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क्या होती है टेरिटोरियल आर्मी? जिसकी भारत-पाक संघर्ष में हो सकती है एंट्री; जानिए इंडियन आर्मी से कितनी है अलग

Territorial Army vs Indian Army: केंद्र सरकार ने सेना प्रमुख को अधिकार दिया है कि वह नियमित सेना की मदद के लिये टेरिटोरियल आर्मी के अधिकारियों और जवानों को बुला सकते हैं। लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि आखिर टेरिटोरियल आर्मी और इंडियन आर्मी दोनों में क्या अंतर होता है? आपको इस रिपोर्ट में इन दोनों के बारे में हर अहम जानकारी दे देते हैं।

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टेरिटोरियल आर्मी और इंडियन आर्मी में अंतर।

India vs Pakistan: पाकिस्तान को यूं ही आतंकिस्तान के नाम से नहीं जाना जाता है। आतंक के पनाहगार मुल्क की जुर्रत तो देखिए, वो बार-बार हिंदुस्तान को आंख दिखा रहा है, नापाक हमले को अंजाम देने की कोशिशें कर रहा है। जिसका उसे मुंहतोड़ जवाब भी मिल रहा है, भारत-पाक संघर्ष हमारे देश की सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्र ने सेना प्रमुख को प्रादेशिक सेना का सहयोग लेने के लिये अधिकृत किया। तो क्या आप ये जानते हैं कि आखिर इंडियन आर्मी और टेरिटोरियल आर्मी में क्या अंतर है?

टेरिटोरियल आर्मी और इंडियन आर्मी में अंतर

टेरिटोरियल आर्मी और इंडियन आर्मी दोनों भारत की सशस्त्र सेनाओं का हिस्सा हैं, लेकिन इनमें कुछ महत्वपूर्ण अंतर हैं:

इंडियन आर्मीटेरिटोरियल आर्मी
इंडियन आर्मी भारत की स्थायी सेना है, जो देश की सुरक्षा और रक्षा के लिए जिम्मेदार है।टेरिटोरियल आर्मी एक अर्ध-सैनिक बल है, जो देश की सुरक्षा में सहायता करने के लिए बनाया गया है।
इसके जवान पूर्णकालिक सैनिक होते हैं जो देश की सुरक्षा के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।इसके जवान आमतौर पर नागरिक जीवन में रहते हैं और नियमित रूप से सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं।
रेगुलर सेना के जवानों को कठोर और प्रोफेशनल ट्रेनिंग दिया जाता है, वे हर प्रकार की युद्ध के लिए तैयार रहते हैं।टेरिटोरियल आर्मी के जवानों को विशिष्ट परिस्थितियों में ही बुलाया जाता है, जैसे कि युद्ध या आपदा के समय।
इंडियन आर्मी के जवानों को नियमित रूप से वेतन और अन्य लाभ मिलते हैं।टेरिटोरियल आर्मी के जवानों को भी वेतन और अन्य लाभ मिलते हैं, लेकिन यह इंडियन आर्मी के जवानों की तुलना में अलग हो सकता है।

इन दोनों बलों के बीच मुख्य अंतर यह है कि इंडियन आर्मी एक पूर्णकालिक सेना है, जबकि टेरिटोरियल आर्मी एक अर्ध-सैनिक बल है जो विशिष्ट परिस्थितियों में ही सक्रिय होता है। चलिए आपको तफसील से इन दोनों के बारे में बताते हैं।

टेरिटोरियल आर्मी (Territorial Army)

टेरिटोरियल आर्मी उन नागरिकों के लिए एक अनोखा अवसर है, जो अपने पेशेवर जीवन को जारी रखते हुए देश की रक्षा और सेवा में योगदान देना चाहते हैं। यह एक अंशकालिक (Part-Time) सैन्य बल है, जो सेवा भावना रखने वाले नागरिकों को सेना से जुड़ने का मंच प्रदान करता है। टेरिटोरियल आर्मी के जवान हर वर्ष कुछ सप्ताह या महीने के लिए ट्रेनिंग लेते हैं। इनकी ट्रेनिंग रेगुलर सेना की तुलना में कम गहन होती है, और इन्हें केवल विशेष परिस्थितियों में ही एक्टिव ड्यूटी पर बुलाया जाता है, जैसे कि:

  • आंतरिक सुरक्षा (Internal Security)
  • आपदा प्रबंधन (Disaster Management)
Territorial Army Pic

टेरिटोरियल आर्मी। (फाइल फोटो)

हालांकि, टेरिटोरियल आर्मी में प्रमोशन या प्रोफेशनल कैरियर ग्रोथ की संभावना सीमित होती है। यह व्यवस्था खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयुक्त है जो अपनी नौकरी या व्यवसाय को छोड़े बिना देश की सेवा करना चाहते हैं।

कौन चुने जाते हैं टेरिटोरियल आर्मी?

अगर आप देशभक्ति से प्रेरित हैं, अगर आप अपनी नौकरी के साथ सेना में भी योगदान देना चाहते हैं, और अगर आप सीमित अवधि के प्रशिक्षण और सेवा के लिए तैयार हैं, तो टेरिटोरियल आर्मी आपके लिए एक आदर्श विकल्प हो सकती है। वहीं, यदि आप सेना को ही अपना पूरा करियर बनाना चाहते हैं, युद्ध सेवा के लिए पूरी तरह समर्पित हैं, तो रेगुलर सेना आपके लिए बेहतर विकल्प होगी।

इंडियन आर्मी (Indian Army)

भारतीय सेना एक पूर्णकालिक (फुल-टाइम) और पेशेवर सैन्य बल है, जिसमें सैनिक और अधिकारी राष्ट्र की सेवा के लिए पूरी तरह से समर्पित होते हैं। इनकी नियुक्ति लंबी अवधि के लिए की जाती है- (आम तौर पर 10 वर्षों या उससे अधिक के लिए) और आवश्यकता पड़ने पर इस अवधि को बढ़ाया भी जा सकता है।

Indian Army

भारतीय सेना।

रेगुलर आर्मी के जवानों को कठोर और उच्च स्तरीय सैन्य प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है, जिससे वे हर प्रकार की युद्ध स्थिति, सुरक्षा चुनौती और आपातकालीन परिस्थितियों का सामना करने के लिए पूरी तरह से सक्षम रहते हैं। ये सैनिक सीमावर्ती क्षेत्रों से लेकर देश के भीतरी शांतिपूर्ण क्षेत्रों तक, कहीं भी तैनात किए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, आवश्यकता होने पर इन्हें अंतरराष्ट्रीय मिशनों के अंतर्गत विदेशों में भी भेजा जा सकता है।

इस शाखा में एक सुसंगठित कैरियर प्रणाली होती है, जिसमें प्रमोशन, विशेष प्रशिक्षण और विविध भूमिकाएं निभाने के अवसर उपलब्ध होते हैं। यह न केवल युवाओं को स्थिर और सम्मानजनक करियर प्रदान करता है, बल्कि राष्ट्र सेवा की भावना को भी जीवित रखता है।

टेरिटोरियल आर्मी को लेकर आया बड़ा अपडेट

केंद्र सरकार ने सेना प्रमुख को अधिकार दिया है कि वह नियमित सेना की मदद के लिये प्रादेशिक सेना (Territorial Army) के अधिकारियों और जवानों को बुला सकते हैं। यह कदम भारत और पाकिस्तान के बीच जारी सैन्य संघर्ष के बीच आया है। रक्षा मंत्रालय के सैन्य मामलों के विभाग ने छह मई को एक अधिसूचना जारी की जिसमें कहा गया है, 'यह आदेश 10 फरवरी 2025 से 09 फरवरी 2028 तक तीन वर्षों के लिए लागू रहेगा'।

India vs Pakistan

भारत-पाक संघर्ष (प्रतीकात्मक तस्वीर)

प्रादेशिक सेना की स्थापना नौ अक्टूबर 1949 को हुई थी और पिछले वर्ष इसकी स्थापना के 75 वर्ष पूरे हुए हैं। इस बल ने दशकों की अपनी यात्रा के दौरान युद्ध के समय तथा मानवीय और पर्यावरण संरक्षण कार्यों में राष्ट्र की सेवा की है। यह पूरी तरह से नियमित सेना के साथ एकीकृत है। राष्ट्र निर्माण के प्रयासों और युद्ध या संघर्ष के दौरान किए गए योगदान के सम्मान में, प्रादेशिक सेना में कई व्यक्तियों को वीरता के साथ-साथ विशिष्ट सेवा पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।

सरकार ने अपनी अधिसूचना में क्या कहा?

अधिसूचना में कहा गया, 'प्रादेशिक सेना नियम 1948 के नियम 33 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केन्द्र सरकार, सेना प्रमुख को उस नियम के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्रादेशिक सेना के प्रत्येक अधिकारी और प्रत्येक भर्ती व्यक्ति को आवश्यक सुरक्षा प्रदान करने या नियमित सेना को सहायता या अनुपूरण करने के उद्देश्य से शामिल करने के लिए बुलाने का अधिकार देती है।' सरकारी अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि, 'मौजूदा 32 इन्फैंट्री बटालियनों (प्रादेशिक सेना) में से 14 इन्फैंट्री बटालियनों (प्रादेशिक सेना) को दक्षिणी कमान, पूर्वी कमान, पश्चिमी कमान, मध्य कमान, उत्तरी कमान, दक्षिण पश्चिमी कमान, अंडमान और निकोबार कमान तथा सेना प्रशिक्षण कमान (एआरटीआरएसी) के क्षेत्रों में तैनाती के लिए शामिल किया गया है।'

इसमें कहा गया है कि इस कार्यान्वयन का आदेश तभी दिया जाएगा जब बजट में धनराशि उपलब्ध हो या बजट में आंतरिक बचत के पुनर्विनियोजन द्वारा उपलब्ध कराई गई हो। अधिसूचना में कहा गया है, 'रक्षा मंत्रालय के अलावा अन्य मंत्रालयों के आदेश पर कार्यान्वयन इकाइयों के लिए लागत संबंधित मंत्रालयों के खाते से ली जाएगी तथा उसे रक्षा मंत्रालय के बजट आवंटन में शामिल नहीं किया जाएगा।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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