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झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए क्या है BJP की प्लानिंग? समझें सूबे का सियासी गुणा गणित

Jharkhand Chunav: झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए सभी सियासी पार्टियों ने अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं। हालांकि फिलहाल ये कहना बेहद मुश्किल होगा कि इस बार किसकी ताकत में ज्यादा इजाफा हुआ है। भाजपा रणनीतियों पर काम कर रही है। आपको इस रिपोर्ट में BJP की चुनावी प्लानिंग समझाते हैं।

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झारखंड में क्या होगी बीजेपी की रणनीति?

Photo : Times Now Digital

BJP Plan for Jharkhand Election: गिरफ्तार होने से पहले हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया, झारखंड में चंपई सोरेन को उन्होंने अपना उत्तराधिकारी बनाया। पति की गिरफ्तारी के बाद पत्नी कल्पना सोरेन सियासत में एक्टिव हो गईं। सड़कों पर संग्राम हुआ, विपक्षी गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इंक्लूजिव अलायंस में शामिल पार्टियों ने एकजुटता दिखाई और एकसाथ मिलकर लोकसभा चुनाव 2024 में अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की, हालांकि चुनावी नतीजे आए तो उम्मीदों पर काफी हद तक पानी फिर गया। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) झारखंड की सत्ता में वापसी कोशिश में जुट गई है।

क्या होगी भाजपा की चुनावी रणनीति?

पिछले लोकसभा चुनाव 2019 की तुलना में इस बार भाजपा को झारखंड में भी झटका जरूर लगा, हालांकि उसने अभी से अपनी रणनीतियों पर जोर देना शुरू कर दिया है। आम चुनावों के बीतते ही महाराष्ट्र, झारखंड, हरियाणा और जम्मू कश्मीर में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए तमाम सियासी पार्टियां और नेताओं ने अपनी ताकत झोंकने का सिलसिला तेज कर दिया है। इसी कड़ी में भाजपा के झारखंड चुनाव प्रभारी और सह-प्रभारी ने दिल्ली से रांची पहुंचकर जोड़-तोड़ शुरू कर दिया है। आपको इस लेख के जरिए समझाते हैं कि आगामी झारखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा किन मुद्दों के साथ मैदान को मजबूत करने की कोशिश कर सकती है।

रांची पहुंची शिवराज और हिमंत की जोड़ी

इस साल के अंत में होने वाले झारखंड विधानसभा चुनाव की खातिर सियासी प्लान बनाने के लिए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा रांची पहुंचे हैं। दोनों नेता चुनावी रणनीति बनाने के वास्ते राज्य के दौरे पर हैं। भाजपा ने झारखंड के लिए चौहान को चुनाव प्रभारी और हिमंत को सह-प्रभारी बनाया है। रांची दौरे के दौरान ये दोनों नेता राज्य में पार्टी के लोकसभा चुनाव में प्रदर्शन की भी समीक्षा करेंगे।

लोकसभा चुनाव में कैसा रहा प्रदर्शन?

गठबंधनपार्टीसीट
NDAबीजेपी8
NDAआजसू1
INDIAकांग्रेस2
INDIAजेएमएम3
INDIAसीपीआई (एमएल)0
INDIAराजद0
कुल14
आकंड़ों को देखकर ये समझा जा सकता है कि भाजपा ने इस बार भी सूबे की सबसे अधिक सीटों पर जीत हासिल की है। 2019 की चुनाव की तुलना में भाजपा को इस बार भारी नुकसान झेलना पड़ा है। पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 11 सीटों पर जीत का डंका बजाया था, जबकि इस बार ये नंबर घटकर 8 ही रह गया। भाजपा के वोट फीसटी में भी काफी गिरावट देखी गई। इस बार के चुनावी नतीजों में पार्टी का वोट फीसदी 51 फीसदी से घटकर 44 पर रह गया। वोट फीसदी में 7 फीसदी का नुकसान झेलना पड़ा है।

कैसा रहा विपक्षी दलों का प्रदर्शन?

कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव 2024 में 7 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे, जेएमएम ने 5 सीट पर, जबकि राजद और सीपीआई (एमएल) ने एक-एक सीट पर चुनाव लड़ा था। कांग्रेस ने सात में से 2 सीटों पर जीत हासिल की, पिछली बार के चुनाव में उसे एक सीट नसीब हुई थी। जबकि जेएमएम एक सीट से बढ़कर तीन पर पहुंच गई।

विधानसभा चुनाव 2019 के नतीजे

झारखंड विधानसभा में कुल 81 सीटें हैं, बहुमत के लिए किसी भी पार्टी को बहुमत के लिए 41 सीटें जरूरी होती हैं। आपको आंकड़ों से समझाते हैं कि पिछले दो चुनावों के नतीजों में किस पार्टी का सूबे में अधिक दबदबा रहा।

झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM)

वर्षसीटें
विधानसभा चुनाव 201419
विधानसभा चुनाव 201930
सीट परिवर्तन11 सीटें बढ़ी

भारतीय जनता पार्टी (BJP)

वर्षसीटें
विधानसभा चुनाव 201437
विधानसभा चुनाव 201925
सीट परिवर्तन12 सीटें घटी

कांग्रेस

वर्षसीटें
विधानसभा चुनाव 20146
विधानसभा चुनाव 201916
सीट परिवर्तन10 सीटें बढ़ी

झारखंड विकास मोर्चा (प्रजातांत्रिक)

वर्षसीटें
विधानसभा चुनाव 20148
विधानसभा चुनाव 20193
सीट परिवर्तन5 सीटें घटी

आजसू

वर्षसीटें
विधानसभा चुनाव 20145
विधानसभा चुनाव 20192
सीट परिवर्तन3 सीटें घटी

झारखंड की सियासत इस बार किस ओर करवट लेती है, ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। क्या भाजपा की वापसी होगी या फिर हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी की सहानुभूति जेएमएम और विपक्षी गठबंधन में शामिल पार्टियों को मिलेगी। भाजपा ने अपनी कमर कस ली है, शिवराज सिंह चौहान और हिमंत बिस्वा सरमा के कंधों पर झारखंड जिताने का जिम्मा सौंपा गया है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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