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Mutual fund: म्यूचुअल फंड स्विचिंग क्या है? जानें ये 5 बातें, होगा फायदा

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 17, 2023, 06:35 PM IST

म्यूचुअल फंड निवेश का सबसे लोकप्रिय साधन है। इसके जरिये अधिकतम रिटर्न प्राप्त कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड स्विचिंग एक ऐसी प्रक्रिया है। जिसमें किसी खास स्कीम के म्यूचुअल फंड यूनिट को बेचना और उससे मिलने वाले पैसों का इस्तेमाल दूसरी स्कीम की यूनिट खरीदने के लिए करना होता है।

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म्यूचुअल फंड स्विचिंग

Photo : iStock

म्यूचुअल फंड निवेश का एक लोकप्रिय जरिया है तथा वैल्थ क्रिएशन के लिए बहुत ही शानदार साधन है। म्यूचुअल फंड निवेशक के तौर पर ऐसी अनेक स्ट्रेटीज हैं। जिन पर अपने रिटर्न को अधिकतम करने के लिए आप विचार कर सकते हैं। इस प्रकार की एक स्ट्रेटजी स्विचिंग है, जिसके मायने हैं कि किसी खास स्कीम के म्यूचुअल फंड यूनिट को बेचना तथा उससे मिलने वाले पैसों का इस्तेमाल दूसरी स्कीम की यूनिट खरीदने के लिए करना है। यह टू-स्टेप लेनदेन प्रक्रिया है जहां पर बेचने के बाद खरीददारी की जाती है। स्विचिंग, हालांकि निवेश को मैनेज करने के लिए एक सुविधाजनक तथा प्रभावी तरीका है, लेकिन इसे इस्तेमाल करने से पहले इसे समझा जरूर जाना चाहिए। यहां पर संक्षिप्त में स्विचिंग के कुछ महत्वपूर्ण पहलू दिए गये हैं, जिनकी जानकारी आपको अवश्य होनी चाहिए।

स्विचिंग के प्रकार

पहली प्रकार की स्विचिंग एक ही म्यूचुअल फंड हाउस की स्कीमों में स्विंचिंग करना है। इसमें स्कीम की यूनिट्स को बेचना, और उससे मिलने वाले पैसे को उसी फंड हाउस की किसी दूसरी स्कीम में ऑटोमैटिकली निवेश करना शामिल होता है। फंड हाउस द्वारा आपकी तरफ से नई स्कीम में यूनिट्स की खरीद के लिए फंड्स का इस्तेमाल किया जाता है। इस मामले में, यूनिट्स को बेचने पर मिलने वाली राशि को आपके अकाउंट में क्रेडिट नहीं किया जाता है। दूसरे प्रकार की स्विचिंग में दो अलग-अलग फंड हाउस शामिल होते हैं। यहां पर, एक फंड हाउस की स्कीम की यूनिट्स की बिक्री का जाती है, तथा उससे मिलने वाली राशि को आपके लिंक्ड बैंक अकाउंट में क्रेडिट कर दिया जाता है। तब आप अपने बैंक अकाउंट में उपलब्ध फंड्स को ट्रांसफर करके किसी दूसरे फंड हाउस की नई स्कीम में यूनिट्स खरीद सकते हैं।

स्विचिंग फीस तथा चार्ज

स्विचिंग में खरीदने और बेचने के लेनदेन शामिल होते हैं, जिसमें कुछ खास चार्ज वसूले जाते हैं। होल्डिंग की तय अवधि को पूरा किए बिना बेचे जाने वाले यूनिट्स पर एग्जिट लोड, जो आमतौर पर फंड वैल्यू का 1% होता है, वसूला जाता है। इस चार्ज की कटौती के बाद, बैलेंस को या तो आपकी पसंद की स्कीम में रिइनवेस्ट किया जाता है (इंटर-स्विचिंग लेनदेनों के लिए) या आपके बैंक अकाउंट में क्रेडिट किया जाता है (इंट्रा-स्विंचिंग लेनदेनों के लिए)। नई स्कीम में रि-इनवेस्ट करते समय, स्टाम्प ड्यूटी, सेस (उपकर) तथा फंड मैनेजमेंट फीस का भुगतान निवेशक को करना पड़ सकता है। इन चार्जेस को कम करने के बाद, शेष बैलेंस का नई स्कीम में निवेश कर दिया जाता है।

आंशिक और पूर्ण स्विच

म्यूचुअल फंड स्कीमों में स्विचिंग के लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं। आप सारे यूनिट्स एक ही बारी में बेच सकते हैं, उनको ट्रांचेस (हिस्सों) में बेच सकते हैं, या एक पोर्शन को बेच कर सोर्स स्कीम में शेष यूनिट्स को अपने पास बनाए रख सकते हैं। स्विचिंग करते समय, अपने सभी मौजूदा यूनिट्स को बेचना ज़रूरी नहीं है। आप यह तय कर सकते हैं कि अपनी ज़रूरत के मुताबिक और पोर्टफोलियो रिस्ट्रक्चरिंग लक्ष्यों के आधार पर आप कितने यूनिट बेचना चाहते हैं।

लॉक-इन अवधि

कुछ म्यूचुअल फंड स्कीमों के साथ लॉक-इन अवधि जुड़ी रहती है, जिससे स्विचिंग प्रभावित हो सकती है। उदाहरण के लिए कर-बचत फंड के साथ 3 वर्ष की लॉक-इन अवधि होती है। इसके मायने हैं कि इस प्रकार की स्कीम के यूनिट्स को 3 वर्ष की होल्डिंग अवधि के पूरा हो जाने से पहले बेचा और/या स्विच नहीं किया जा सकता है।

टैक्स इंम्प्लिकेशन

स्विचिंग में निवेश को रिडीम किया जाता है। इस प्रकार, ऐसे निवेश में अर्जित किए गए लाभ पर लागू टैक्स का भुगतान किया जाना चाहिए। म्यूचुअल फंड यूनिट पर अल्प या दीर्घकालिक पूंजी लाभ टैक्स लगते हैं जो उनकी होल्डिंग अवधि पर निर्भर करते हैं। यदि बेचने से पहले यूनिट्स को एक वर्ष से अधिक अवधि के लिए होल्ड किया जाता है, तो 10% दीर्घकालिक पूंजी लाभ (एलटीसीजी) टैक्स लगाया जाता है। लेकिन, यदि यूनिट्स को खरीदने के एक वर्ष के अंदर बेच दिया जाता है, तो 15% अल्पकालिक पूंजी लाभ (एसटीसीजी) टैक्स लागू होगा।

डेट फंड से स्विच करते समय, इन्डेक्सेशन के बाद, 20% पूंजी लाभ टैक्स लागू होता है। तीन वर्ष से कम की अवधि के लिए, निवेशक को अपने आयकर स्लैब रेट के अनुसार लागू पूंजी लाभ टैक्स का भुगतान करना होगा।

स्विचिंग स्ट्रेटजी से आपको अपनी फाइनेंशियल ज़रूरतों तथा मार्केट साइकल के अनुसार अपने पोर्टफोलियो को रिस्ट्रक्चर करने में सहायता मिलती है। उदाहरण के लिए, जब आप रिटायर होते हैं तो आप अपने उच्च- जोखिम इक्विटी निवेश को कम जोखिम वाले डेट में निवेश कर सकते हैं। अपने फंड्स को स्विच करने से पहले, ऐसा करने से आप किन उद्देश्यों को प्राप्त करना चाहते हैं, उनको तय कर लें, तथा इसमें शामिल बातों को समझें, ताकि आप सोच समझ कर फैसला कर सकें।

(इस लेख के लेखक, BankBazaar.com के CEO आदिल शेट्टी हैं)

(डिस्क्लेमर: ये लेख सिर्फ जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसको निवेश से जुड़ी, वित्तीय या दूसरी सलाह न माना जाए)

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