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क्या है El Nino, मॉनसून पर कैसे पड़ता है इसका असर, 10 प्वाइंट में समझिए

  • Authored by: अमित कुमार मंडल
  • Updated Apr 11, 2023, 01:53 PM IST

आइए समझते हैं कि क्या है एल-नीनो का इतिहास, ये ला-नीना से कितना अलग है और कैसे ये मौसम पर असर डालता है। मौसम को लेकर क्या कहता है आईएडी और स्काईमेट वेदर।

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एल नीनो (El Nino) के प्रभाव के कारण सूखे की संभावना

Photo : BCCL

What is El-Nino: निजी पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट वेदर (Skymet Weather) ने सोमवार को कहा कि भारत में इस साल मानसून (Monsoon in India) कमजोर रहेगा और सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। एजेसी ने अनुमान जताया कि ला नीना की स्थिति समाप्त होने और एल नीनो (El Nino) के प्रभाव के कारण सूखे की संभावना 20 प्रतिशत है। मानसून के मौसम के दौरान लगातार चार वर्षों तक सामान्य और सामान्य से अधिक बारिश के बाद नया पूर्वानुमान भारत के कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी चिंता का कारण है।

मौसम विज्ञान विभाग ने कहा, सामान्य रहेगा मॉनसून

वहीं भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कहा है कि इस बार मॉनसून रहेगा। आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने कहा कि अल नीनो की स्थिति मानसून के मौसम के दौरान विकसित होने की संभावना है। इसका प्रभाव मौसम की दूसरी छमाही के दौरान देखा जा सकता है।

हालांकि, स्काईमेट का अनुमान है कि जून से सितंबर की चार महीने की अवधि के दौरान मानसून की बारिश 868.6 मिमी के दीर्घकालिक औसत (LPA) का लगभग 94 प्रतिशत होगी। निजी मौसम एजेंसी ने यह भी भविष्यवाणी की कि देश के उत्तरी और मध्य हिस्सों में कम बारिश होने की संभावना है। इसके मुताबिक गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में जुलाई और अगस्त के मुख्य मानसून महीनों के दौरान अपर्याप्त बारिश होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर इस साल एल-नीनो के प्रभाव के कारण भारत में कृषि क्षेत्र, किसानों और देश की अर्थव्यवस्था को झटका लग सकता है। आइए समझते हैं कि क्या है अल-नीनो का इतिहास, ये ला-नीना से कितना अलग है और कैसे ये मौसम पर असर डालता है।

  • एल नीनो शब्द का मूल अर्थ 'बच्चा' है। इसका कारण ये है कि यह धारा क्रिसमस के आसपास प्रवाहित होने लगती है और इसलिए यह नाम बेबी क्राइस्ट के संदर्भ में दिया गया है।
  • एल नीनो के समान एक और प्राकृतिक घटना है ला नीना। ला नीना शब्द का शाब्दिक अर्थ है 'छोटी लड़की'। इसे अल नीनो की घटना के विपरीत कहा जाता है क्योंकि इसके सारण प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में समुद्र का पानी का ठंडा हो जाता है। इन दोनों के कारण समुद्री बदलावों के साथ-साथ वायुमंडलीय हालात में भी बदलाव होता है।
  • एल नीनो को एक प्राकृतिक घटना के रूप में समझा जा सकता है जिसमें समुद्र का तापमान विशेष रूप से प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में बढ़ जाता है। एल नीनो प्रशांत महासागर के भूमध्यीय क्षेत्र की उस समुद्री घटना का नाम है, जो दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट पर स्थित इक्वाडोर और पेरु देशों के तटीय समुद्री जल में कुछ सालों के अंतराल पर घटित होती है। यह समुद्र में होने वाली उथल-पुथल है और इससे समुद्र के सतही जल का ताप सामान्य से ज्यादा हो जाता है।
  • भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर क्षेत्र के सतह पर निम्न हवा का दबाव होने पर ये स्थिति पैदा होती है। इसकी उत्पत्ति के अलग-अलग कारण माने जाते हैं लेकिन सबसे जाना-माना कारण यह है कि ये तब पैदा होता है, जब पूर्व से बहने वाली हवा काफी तेज गति से बहती है। इससे समुद्री सतह का तापमान काफी कम हो जाता है। इसका सीधा असर दुनियाभर के तापमान पर होता है और तापमान औसत से अधिक ठंडा हो जाता है।
  • एल नीनो और ला नीना प्रशांत महासागर की समुद्री सतह के तापमान में समय-समय पर होने वाले बदलाव है, जिसका असर मौसम पर देखा जाता है। अल नीनो की वजह से तापमान गर्म होता है और ला नीना के कारण ठंड ज्यादा पड़ने लगती है। अल नीनो के चलते गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ जाता है और सूखे जैसे हालात पैदा हो जाते हैं।
  • एल नीनो आमतौर पर 9-12 महीने तक रहता है जबकि ला नीनो आमतौर पर 1-3 साल तक रहता है।
  • एल नीनो तब होता है जब पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में भूमध्य रेखा के साथ गर्म पानी का निर्माण होता है। गर्म समुद्र की सतह वातावरण को गर्म करती है, जो नमी से भरपूर हवा को उठने और बारिश का तूफान बनने की अनुमति देती है।
  • एल नीनो आमतौर पर पूरे भारत में खराब दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश से जुड़ा होता है, जैसा कि 2009, 2014, 2015 और 2018 के पिछले अल नीनो वर्षों में देखा गया था। अल नीनो के कारण खराब मानसून का असर भारत के खरीफ फसल उत्पादन और कृषि क्षेत्र पर भी पड़ेगा।
  • एल नीनो के कारण गंभीर सूखा और संबंधित खाद्य असुरक्षा, बाढ़, बारिश और तापमान में वृद्धि के साथ स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ती हैं जिसमें कुपोषण, गर्मी से बीमारियां और श्वसन रोग शामिल हैं।
  • भारत, ऑस्ट्रेलिया में यह सूखे की स्थिति ला सकता है। इससे फसल की उत्पादकता काफी हद तक प्रभावित होती है। कई बार यह भी देखा गया है कि एल नीनो सूखा नहीं लाता है लेकिन भारी बारिश का कारण जरूर बन सकता है। दोनों ही मामलों में इससे भारी नुकसान होता है।
अमित कुमार मंडल
अमित कुमार मंडल author

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर... और देखें

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