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स्ट्रेट ऑफ होरमुज में ईरान बिछा रहा समुद्री सुरंगें, क्या होती हैं नेवल माइंस, ये कितनी घातक?

नेवल माइन एक खुद ब खुद विस्फोट होने वाला उपकरण है जिसे समुद्र में बिछाया जाता है। इसे पनडुब्बियों और पानी के ऊपर तैर रहे जहाजों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। इस सुरंग का उपयोग दुश्मन को क्षेत्रों तक पहुंचने से रोकने और दुश्मन को खास जगहों पर घेरने के लिए भी किया जाता है।

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ईरान बिछा रहा समुद्री सुरंगे, ये कितनी खतरनाक?

Photo : AP

ईरान युद्ध अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। न सिर्फ आसमान बल्कि समुद्र में भी बड़ी लड़ाई छिड़ गई है। डोनाल्ड ट्रंप ईरानी नौसेना को बर्बाद करने का आदेश दे चुके हैं। हिंद महासागर में ईरानी फ्रिगेट आईआआईएस डेना की तबाही इसका सबूत भी देती है। अमेरिका अपने मकदस को पूरी ताकत के साथ पूरा कर रहा है। इस बीच अमेरिका ने 10 मार्च को 16 माइन बिछाने वाले नौसैनिक जहाजों को बर्बाद करने का दावा किया है। यह कार्रवाई ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में माइन बिछाने की तैयारी के बीच की गई है। सबूत के तौर पर उसने इसके वीडियो भी एक्स पर पोस्ट किए हैं। अब जानने की कोशिश करते हैं कि स्ट्रेट ऑफ होरमुज में ईरान समुद्री सुरंग क्यों बिछा रहा है और क्या होती हैं नेवल माइंस, और ये कितनी घातक होती हैं?

नौसैनिक माइंस क्या हैं?

नेवल माइन एक खुद ब खुद विस्फोट होने वाला उपकरण है जिसे समुद्र में बिछाया जाता है। इसे पनडुब्बियों और पानी के ऊपर तैर रहे जहाजों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। इस सुरंग का उपयोग दुश्मन को क्षेत्रों तक पहुंचने से रोकने और दुश्मन को खास जगहों पर घेरने के लिए भी किया जाता है। इस गोला-बारूद का इस्तेमाल अमेरिकी क्रांति के समय से होता आ रहा है, जब येल विश्वविद्यालय के छात्र डेविड बुशनेल ने यह पता लगाया था कि बारूद को पानी के अंदर विस्फोटित किया जा सकता है।

कैसे काम करती है समुद्री सुरंग?

आजकल समुद्री सुरंग कई प्रकार की होती हैं; कुछ इस प्रकार डिजाइन की जाती हैं कि जब किसी पोत का पतवार उनसे संपर्क में आता है तो वे फट जाती हैं, और कुछ स्टील केबल से बंधी होती हैं ताकि वे पानी के नीचे रहें। सुरंगों के विस्फोट का तरीका भी अलग-अलग होता है। सुरंग में विस्फोट के लिए पोत का इनके संपर्क में आना जरूरी होता है। ये सुरंगे किसी पोत की मौजूदगी से फट जाती हैं, चाहे वह चुंबकीय, ध्वनि से या दबाव के कारण हो। नियंत्रित सुरंगों को तटों पर मौजूद स्टेशन से विस्फोट कराया जा सकता है।

नेवल माइंस यानी नौसैनिक सुरंगें बेहद खतरनाक हो सकती हैं। इस गोला-बारूद के खतरे को 2011 में प्रकाशित नेवल वॉर कॉलेज रिव्यू के एक लेख, जिसका शीर्षक है "टेकिंग माइंस सीरियसली—माइन वॉरफेयर इन चाइनाज नियर सीज", में बखूबी समझाया गया है। इसमें लेखक स्कॉट ट्रूवर ने कहा, सुरंगे 'प्रतीक्षा करने वाले हथियार' हैं। वे नौसैनिक खतरे का सबसे बेहतर उदाहरण हैं। द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद से, खदानों ने अन्य सभी हमले के साधनों के मुकाबले लगभग चार गुना अधिक नौसेना के जहाजों को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया या डुबो दिया था। बारूदी सुरंगों के उलट समुद्री सुरंगों पर अंतरराष्ट्रीय समझौते लागू नहीं होते। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून कुछ नियम निर्धारित करता है। उदाहरण के लिए, देश बाहरी हमलों से अपने तटों की रक्षा के लिए इन्हें अपने जलक्षेत्र में रख सकते हैं। हेग कन्वेंशन अंतरराष्ट्रीय जल में बहने वाली सुरंगों के इस्तेमाल पर रोक लगाता है।

समुद्री सुरंगें कितनी खतरनाक हैं?

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि नौसैनिक सुरंगें समुद्र में सबसे प्रभावी हथियारों में से हैं। कम तकनीक की जरूरत के कारण इन्हें जहाजों, पनडुब्बियों, छोटी नावों और यहां तक कि अस्थायी प्लेटफार्मों द्वारा भी गुप्त रूप से तैनात किया जा सकता है। फिर भी ये सैन्य और वाणिज्यिक ट्रैफिक, जैसे तेल टैंकरों, को उनके आकार और लागत के विपरीत अनुपात में पंगु बना देती हैं।

समुद्री सुरंगें इतनी खतरनाक होती हैं कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अब तक 15 अमेरिकी नौसैनिक पोतों को समुद्री सुरंगों ने निशाना बनाया है, जो किसी भी अन्य हथियार से मौत की तुलना में लगभग चार गुना अधिक है। इनमें से सबसे विनाशकारी हमला 1988 में ईरान-इराक युद्ध के दौरान हुआ था। एक ईरानी सुरंग ने अमेरिकी फ्रिगेट यूएसएस सैमुअल रॉबर्ट्स (USS Samuel Roberts) को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया था, लेकिन उसे डुबाया नहीं था। पोत की मरम्मत की लागत 96 मिलियन डॉलर आंकी गई थी। जबकि सुरंग की कीमत मात्र 1,500 डॉलर थी।

रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान नेवल माइंस से पैदा खतरे भी नजर आए। काला सागर दोनों पक्षों द्वारा गिराई गई सैकड़ों सुरंगों से भरा पड़ा है, जो लोगों के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है। रक्षा विश्लेषक यह भी बताते हैं कि नौसैनिक सुरंगों को निष्क्रिय करना और भी मुश्किल बना देता है। जमीन पर निष्क्रिय करने के प्रयास एक ही स्तर पर केंद्रित होते हैं, जो मिट्टी में बहुत गहराई तक नहीं होते। बारूदी सुरंगें आमतौर पर एक ही जगह पर टिकी रहती हैं। लेकिन समुद्र में एक खदान बहकर किसी दूसरी जगह पर जा सकती है।

होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री सुरंगों से क्या खतरे?

ईरान युद्ध की शुरुआत से ही यह चिंता बनी हुई है कि तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण कैसे बनाए रखेगा, जिससे दुनिया के कुल तेल का 20 प्रतिशत परिवहन होता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही आईआरजीसी को चेतावनी दी थी कि अगर जलडमरूमध्य को अवरुद्ध किया गया तो उन्हें मौत, आग और क्रोध का सामना करना पड़ेगा। और 10 मार्च को अमेरिकी अधिकारियों ने खुलासा किया कि ईरान इस महत्वपूर्ण शिपिंग लेन को और बाधित करने की रणनीति के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक खदानें तैनात करने की तैयारी कर रहा है।

सीबीएस की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान जलडमरूमध्य में दो से तीन सुरंगे बिछाने के लिए छोटे जहाजों का इस्तेमाल कर रहा है। ईरान के पास मौजूद सुरंगों का सटीक भंडार तो पता नहीं है, लेकिन अनुमान है कि उनके पास लगभग 2,000 से 6,000 नौसैनिक सुरंगे हैं, जिनका अधिकांश उत्पादन ईरान, चीन या रूस में हुआ है। इसके बाद, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, अगर किसी भी कारण से खदानें बिछाई गई हैं और उन्हें तुरंत नहीं हटाया गया, तो ईरान को अभूतपूर्व सैन्य परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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