर्वेद में आपके लिए एक ऐसी बूटी है जो आपके लिए रामबाण साबित हो सकती है। चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं....

ये बूटी दूर भगाएगी गले की खराश, कफ और खांसी

ये बूटी दूर भगाएगी गले की खराश, कफ और खांसी

Ayurvedic Herb Baheda Benefits In Winter: सर्दियों का मौसम आते ही गले में खराश, खांसी और छाती में कफ जमने की शिकायत बढ़ जाती है। कई बार दवाइयां लेने के बाद भी आराम नहीं मिलता, जिससे परेशानी और बढ़ जाती है। ऐसे में आयुर्वेद में बताई गई एक खास बूटी, जिसे बहेड़ा या माउंटेन मिरोबलन कहा जाता है, बहुत काम की साबित हो सकती है। यह पुराने समय से खांसी और गले की दिक्कतों में इस्तेमाल होती आ रही है। अगर आप भी बढ़ती ठंड में आम वायरल समस्याओं से परेशान हैं तो यह बूटी आपके लिए रामबाण साबित हो सकती है। जानिए यह कैसे फायदेमंद है..

गले में कफ और खराश क्यों बन जाती है बड़ी परेशानी

ठंड के मौसम में ठंडी हवा, धूल और इंफेक्शन की वजह से गले में कफ जमने लगता है। जब यह कफ बाहर नहीं निकल पाता, तो गले में खराश, आवाज बैठना और छाती में भारीपन महसूस होने लगता है। कई लोगों को रात में खांसी ज्यादा परेशान करती है, जिससे नींद भी खराब हो जाती है।

क्या है बहेड़ा और कितनी असरदार

बहेड़ा को आयुर्वेद में बेहद उपयोगी औषधि माना गया है। यह एक प्राकृतिक फल होता है, जिसे सुखाकर दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार, बहेड़ा कफ को ढीला करती है, जिससे गले व छाती में जमा हुआ बलगम आसानी से बाहर निकलने लगता है। यही वजह है कि इसे खांसी और गले की समस्याओं में खास माना गया है।

कैसे छाती का जमा बलगम निकाले बाहर

बहेड़ा का असर धीरे-धीरे लेकिन अंदर तक काम करता है। यह गले और श्वसन तंत्र में जमी गंदगी को साफ करने में मदद करता है। जब कफ पतला होता है, तो खांसी के साथ बाहर निकल जाता है और सीने में हल्कापन महसूस होने लगता है। इससे सांस लेने में भी आसानी होने लगती है।

गले की सूजन और जलन में दे राहत

सिर्फ कफ ही नहीं, बहेड़ा गले की सूजन और जलन को भी कम करने में मदद करता है। जिन लोगों को निगलने में दर्द या गले में लगातार चुभन महसूस होती है, उन्हें इससे आराम मिल सकता है। यही कारण है कि आयुर्वेद में इसे गले के लिए फायदेमंद बताया गया है।

बहेड़ा का सही इस्तेमाल कैसे करें

आमतौर पर बहेड़ा का चूर्ण बनाकर गुनगुने पानी या शहद के साथ लिया जाता है। हालांकि, इसकी मात्रा सीमित रखना जरूरी है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार, जरूरत से ज्यादा सेवन नुकसानदायक हो सकता है। गर्भवती महिलाएं या किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोग इसे लेने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

डॉक्टर को कब दिखाएं

अगर खांसी, कफ या गले की खराश लंबे समय तक ठीक न हो, बुखार या सांस लेने में तकलीफ होने लगे, तो घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है, ताकि सही इलाज मिल सके।

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

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विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विष... और देखें

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