Bangladesh’s Muhammad Yunus: बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार और नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस ने इस्तीफा देने की पेशकश की है। यह पेशकश बांग्लादेश में एक नए राजनीतिक संकट की तरफ इशारा कर रहा है। यूनुस द्वारा पद छोड़ने की बात कहना कई अटकलों को जन्म दे रहा है। बयानबाजी भी हो रही है। उनके इस कदम के पीछे कहा जा रहा है कि कई मुद्दों पर राजनीतिक दलों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। इसलिए वह सरकार चलाने में दबाव महसूस कर रहे हैं। बीते 22 मई को उन्होंने अपनी कैबिनेट में इस्तीफे की बात कही, जिससे देश की राजनीति में हलचल मच गई।
हसीना के बाद देश की बागडोर संभाली
बता दें कि यूनुस ने अगस्त में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद अंतरिम सरकार की बागडोर संभाली थी। लेकिन अब वे इस भूमिका में खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। उन्होंने अपने सलाहकारों से कहा कि अगर वे स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर सकते तो उनके पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। हालांकि उनके करीबी सहयोगियों, जैसे कि एनसीपी संयोजक नाहिद इस्लाम, महफुज आलम और आसिफ महमूद ने उनसे मुलाकात कर इस्तीफा न देने की सलाह दी।

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चुनाव कराने का वादा पूरा नहीं हुआ
जानकार मानते हैं कि यूनुस की इस नाराजगी के पीछे मुख्य कारण राजनीतिक अस्थिरता और विपक्षी दलों की ओर से मिल रहा विरोध है। बीएनपी ने यूनुस पर चुनाव को लेकर वादा पूरा न करने का आरोप लगाया है। यूनुस ने 2026 तक चुनाव कराने की बात कही थी, लेकिन बीएनपी तुरंत स्पष्ट तारीख चाहती है। इसके अलावा, 2020 के मेयर चुनाव में धांधली के आरोप और चुनाव आयोग के फैसलों को लागू न करने पर भी यूनुस की अंतरिम सरकार को घेरा जा रहा है।
सेना प्रमुख से इन मुद्दों पर मतभेद
दूसरी बड़ी चुनौती सेना से रिश्तों की है। सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज़-ज़मान और यूनुस के बीच चुनाव की तारीख, म्यांमार के लिए ह्यूमैनिटेरियन कॉरिडोर, और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की नियुक्ति जैसे मुद्दों पर मतभेद हैं। जनरल जमान चाहते हैं कि चुनाव 2025 के अंत तक हो जाएं, जबकि यूनुस की योजना इससे अलग है। यूनुस द्वारा पूर्व राजनयिक खलीलुर रहमान को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाने का निर्णय भी सेना को रास नहीं आया। सेना प्रमुख ने कहा है कि देश में राजनीतिक स्थिरता की जरूरत है और यह स्थिरता एक चुनी हुई सरकार दे सकती है। सेना प्रमुख का इशारा साफ है कि नियुक्त किए गए यूनुस बांग्लादेश को संकट से नहीं निकाल सकते।

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विदेश सचिव मो. जसीम उद्दीन को हटाया
यूनुस पर यह भी आरोप है कि वे सिविल प्रशासन पर नियंत्रण खोते जा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने विदेश सचिव मो. जसीम उद्दीन को हटा दिया, जो उनके नजरिए से मेल नहीं खाते थे। इससे प्रशासनिक असंतोष भी उभरकर सामने आया है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यूनुस का इस्तीफे की धमकी देना रणनीतिक कदम हो सकता है, जिससे वे सेना विरोधी जन समर्थन जुटा सकें। सोशल मीडिया पर आंदोलन की तैयारियों की भी खबरें आ रही हैं।
अंतरिम कैबिनेट के अंदर बढ़ता तनाव भी चुनौती
पिछले दो दिन में यूनुस की सरकार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है जिनमें अंतरिम कैबिनेट के अंदर बढ़ता तनाव भी है। अंतरिम सरकार ने 12 मई को शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी की पूर्ववर्ती सरकार को रातोंरात संशोधित एक आतंकवाद निरोधक कानून के तहत आधिकारिक रूप से भंग कर दिया था। इससे दो दिन पहले ही अंतरिम सरकार ने कानून के पिछले संस्करण के तहत पार्टी की गतिविधियों पर रोक लगा दी थी। राजनीतिक दल यूनुस पर अगले चुनाव की तारीख घोषित करने का दबाव डाल रहे हैं। इस संपूर्ण स्थिति का बांग्लादेश के भविष्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। देश की अर्थव्यवस्था पहले ही गिरावट में है और भारत के साथ रिश्ते पहले ही पटरी पर से उतर चुके हैं। बांग्लादेश की आंतरिक स्थितियां किसी बड़े संकट की ओर इशारा कर रही हैं।
