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Explained: संभल में क्यों भड़की हिंसा, आखिर क्या है जामा मस्जिद के सर्वे से जुड़ा विवाद? 10 पॉइंट में समझिए सबकुछ

Jama Masjid Survey Controversy: संभल में जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा भड़क उठी। भीड़ ने सर्वे टीम के सदस्यों पर हमला कर दिया और जबरदस्त पत्थरबाजी की गई है। क्या आप जानते हैं कि आखिर इस हिंसा की वजह क्या है और आखिर संभल के जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर असल विवाद क्या है। आपको इस रिपोर्ट में सबकुछ तफसील से समझाते हैं।

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संभल में जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर भड़की हिंसा

Why Violence Erupt in Sambhal: क्या आप जानते हैं कि आखिर उत्तर प्रदेश के संभल में हिंसा क्यों भड़की? जामा मस्जिद के सर्वे से जुड़ा सारा विवाद क्या है? मस्जिद का सर्वेक्षण करने जब सर्वे टीम पहुंची तो हिंसा भड़क उठी, रविवार को वहां मौजूद भीड़ ने पहले तो विरोध किया और फिर पत्थरबाजी करने लगे। हालात को बेकाबू होता देख, भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भीड़ को समझाने की कोशिश की, लेकिन बेकाबू भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया। आपको ये सारा माजरा 10 पॉइंट में समझाते हैं।

अदालत के आदेश पर हुआ संभल की जामा मस्जिद का सर्वे

उत्तर प्रदेश में संभल जिले की एक अदालत ने जामा मस्जिद का सर्वेक्षण करने का आदेश दिया। जिसके बाद बीते मंगलवाल को मस्जिद का सर्वे कि.ा गया। दावा है कि इस मस्जिद का निर्माण किसी मंदिर को खंडित करके किया गया है। याचिकाकर्ता अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने बताया कि सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत ने जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के लिये ‘एडवोकेट कमीशन’ गठित करने के निर्देश दिये। अदालत ने कहा है कि कमीशन के माध्यम से वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी सर्वे कराकर अदालत में रिपोर्ट दाखिल की जाए।

बाबर ने मंदिर को तोड़ कर मस्जिद में बदलने की कोशिश की थी

विष्णु जैन ने ये बताया कि संभल में हरिहर मंदिर हमारी आस्था का केंद्र है। हमारी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां पर दशावतार में से कल्कि अवतार यहां से होना है। वर्ष 1529 में बाबर ने मंदिर को तोड़ कर मस्जिद में बदलने की कोशिश की थी। यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित क्षेत्र है। उसमें किसी भी तरह का अतिक्रमण नहीं हो सकता। जैन ने कहा कि वहां पर बहुत सारे निशान और संकेत हैं जो हिन्दू मंदिर के हैं। इन सारी बातों को ध्यान रखते हुए अदालत ने यह आदेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में एएसआई, उत्तर प्रदेश सरकार, जामा मस्जिद कमेटी और संभल के जिलाधिकारी को पक्षकार बनाया गया है।

'हरि हर मंदिर के नाम से जाना जाता था संभल का जामा मस्जिद'

इस पूरे मामले में विष्णु जैन ने बताया था कि सिविल कोर्ट संभल ने उनकी याचिका पर ‘एडवोकेट कमिश्नर’ द्वारा संभल में कथित जामा मस्जिद का सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया, जिसे हरि हर मंदिर के नाम से जाना जाता था। बाबर ने 1529 में इस स्थान को आंशिक रूप से ध्वस्त कर दिया था। ऐसा माना जाता है कि कल्कि अवतार संभल में होना है। संभल के जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया ने बीते मंगलवार को मीडिया को बताया था कि आदेश के अनुसार ‘एडवोकेट कमिश्नर’ ने सर्वे किया था। इस दौरान दोनों पक्ष मौजूद थे।

सपा सांसद जिया उर रहमान बर्क ने सर्वे को लेकर क्या कुछ कहा?

संभल से सपा सांसद जिया उर रहमान बर्क ने इस मामले में कहा था कि संभल की जामा मस्जिद ऐतिहासिक और बहुत पुरानी है। 1991 में सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया था कि 1947 से जो भी धार्मिक स्थल जिस स्थिति में हैं, वे अपने स्थान पर ही रहेंगे। उसके बाद भी कुछ लोग देश और प्रदेश का माहौल खराब करना चाहते हैं। हम उनके खिलाफ हैं। उन्होंने आगे कहा कि यहां आए (एडवोकेट) कमीशन ने अपनी सर्वे रिपोर्ट तैयार कर ली है। उन्हें एक इंच जगह पर भी आपत्ति नहीं हो सकती। वहां मस्जिद थी, मस्जिद है और मस्जिद रहेगी।

संभल में जुमे की नमाज के मद्देनजर जामा मस्जिद की सुरक्षा बढ़ी

उत्तर प्रदेश के संभल जिले की जामा मस्जिद को हिंदू पक्ष द्वारा अदालत में हरिहर मंदिर बताये जाने के बाद पुलिस ने शुक्रवार की जुमे की नमाज के मद्देनजर यहां सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया और किसी तरह की अराजकता होने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी जारी की थी। संभल में शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए पुलिस ने पैदल मार्च कर लोगों को संदेश भी दिया और संभल के पुलिस अधीक्षक (एसपी) कृष्ण कुमार विश्नोई ने चेतावनी देते हुए कहा था कि अराजकता फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

संभल में सपा सांसद के पिता समेत 34 लोगों को पाबंद किया

उत्तर प्रदेश के संभल जिले की जामा मस्जिद को हिंदू पक्ष द्वारा अदालत में हरिहर मंदिर बताये जाने के बाद शांति-व्यवस्था को लेकर शुरू हुई पुलिस तथा प्रशासनिक कार्रवाई के तहत समाजवादी पार्टी के सांसद के पिता समेत 34 लोगों को शांति भंग की आशंका के मद्देनजर पाबंद किया गया है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। संभल की उप जिलाधिकारी (एसडीएम) वंदना मिश्रा ने इससे पहले बताया था कि संभल के सपा सांसद जिया उर रहमान वर्क के पिता ममलुकुर रहमान वर्क सहित 34 लोगों को पाबंद किया गया है।

किसी व्यक्ति को पाबंद करने के लिए क्या हैं नियम, समझिए

स्थानीय प्रशासन किसी व्यक्ति को पाबंद करने का आदेश दे सकता है, अगर उसे सूचना मिलती है कि वह व्यक्ति शांति भंग कर सकता है, सार्वजनिक सौहार्द को खतरा पहुंचा सकता है, या कोई गलत कार्य कर सकता है। पुलिस अधीक्षक (एसपी) कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि संभल में लोगों को पांच से 10 लाख रुपये तक के मुचलके पर पाबंद किया गया गया है ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे। इसके पहले शुक्रवार को कड़े पहरे में संभल में जुमे की नमाज हुई।

यूपी के संभल में जामा मस्जिद सर्वे के दौरान पत्थरबाजी

उत्तर प्रदेश के संभल में जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा भड़क उठी है। रविवार को जब सर्वे टीम सर्वे के लिए पहुंची तो वहां मौजूद भीड़ ने पहले विरोध किया और फिर पत्थरबाजी करने लगे। जिसके बाद भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात कर दिया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी भीड़ को समझाने का प्रयास किया, लेकिन उनके प्रयास असफल रहे और भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया।

बिगड़ी स्थिति, पुलिस पर हमला; DM ने खुद संभाला मोर्चा

संभल में हिंसा के लिए उतारू भीड़ को खदेड़ने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी छोड़े हैं। खुद डीएम मौके पर मौजूद हैं और शांति बहाली की कोशिशों में जुटे हैं। हालांकि डीएम की अपील के बाद भी भीड़ नहीं समझी और बाद में पुलिस पर भी हमला कर दिया। उपद्रवियों ने कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। अभी भी रुक-रुक कर पत्थरबाजी जारी है।

उपद्रवियों ने कई वाहनों को लगाया आग, क्या बोली बीजेपी

संभल में भड़की हिंसा पर भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा- "जो लोग कानून को हाथ में लेने का प्रयास कर रहे हैं, उन पर कठोरता से कार्रवाई होगी। यह मुगलिया सल्तनत का दौर नहीं है। कोर्ट के आदेश से आपत्ति है तो उपरी अदालत में अपील करें। कुछ लोगों का संविधान में विश्वास नहीं। न्यायपालिका का आदेश सुनिश्चित होगा। सभी लोग शांति व्यवस्था बनाए रखें।" दरअसल संभल की शाही जामा मस्जिद को लेकर कोर्ट में याचिका दाखिल कर सर्वे की मांग गई थी। शिकायत में दावा किया गया कि आज जहां मस्जिद है, वहां पहले एक मंदिर था। मुगल सम्राट बाबर ने 1529 में इसे आंशिक रूप से ध्वस्त कर दिया था। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सर्वे का आदेश दिया है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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