Lalit Modi Passport: इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल के जनक और कर्ताधर्ता ललित मोदी को बहुत बड़ा झटका लगा है। वानुआतु ने उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया है। ऐसी चर्चा है कि ललित मोदी इस देश की नागरिकता ले चुके थे और वह लंदन छोड़कर अपना अगला ठिकाना इसी देश में बनाना चाहते थे लेकिन अब उनकी हसरत पूरी नहीं होगी क्योंकि वानुआतु के प्रधानमंत्री जोथाम नपाट ने अपने नागरिकता आयोग को उनका पासपोर्ट रद्द करने के लिए कह दिया है। जाहिर है कि पीएम नपाट के इस आदेश के बाद वानुआतु में ठिकाना बनाने का ललित मोदी का सपना अब पूरा नहीं हो पाएगा। सवाल है कि वर्षों से लंदन में रह रहे ललित मोदी ने रहने के लिए आखिर वानुआतु को ही क्यों चुना? उनके पास पैसों की कमी नहीं है। वह अरबपति हैं। वह रहने के लिए किसी अमीर, विकसित या कैरेबियाई देश जा सकते थे? फिर वानुआतु की नागरिकता लेने की जरूरत क्या थी? लेकिन इससे पहले यह जानना जरूरी है कि वानुआतु आखिर है कहां?
83 द्वीपों वाला देश है वानुआतु
वानुआतु दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित कई द्वीपों का एक देश है। इस देश के पास 83 द्वीप हैं और इनमें से 65 द्वीपों पर लोग रहते हैं। इसके पड़ोसी और आस-पास के देशों की अगर बात करें तो इसके पूर्व में ऑस्ट्रेलिया और उत्तर में न्यूजीलैंड पड़ता है। यह ऑस्ट्रेलिया और फिजी के बीच में पड़ता है। इस देश की राजधानी पोर्ट विला है जो कि सबसे बड़ा शहर भी है और यह इफाटे आइलैंड में है। भाषा की अगर बात करें तो वानुआतु की तीन आधिकारिक भाषाएं बिस्लामा, अंग्रेजी और फ्रेंच हैं। इस देश की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि, पर्यटन, मत्स्य पालन और वित्तीय बैंकिंग सेवा पर आधारित है। यह देश बड़ी मात्रा में कावा का निर्यात करता है।
कमाई पर टैक्स नहीं लगता
इस देश की एक बहुत बड़ी खूबी यह है कि यहां किसी तरह का टैक्स नहीं लगता। टैक्स पर लोगों को बहुत बड़ी राहत मिलती है। यहां के लोगों को न तो इनकम टैक्स, न तो विदहोल्डिंग टैक्स, न कैपिटल गेन टैक्स, न इनहेरिटेंस टैक्स और न ही एक्सचेंज कंट्रोल देना होता है। यानी दूसरे देशों की तरह जहां तरह-तरह के टैक्स देने होते हैं, यहां के लोगों को इससे राहत मिल जाती है। आप सोचेंगे जब लोग टैक्स नहीं देते तो इस देश के पास राजस्व कहां से आता है और सरकार की कमाई कहां से होती है। तो वानुआतु की कमाई का जरिया यहां का VAT, पर्यटन और कृषि निर्यात है। इनसे इस देश को भारी कमाई होती है। वानुआतु उन टैक्स हेवन कंट्रीज में शामिल हैं जो अपने निवेश प्रोग्राम के जरिए लोगों को नागरिकता देते हैं। टैक्स हेवन कंट्रीज वे देश हैं जहां पर टैक्स बहुत कम लगता है। ये देश कारोबार और बैंकिंग सेवा को लेकर अत्यधिक गोपनीयता तो बरतते ही हैं। कारोबार करने और उसे सुरक्षित रखने के लिए तरह-तरह की सुविधाएं भी देते हैं। कंपनियों पर टैक्स भी नाम मात्र का लगता है।
डेढ़ लाख अमेरिकी डॉलर में मिलती है नागरिकता
इसलिए, आप पाएंगे कि हरेफेर से कमाई करने वाले और सरकार को चूना लगाने वाले ज्यादातर वांछित या भगोड़े इन टैक्स हैवन देशों की ओर रुख करते हैं और यहां की नागरिकता लेते हैं। टैक्स हैवन कंट्रीज की अगर बात करें तो साइमन आइलैंड, आइल आफ मैन, बहामास, लक्जमबर्ग, मॉरीशस, माल्टा, पनामा, बरमूडा, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड, साइप्रस, तमाम ऐसे देश हैं जो भारी भरकम निवेश के बाद अपने यहां की नागरिकता खुशी-खुशी आपको दे देते हैं। या कहिए कि ये पैसे से अपनी नागरिकता बेचते हैं। वानुआतु भी ऐसा ही देश है। जहां आप करीब डेढ़ लाख अमेरिकी डॉलर का निवेश कर यहां की नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं। इस देश में दूसरे टैक्स हैवन देशों की तुलना में कम निवेश करना पड़ता है, इसलिए यहां की नागरिकता पाने के लिए ज्यादातर लोग आवेदन करते हैं और इससे इस देश को अच्छी-खासी कमाई हो जाती है। यही नहीं, वानुअतू के पासपोर्ट पर आप 56 देशों में जा सकते हैं।
आबादी तीन लाख के करीब है आबादी
वानुआतु अपने ज्वालामुखी के लिए भी मशहूर है। यहां माउंट यासुर सहित कई सक्रिय ज्वालामुखी हैं। यहां के सक्रिय ज्वालामुखी से
लावा निकलते रहना आम बात है। यही नहीं, यहां समुद्र में भी कई ज्वालामुखी हैं। जनसंख्या की अगर बात करें तो 2020 की जनगणना के मुताबिक इस देश की आबादी तीन लाख के करीब है जिसमें करीब डेढ़ लाख पुरुष और डेढ़ लाख महिलाएं हैं। यह तो रही वानुआतु की बात, अब बात फिर ललित मोदी की। दरअसल, ललित मोदी ने 7 मार्च को अपना भारतीय पासपोर्ट सरेंडर करने के लिए आवेदन दिया था। वानुआतु तभी सुर्खियों में आ गया। कहा गया कि ललित ने वानुआतु की नागरिकता हासिल कर ली है, इसलिए वह अपनी भारतीय नागरिकता छोड़ना चाहते हैं।
पासपोर्ट रद्द होने के पीछे भारत सरकार?
रिपोर्टों में ललित मोदी का पासपोर्ट रद्द कराने में भारत सरकार का हाथ होने का दावा किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि न्यूजीलैंड में भारत की उच्चायुक्त नीता भूषण ने कुछ अन्य द्वीपीय देशों के साथ मिलकर ललित मोदी के वानूआतू का पासपोर्ट रद्द कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा, विदेश मंत्री एस जयशंकर भी इन दिनों लंदन दौरे पर थे। ऐसे में यह संभव है कि ललित मोदी का खेल बिगड़ गया हो। क्योंकि, भारत सरकर कतई यह नहीं चाहेगी कि ललित मोदी को किसी ऐसे देश में शरण मिले, जहां से उन्हें लाना मुश्किल हो। हालांकि, ललित मोदी का पासपोर्ट रद्द करने के पीछे वानुआतु के पीएम ने वजह भी बताई है। उन्होंने कहा कि ललित मोदी के कारनामों के बारे में उनके देश को पता नहीं था। यही नहीं ललित मोदी प्रत्यर्पण के मामला का सामना कर रहे हैं, यह बात भी उनके द्वारा सामने नहीं लाई गई जो कि इनके इरादों को दर्शाता है। आईपीएल में वित्तीय अनियमितता एवं धोखाधड़ी के आरोपी ललित मोदी 2010 से ही भारत से फरार हैं। फिलहाल, लंदन से निकलने का दांव उलटा पड़ गया है। हो सकता है कि वानुआतु में बात बिगड़ने के बाद वह किसी और टैक्स हैवन देश की ओर रुख करें। इसलिए जरूरी है कि भारतीय कानूनी एजेंसियां उनके प्रत्यर्पण की दिशा में अपने प्रयास तेज करें और उन्हें न्याय के कठघरे में लाएं।
