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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किस वैकल्पिक समुद्री मार्ग पर बातचीत कर रहे ईरान-ओमान, क्या मलक्का मॉडल करेंगे लागू?

ओमान और ईरान में यह बातचीत ऐसे समय चल रही है जब तेहरान के हमलों के बाद अपनी सुरक्षा को देखते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाज निकलना बंद हो चुके हैं। इस समय अमेरिका और ईरान में सीधे तौर पर बातचीत फिलहाल रुकी हुई है।

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Photo : AP
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नया वैकल्पिक समुद्री मार्ग पर काम कर रहे ईरान-ओमान।
Written by: Alok Rao
Updated Aug 5, 2026, 12:44 IST
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New Strait of Hormuz route : स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल के टैंकर एवं मालवाहक जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए ईरान और ओमान बातचीत कर रहे हैं। रिपोर्टों की मानें तो इस नए वैकल्पिक मार्ग पर दोनों देश सहमति बनने के काफी करीब पहुंच गए हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में यह 'वैकल्पिक मार्ग' क्या होगा और इसका प्रबंधन तंत्र कैसा होगा इस पर बातचीत चल रही है। ओमान और ईरान में यह बातचीत ऐसे समय चल रही है जब तेहरान के हमलों के बाद अपनी सुरक्षा को देखते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाज निकलना बंद हो चुके हैं। इस समय अमेरिका और ईरान में सीधे तौर पर बातचीत फिलहाल रुकी हुई है। ईरान के अधिकारी हाल के दिनों में अमेरिका के साथ वार्ता जारी होने का खंडन करते आए हैं। ईरान का कहना है कि अभी वह 'वैकल्पिक मार्ग' को लेकर केवल ओमान के साथ बातचीत कर रहा है।

वैकल्पिक मार्ग पर ओमान-ईरान के बीच बातचीत

हालांकि, वाशिंगटन ने संकेत दिया है कि यह बातचीत फिर शुरू हो सकती है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने सोमवार को कहा कि एक वैकल्पिक सामुद्रिक मार्ग तैयार करने के लिए ईरान और ओमान काम कर रहे हैं। बाघेई ने कहा, 'एक वैकल्पिक समुद्री मार्ग जल्द से जल्द तैयार करने के लिए ओमान के साथ चर्चा जारी है। जाहिर तौर पर यह वैकल्पिक मार्ग अस्थायी है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में इसे नौवहन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है।' ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी संकेत दिया है कि 'ओमान के साथ बातचीत पूरी होने के करीब है। उन्होंने कहा कि हम ओमान के साथ जारी बातचीत को अंतिम रूप देने के करीब हैं। हमारा जोर ऐसा वैकल्पिक मार्ग तैयार करने पर है जो दोनों देशों की संप्रभुता का सम्मान करे।'

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में शिपिंग कॉस्ट बढ़ी

यहां यह जानना जरूरी है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, पर्शियन गल्फ (फारस की खाड़ी) को गल्फ ऑफ ओमान एवं अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया के प्रमुख एवं अत्यंत व्यस्त समुद्री चेकप्वाइंट्स में से एक है। इस समुद्री मार्ग से दुनिया का 20 प्रतिशत ईंधन गुजरता है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज करीब-करीब बंद रहा है। इस समुद्री मार्ग के बंद होने से दुनिया भर में ईंधन की आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा है। अमेरिका सहति कई देशों में महंगाई बढ़ी है। इसके बंद होने से विश्व की आपूर्ति श्रृंखला और अर्थव्यवस्थाओं को झटके लगे हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज असुरक्षित होने से जहाजों की शिपिंग कॉस्ट और बीमा बढ़ गई है। होर्मुज के रूप में ईरान को एक बड़ा 'हथियार' मिल गया है। उसे पता चल गया है कि वह जब चाहे इस मार्ग को बंद कर सकता है। यह समुद्री रास्ता वह काम कर सकता है जो परमाणु हथियार नहीं कर सकता। इसलिए वह हर कीमत पर इस मार्ग पर अपना नियंत्रण चाहता है।

strait of hormuz

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डील के लिए ईरान के पास 'आखिरी मौका'-ट्रंप

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ सोमवार को बातचीत शुरू हुई। साथ ही ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि किसी डील पर पहुंचने के लिए ईरान के पास यह 'आखिरी मौका' है और ईरान यह मौका चूक गया तो उस पर बहुत ही भीषण हमले होंगे। हालांकि, ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति के इन दावों को खारिज कर दिया। ईरान का रुख साफ करते हुए बाघेई ने कहा कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हो रही है और दोनों देशों के बीच कोई बैठक भी प्रस्तावित नहीं है। प्रवक्ता ने कहा कि बातचीत के लिए किसी शिष्टमंडल की मेजबानी करने अथवा कोई प्रतिनिधिमंडल बाहर भेजने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि आराघची जो कि धार्मिक यात्रा पर इराक में हैं, उनके अलावा कोई भी वार्ताकार देश से बाहर नहीं है। बाघेई ने साफ तौर पर कहा कि अभी फिलहाल केवल एक देश ओमान के साथ बातचीत हो रही है, वह भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रबंधन तंत्र को लेकर।

जहाजों के आपस में टकराने का जोखिम कम करता है TSS

अभी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाज अंतरराष्ट्रीय रूप से मान्यता प्राप्त ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम (TSS) का अनुसरण करते हैं। टीएसएस जहाजों के आपस में टकराने के जोखिम कम करते हुए उनके आने-जाने के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराता है। यह मौजूदा व्यवस्था दो शिपिंग लेन वाली है। प्रत्येक शिपिंग लेन की चौड़ाई दो मील है। यही नहीं इन दोनों शिपिंग लेन के बीच दो मील चौड़ा एक बफर जोन भी है। पर्शियन गल्फ में आने वाले जहाज एक लेन और इससे निकलने वाले जहाज दूसरे लेन का इस्तेमाल करते हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के उत्तरी हिस्से से ईरान की सीमा लगती है जबकि ओमान इस स्ट्रेट के दक्षिणी भाग को नियंत्रित करता है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री जलमार्ग इन दोनों देशों के नियंत्रण वाले समुद्री क्षेत्र से दूर बीच से गुजरता है। अपने सबसे संकीर्ण क्षेत्र में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज करीब 21 नॉटिकल मील लंबा है। चूंकि ईरान और ओमान दोनों होर्मुज में 12 नॉटिकल मील की क्षेत्रीय समुद्री सीमा का दावा करते हैं, ऐसे में इस रास्ते प्रभावी रूप में किसी भी अंतरराष्ट्रीय समुद्री कॉरिडोर के लिए जगह नहीं बचती।

ईरान और ओमान आखिर क्या प्रस्ताव दे रहे हैं?

ओमान ने मलक्का जलडमरूमध्य के मॉडल से प्रेरित होकर होर्मुज जलडमरूमध्य के संयुक्त प्रबंधन का प्रस्ताव रखा है। मलक्का में इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर मिलकर समुद्री सुरक्षा, नौवहन (नेविगेशन) और समन्वय का प्रबंधन करते हैं, जबकि प्रत्येक देश अपने-अपने क्षेत्रीय जल पर संप्रभु अधिकार बनाए रखता है। ओमान के प्रस्ताव के तहत ईरान और ओमान मिलकर हॉर्मुज से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही का समन्वय करेंगे, ताकि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर निर्भरता कम हो सके। प्रस्ताव का एक अहम हिस्सा यह है कि शिपिंग मार्ग को ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जल के बीच बराबर (50-50) बांट दिया जाए। इसके तहत फारस की खाड़ी में प्रवेश करने वाले जहाज एक लेन का उपयोग करने और इससे बाहर निकलने वाले दूसरी लेन का इस्तेमाल करने की बात कही गई है। ओमान का प्रस्ताव नौवहन सुरक्षा बढ़ाने के लिए शिपिंग कंपनियों के स्वैच्छिक योगदान से वित्तपोषित व्यवस्था की भी जिक्र करता है, जैसा मलक्का जलडमरूमध्य में किया जाता है।

ईरान का अलग प्रस्ताव

रिपोर्टों की मानें तो ईरान ने ओमान के 50-50 विभाजन वाले प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी के अनुसार, तेहरान ने ऐसा ढांचा सुझाया है जिसमें ईरान अपनी ओर से गुजरने वाले जहाजों की निगरानी करेगा जबकि ओमान केवल दूसरी लेन के एक हिस्से की निगरानी करेगा। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो ईरान को खाड़ी में आने और बाहर जाने वाले दोनों प्रकार के जहाजों पर निगरानी का अधिकार मिल जाएगा, जबकि ओमान की भूमिका सीमित रहेगी। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि कोई भी नई व्यवस्था देश की संप्रभुता, सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने वाली होनी चाहिए। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि दोनों देश ऐसे 'स्वीकार्य' मार्ग पर काम कर रहे हैं जो मौजूदा उत्तरी और दक्षिणी शिपिंग कॉरिडोर से अलग होगा।

Donald Trump

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US क्या चाहता है?

मार्ग निर्धारण के अलावा, ईरान ने कुछ अतिरिक्त उपाय भी सुझाए हैं, इनमें फारस की खाड़ी में प्रवेश और निकास करने वाले जहाजों के लिए पूर्व सूचना या लाइसेंसिंग प्रक्रिया शामिल है। जहाजों से मनमाने ट्रांजिट टैक्स नहीं लिया जाएगा, बल्कि केवल पायलटेज, नौवहन सहायता और समुद्री सुरक्षा सेवाओं के बदले शुल्क लिया जाएगा। इन सेवाओं का संचालन ईरान और ओमान संयुक्त रूप से करेंगे। अमेरिका और कई अन्य देशों ने हमेशा समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता पर जोर दिया है। उनका मानना है कि ऐसी कोई व्यवस्था नहीं होनी चाहिए जिससे ईरान अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी पर एकतरफा शर्तें लागू कर सके। इसी दौरान, अमेरिकी नौसेना के नेतृत्व वाले ज्वाइंट मैरिटाइम इन्फार्मेशन सेंटर (JMIC) ने वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए ओमान के क्षेत्रीय जल के करीब एक विस्तारित ट्रांजिट मार्ग भी स्थापित किया है।

क्या है मलक्का जलडमरूमध्य मॉडल?

मलक्का जलडमरूमध्य में इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर मिलकर समुद्री सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और नौवहन का समन्वय करते हैं लेकिन प्रत्येक देश अपने क्षेत्रीय जल पर पूर्ण संप्रभु अधिकार बनाए रखता है। वहां कोई एक साझा सर्वोच्च प्राधिकरण नहीं है। ओमान का मानना है कि यही मॉडल हॉर्मुज जलडमरूमध्य में भी अपनाया जा सकता है, ताकि दोनों तटीय देश मिलकर व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करें और अपनी-अपनी संप्रभुता भी बरकरार रखें।

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