Chunav Me Harne Ke Baad Agar Koi Cm Resign Na Kare To Kya Hoga?: पश्चिम बंगाल में भाजपा ने पहली बार प्रचंड जीत हासिल की है और वह अब सरकार बनाने के लिए तैयार है। पश्चिम बंगाल भाजपा प्रमुख ने वहां शपथ ग्रहण समारोह की तारीख तक बता दी है, उन्होंने कहा है कि बंगाल में भाजपा की सरकार नौ मई को शपथ ग्रहण करेगी, वहीं दूसरी ओर टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी 15 साल बाद मिली करारी हार को पचा नहीं पा रही हैं। उन्होंने आज प्रेस कांफ्रेस कर भाजपा और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दोनों पर टीएमसी को हराने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि मैं हारी नहीं हूं, मैं इस्तीफा नहीं दूंगी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि अगर चुनाव हारने के बाद किसी राज्य का सीएम पद छोड़ने को तैयार न हो तो क्या होगा? क्या इससे कोई संवैधानिक संकट खड़ा हो सकता है और भारत के संविधान में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए क्या व्यवस्था की गई है? आइए जानते हैं ऐसे ही सवालों के जवाब...
चुनाव में हार के बाद सीएम के पद से हटने के क्या हैं नियम?
किसी विधानसभा चुनाव में अगर सत्तारूढ़ पार्टी या गठबंधन चुनाव हार जाता है तो नैतिकता और परंपरा के हिसाब से मुख्यमंत्री को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। दुनिया भर की संसदीय परंपरा में चाहें वो आम चुनाव हो या राज्यों के चुनाव हार के बाद नैतिक आधार पर पद छोड़ देना चाहिए। नियमों के हिसाब से हारा हुआ मुख्यमंत्री राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपते हैं। जिसके बाद राज्यपाल नई सरकार के बनने तक निवर्तमान सीएम से पद पर रहने के लिए कहते हैं, ऐसे में इस्तीफा देने वाला सीएम नई सरकार के गठन तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर काम करता है। हालांकि कार्यवाहक के रूप में उसके अधिकार सीमित हो जाते हैं, वे कोई बड़े नीतिगत फैसले, किसी नई नियुक्तियों से जुड़े निर्णय नहीं ले सकते।अगर हारा हुआ सीएम इस्तीफा देने से कर दे इनकार तो क्या होगा?
वहीं, अगर कोई सीएम चुनाव में हार के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दे तो फिर राज्यपाल को आगे आकर कमान लेनी होती है। भारतीय संविधान के प्रावधानों के हिसाब से सीएम का पद राज्यपाल की मर्जी तक बना रह सकता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 में साफ किया गया है कि राज्यपाल ही सीएम की नियुक्ति करते हैं। यदि मुख्यमंत्री बहुमत हारने या चुनाव हारने के बाद भी इस्तीफा नहीं देते हैं, तो संविधान राज्यपाल को असीमित शक्तियां प्रदान करता है।राज्यपाल ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री को बर्खास्त कर सकते हैं। खुले शब्दों में कहें तो राज्यपाल के पास मुख्यमंत्री को पद से हटाने का अधिकार है। वे एक आधिकारिक आदेश के जरिए मुख्यमंत्री को तत्काल पद से बर्खास्त कर सकते हैं।
क्या कहता है संविधान का अनुच्छेद 164(4)
संविधान के अनुच्छेद 164(4) के मुताबिक, यदि कोई मुख्यमंत्री चुनाव हार जाता है,तो वह गैर-विधायक के रूप में भी मुख्यमंत्री बना रह सकता है,लेकिन केवल 6 महीने तक। इस अवधि के भीतर उसे किसी न किसी सदन (विधानसभा या विधान परिषद)का सदस्य बनना अनिवार्य होता है, अन्यथा उसे पद छोड़ना होगा। हालांकि उसके पास बहुमत होना चाहिए।मुख्यमंत्री तब तक ही पद पर बना रह सकता है, जब तक उसे विधानसभा में बहुमत का समर्थन प्राप्त हो।
क्या है विशेषज्ञों की राय
ममता की राजनीतिक जिद को समझने के लिए हमने 14 वीं और 15 वीं लोकसभा के महासचिव रहे पी डी टी आचार्य से बात की। उन्होंने कहा कि विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री को पद पर बने रहने का कोई प्रावधान नहीं है। पीडीटी आचार्य ने स्पष्ट किया है कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत सरकार का कार्यकाल पूरा होने के बाद मुख्यमंत्री पद पर बने रहने की अनुमति नहीं है।आचार्य के अनुसार, सीएम द्वारा भले ही औपचारिक इस्तीफा न दिया जाए,कार्यकाल समाप्त होते ही पद स्वतः समाप्त माना जाएगा। ऐसे में सबसे राज्यपाल की सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक भूमिका होती है।आमतौर पर ऐसी स्थिति में राज्यपाल मौजूदा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से अनुरोध करते कि कि नई सरकार के शपथ लेने तक वह कार्यवाहक के रूप में बने रहें।
ममता द्वारा चुनाव परिणाम को चुनौती देने के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया यह केवल इलेक्शन पेटिशन के जरिए ही संभव है। ऐसी याचिकाओं पर सुनवाई बाद में होती है और इसका सरकार के गठन या मुख्यमंत्री पद पर बने रहने से कोई सीधा संबंध नहीं होता।आचार्य के मुताबिक,यदि SIR या अन्य मुद्दों पर मामला सुप्रीम कोर्ट में भी उठाया जाता है, तब भी वह एक अलग कानूनी प्रक्रिया होगी और उससे मुख्यमंत्री के पद पर बने रहने का अधिकार नहीं मिलता है।
नई सरकार बनते ही खुद ब खुद पद पर नहीं रह जाएंगी
ऐसी स्थितियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जाने माने वकील अश्विनी दुबे कहते हैं कि किसी भी विधानसभा का कार्यकाल 5 साल का होता है और उसके बाद नए मंत्रिमंडल का गठन होता है। अब जो परिस्थितियों पैदा हो रही है कि नतीजे के बाद ममता बनर्जी इस्तीफा देने से इनकार कर रही हैं। परम्परा के मुताबिक वो इस्तीफा नहीं देती हैं तो ऐसा नहीं कि वो सरकार में बनी रहेंगी। राज्यपाल बहुमत दल के नेता को सरकार बनाने के लिए प्रस्ताव देंगे। और नई सरकार के शपथ लेते ही ममता बनर्जी अपने पद पर नहीं रह जाएंगी।
बंगाल में कैसे रहे परिणाम
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा को ऐतिहासिक परिणाम मिले हैं। चार मई को आए परिणामों में भाजपा ने बंगाल में 50 सालों के वाम दलों और तृणमूल कांग्रेस के शासन को समाप्त करते हुए 294 में से 207 सीटें हासिल कीं। टीएसी को मात्र 80 सीटें मिली हैं।
