Karwa Chauth Sargi Mistakes: करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए सरगी सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि दिन की शुरुआत से पहले मिलने वाला आखिरी भोजन भी है। सुबह सास या परिवार की बड़ी महिलाओं से मिली सरगी में फेनी, मिठाई, फल, मेवे और दूसरी चीजें शामिल होती हैं। लेकिन सरगी की थाली सजाते समय कई बार महिलाएं ऐसी गलतियां कर बैठती हैं, जिनसे दिन में प्यास, सिरदर्द, थकान और बेचैनी बढ़ सकती है।
खासतौर पर जब व्रत में पानी पीने की भी मनाही हो, तब सुबह क्या खाया और कितना पानी पिया, इस पर ध्यान देना जरूरी है। शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन के कारण प्यास, सिरदर्द, चक्कर और कमजोरी जैसे लक्षण हो सकते हैं। इसलिए करवा चौथ की सरगी तैयार करते समय इन पांच गलतियों से बचना बेहतर है।
करवा चौथ की सरगी में किन गलतियों से बचें
1. सरगी में ज्यादा नमकीन और नमक वाली चीजें खाना
सुबह जल्दी उठकर सरगी खाने के दौरान कई महिलाएं पराठे, नमकीन, भुजिया या दूसरी नमक वाली चीजें खा लेती हैं। स्वाद के लिए थोड़ी मात्रा ठीक हो सकती है, लेकिन बहुत ज्यादा नमक लेने से प्यास बढ़ सकती है। निर्जला व्रत में यह परेशानी ज्यादा महसूस हो सकती है।
ऐसे में सरगी में नमक की मात्रा सीमित रखें। कम नमक वाला पराठा, दही, फल या हल्की सब्जी जैसे विकल्प शामिल कर सकती हैं। जरूरत से ज्यादा नमकीन खाने के बजाय संतुलित भोजन पर ध्यान दें।
2. सिर्फ मीठी फेनी, मिठाई या सेवइयां खाकर व्रत शुरू करना
करवा चौथ की सरगी में मीठी फेनी और सेवइयां खाने की परंपरा है। लेकिन अगर आप सुबह सिर्फ मीठी चीजें खाकर व्रत शुरू करती हैं, तो भोजन में प्रोटीन और दूसरे जरूरी पोषक तत्वों की कमी रह सकती है। बहुत ज्यादा मीठा खाने से कुछ लोगों को थोड़ी देर बाद फिर भूख या थकान महसूस हो सकती है।
सरगी में आप अपनी पसंद की फेनी या सेवइयां जरूर खाएं, लेकिन साथ में कुछ भीगे बादाम, अखरोट, दही या पनीर भी ले सकती हैं। केला, सेब या दूसरा पसंदीदा फल भी अच्छा विकल्प है। इससे सरगी में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा का बेहतर संतुलन बन सकता है।
3. सुबह पर्याप्त पानी न पीना
यह सरगी की सबसे अहम गलतियों में से एक है। कई महिलाएं सुबह जल्दी में खाना तो खा लेती हैं, लेकिन पानी पीने पर ध्यान नहीं देतीं। इसके बाद पूरे दिन पानी नहीं मिलने से शरीर में तरल पदार्थों की कमी हो सकती है। इसका असर प्यास, मुंह सूखने, सिरदर्द और चक्कर के रूप में दिख सकता है।
इससे बचने के लिए व्रत से पहले के समय में नियमित रूप से पानी पिएं। एक साथ बहुत सारा पानी पीने के बजाय कुछ अंतराल पर पानी लेना बेहतर है। नारियल पानी, दूध या छाछ भी तरल पदार्थों की मात्रा बढ़ाने में मदद कर सकते हैं, यदि वे आपके लिए उपयुक्त हों।
ध्यान रखें कि सुबह खूब पानी पी लेने से पूरे दिन डिहाइड्रेशन का खतरा खत्म नहीं हो जाता। शरीर की जरूरत, मौसम और व्रत की अवधि के अनुसार परेशानी हो सकती है।
4. सरगी में बहुत ज्यादा तला-भुना और मसालेदार खाना
पूरी, पकौड़े और ज्यादा तेल-मसाले वाला भोजन सरगी को स्वादिष्ट तो बना सकता है, लेकिन सुबह-सुबह भारी खाना खाने से पेट में भारीपन, गैस, एसिडिटी या बेचैनी हो सकती है। खासकर जिन महिलाओं को पहले से पाचन संबंधी परेशानी रहती है, उन्हें इस बात का ध्यान रखना चाहिए।
इसलिए बेहतर है कि सरगी में घर का बना हल्का और संतुलित भोजन चुनें। कम तेल वाला पराठा, दही, फल, मेवे और दूध में बनी फेनी जैसे विकल्प शामिल किए जा सकते हैं। पेट भरने के लिए बहुत ज्यादा खाने के बजाय अपनी भूख के अनुसार खाएं।
5. ज्यादा चाय-कॉफी पीकर व्रत शुरू करना
सुबह जल्दी उठने पर नींद भगाने के लिए कुछ महिलाएं सामान्य से ज्यादा चाय या कॉफी पी लेती हैं। कैफीन कुछ लोगों में बेचैनी, धड़कन बढ़ने या एसिडिटी की समस्या पैदा कर सकता है। अगर आप रोज चाय पीती हैं, तो अचानक अपनी आदत बदलने से भी सिरदर्द हो सकता है। वहीं, पर्याप्त पानी न पीने के कारण होने वाला डिहाइड्रेशन भी सिरदर्द की वजह बन सकता है।
इसलिए सरगी में चाय-कॉफी की मात्रा सीमित रखें और उसे पानी का विकल्प न समझें। सरगी के दौरान पर्याप्त तरल पदार्थ लें। अगर आपको रोज कई कप चाय पीने की आदत है, तो व्रत वाले दिन अचानक बहुत बड़ा बदलाव करने के बजाय पहले से ही इसकी मात्रा संतुलित रखने की कोशिश करें।
करवा चौथ के दिन सिरदर्द और प्यास से बचने के लिए क्या करें
सरगी में सही चीजें खाने के अलावा दिनभर अपनी गतिविधियों का ध्यान रखना भी जरूरी है।
- व्रत से एक दिन पहले से नियमित रूप से पानी पिएं।
- सुबह सरगी में संतुलित भोजन और पर्याप्त तरल पदार्थ लें।
- धूप में ज्यादा देर रहने और भारी शारीरिक काम करने से बचें।
- संभव हो तो दिन में आराम करें और पूजा की तैयारियां पहले ही पूरी कर लें।
- व्रत खोलने के बाद पानी धीरे-धीरे पिएं और हल्के भोजन से शुरुआत करें।
किन महिलाओं को निर्जला व्रत रखने में सावधानी बरतनी चाहिए
गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं और डायबिटीज, किडनी या दूसरी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही महिलाओं को निर्जला व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। नियमित दवाएं लेने वाली महिलाओं को भी अपनी दवा का समय या मात्रा खुद से नहीं बदलनी चाहिए।
अगर व्रत के दौरान तेज सिरदर्द, लगातार चक्कर, बहुत ज्यादा कमजोरी या बेहोशी जैसा महसूस हो, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें। भ्रम, बेहोशी या गंभीर लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।
