भारत में अनियंत्रित डायबिटीज का बढ़ता खतरा: जब दवाएं न करें असर, सर्जरी बन सकती है जीवनरक्षक इलाज, AIIMS दिल्ली का दावा
- Reported by: भावना किशोर
- Updated Dec 11, 2025, 09:38 AM IST
एम्स के सर्जन डॉ. मंजूनाथ ने दावा किया है कि मेटाबॉलिक सर्जरी के ज़रिए टाइप-2 डायबिटीज पूरी तरह खत्म की जा सकती है. उन्होंने बताया कि दो घंटे की इस सर्जरी में आंतों का रास्ता बदला जाता है, जिससे इंसुलिन सेंसिटिविटी तुरंत बढ़ती है और शुगर लेवल एक-दो दिन में normal हो जाता है. एम्स में 30 मरीजों पर यह सर्जरी की गई और अब उन्हें दवाइयों की जरूरत नहीं है. डॉक्टर के मुताबिक, यह इलाज सिर्फ टाइप-2 डायबिटीज पर प्रभावी है, टाइप-1 पर नहीं
डायबिटिज का खतरा बढ़ता जा रहा है। तस्वीर-PTI
भारत दुनिया में डायबिटीज़ की राजधानी कहलाता है, लेकिन इससे भी चिंताजनक बात यह है कि देश तेज़ी से अनकंट्रोल्ड डायबिटीज़ का ग्लोबल हब बनता जा रहा है। लाखों लोग दवाएँ लेने के बावजूद खतरनाक रूप से बढ़े शुगर लेवल के साथ जी रहे हैं। अनकंट्रोल्ड डायबिटीज़ चुपचाप किडनी फेल्योर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, अंधापन और अम्प्यूटेशन जैसे जानलेवा जोखिम बढ़ा देती है।
लेकिन एक महत्वपूर्ण सच अभी भी बहुत से लोगों से छुपा है जब दवाएँ विफल हो जाएँ, तब मेटाबॉलिक (बेरियाट्रिक) सर्जरी अनकंट्रोल्ड टाइप-2 डायबिटीज़ के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य और प्रभावी उपचार है। 2016 में इंटरनेशनल डायबिटीज़ फेडरेशन ने इसे वैज्ञानिक रूप से सिद्ध इलाज के रूप में मान्यता दी थी, सिर्फ मोटापे के लिए नहीं बल्कि बिना मोटापे वाले मरीजों के लिए भी।
एक ऑपरेशन और डायबिटीज गायब? एम्स डॉक्टर का बड़ा दावा ?
डायबिटीज को अब तक ऐसी बीमारी माना जाता था जिसे सिर्फ कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन मिटाया नहीं जा सकता। मगर एम्स के सर्जरी विभाग के डॉक्टर मंजूनाथ ने दावा किया है कि डायबिटीज को महज दो घंटे की सर्जरी के बाद ठीक किया गया है। नए दावे ne हलचल मचा दी है। उनका कहना है कि मेटाबॉलिक सर्जरी नाम की एक प्रक्रिया से टाइप-2 डायबिटीज को जड़ से खत्म किया जा सकता है। एम्स में इस सर्जरी को करीब 30 मरीजों पर आज़माया गया और सभी में शुगर लेवल सामान्य पाया गया इतना कि मरीजों को दवाइयों की जरूरत भी नहीं पड़ी।
इस सर्जरी में पेट और आंतों के रास्ते को थोड़ा बदला जाता है ताकि शरीर इंसुलिन के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो जाए। डॉक्टरों के मुताबिक, सर्जरी के एक–दो दिन के भीतर ही शुगर लेवल सामान्य होने लगता है। हालांकि, यह तरीका सिर्फ टाइप-2 डायबिटीज में असरदार पाया गया है, टाइप-1 में नहीं। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि सर्जरी के बाद मरीज अगर अपनी लाइफस्टाइल और खानपान स्वस्थ रखें तो सालों तक शुगर दोबारा नहीं बढ़ती।
भारत के कई सेंटर्स के अनुभव भी यही बताते हैं। एक विश्लेषण में ऐसे 30 से अधिक मरीजों पर सर्जरी की गई जिनकी डायबिटीज़ दवाओं से काबू में नहीं आ रही थीकई मरीज मोटे भी नहीं थे। हैरानी की बात यह रही कि लगभग सभी मरीज सर्जरी के बाद दवाओं से मुक्त हो गए और बहुतों में सर्जरी के अगले ही दिन ब्लड शुगर में तेज़ सुधार दिखा। यह साबित करता है कि फायदे सिर्फ वजन घटाने से नहीं, बल्कि शरीर में आने वाले मेटाबॉलिक बदलावों से होते हैं।
भारत में डायबिटीज़ का खतरा हर साल बढ़ रहा है। ऐसे में यह जागरूकता ज़रूरी है कि मेटाबॉलिक सर्जरी कोई अंतिम विकल्प नहीं, बल्कि सुरक्षित, वैज्ञानिक और विश्व-मान्य इलाज है, खासकर तब जब दवाएँ असर करना बंद कर दें। लाखों भारतीयों के लिए यह इलाज जटिलताओं से भरी ज़िंदगी और एक सुरक्षित, स्वस्थ जीवन के बीच का फर्क साबित हो सकता है।