Times Now Navbharat Explainer: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की सियासत को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार के बाद राज्य के अलग-अलग हिस्सों से लगातार चुनाव बाद हिंसा (Bengal election 2026 post poll violence) और जनता के भारी आक्रोश की खबरें सामने आ रही हैं। लेकिन इस बार का जन-आक्रोश थोड़ा अलग और अनोखा रूप ले चुका है।
सत्ता से बाहर होते ही टीएमसी के बड़े और कद्दावर नेताओं के खिलाफ स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस गुस्से को जाहिर करने का सबसे बड़ा और प्रतीकात्मक जरिया अब 'अंडा' बन गया है। कुछ ही हफ्तों के भीतर अभिषेक बनर्जी, सौगत रॉय और मदन मित्रा जैसे दिग्गज नेताओं पर अंडे फेंककर विरोध (TMC Leaders Egg Attack News) जताया जा चुका है।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: 'सिर्फ कागजों पर एकजुटता, न कोई विजन और न ही मिशन', विपक्ष की बैठक से पहले भाजपा का INDIA गठबंधन पर हमला
ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर हुआ था बड़ा हमला
इसकी सबसे बड़ी और चौंकाने वाली घटना 30 मई 2026 को साउथ 24 परगना के सोनारपुर में देखने को मिली। टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के भतीजे अभिषेक बनर्जी चुनाव बाद हुई हिंसा से प्रभावित अपनी पार्टी के एक कार्यकर्ता के परिवार से मिलने पहुंचे थे। जैसे ही वह इलाके में दाखिल हुए स्थानीय लोगों की भारी भीड़ ने उन्हें घेर लिया। इस भीड़ में मौजूद लोग अभिषेक बनर्जी के खिलाफ "चोर-चोर" के नारे लगाते हुए उन पर अंडे, पत्थर और जूते फेंकने शुरू कर दिए।
हालात इतने खराब हुए कि गुस्से में आई भीड़ ने अभिषेक बनर्जी की शर्ट तक फाड़ दी। सुरक्षाकर्मियों ने बड़ी मुश्किल से उन्हें क्रिकेट हेलमेट पहनाकर उस भीड़ से उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। जिसकी तस्वीरें भी इंटरनेट पर वायरल हुईं। इस घटना के बाद अभिषेक ने इसे बीजेपी की सोची-समझी साजिश बताते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही थी।
अब विधायक मदन मित्रा की गाड़ी पर फेंके गए अंडे
अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) के बाद अब ताजा मामला कमरहाटी से विधायक और टीएमसी के वरिष्ठ नेता मदन मित्रा का है। 7 जून 2026, यानि रविवार को कमरहाटी इलाके में स्थानीय मुद्दों और 'कट-मनी' (अवैध कमीशन) को लेकर स्थानीय लोग प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान मदन मित्रा का वाहन वहां से गुजरा तो प्रदर्शनकारियों ने उनके वाहन को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ अंडे फेंकने शुरू कर दिए।
मदन मित्रा (Madan Mitra) ने भी इस हमले के पीछे बीजेपी का हाथ बताया है। इससे पहले टीएमसी सांसद सौगत रॉय (Saugata Roy) पर निमता इलाके में और जयप्रकाश मजूमदार जैसे कई अन्य नेताओं पर भी इसी तरह अंडे फेंककर विरोध जताया जा चुका है।
'अंडा' क्यों बन रहा विरोध का प्रतीक?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार जनता ने विरोध का जो तरीका चुना है, उसके पीछे कुछ खास वजहें हैं:
- अंडा एक ऐसा साधन है जो बेहद सस्ता है और हर जगह आसानी से मिल जाता है। इससे नेता को गहरी शारीरिक चोट तो नहीं लगती, लेकिन सरेआम अंडा फेंके जाने से उसकी राजनीतिक और सामाजिक प्रतिष्ठा को बहुत गहरा धक्का लगता है।
- बंगाल में लंबे समय से टीएमसी नेताओं पर भ्रष्टाचार, जबरन उगाही और दबंगई के आरोप लगते रहे हैं। चुनाव में पार्टी की हार होते ही जनता का वह डर गायब हो गया है, और वे उन इलाकों में भी खुलकर गुस्सा निकाल रहे हैं जो कभी टीएमसी के मजबूत गढ़ हुआ करते थे।
- नेताओं पर अंडे फेंकने के वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रहे हैं। इससे यह तरीका एक ट्रेंड बन चुका है, जिसे देखकर दूसरे इलाकों के लोग भी प्रभावित हो रहे हैं।
पूरा घटनाक्रम एक संगठित हमला-टीएमसी
इस अनोखे विरोध प्रदर्शन ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। टीएमसी इस पूरे घटनाक्रम को एक संगठित हमला मान रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी नेतृत्व का कहना है कि यह लोकतंत्र पर हमला है और बीजेपी राजनीतिक बदले की भावना से ये सब करवा रही है।
इसके विरोध में टीएमसी राज्यव्यापी प्रदर्शन भी कर रही है। दूसरी तरफ, विपक्ष (खासकर बीजेपी) का कहना है कि यह कोई साजिश नहीं बल्कि टीएमसी के 'अत्याचारों' से तंग आ चुकी बंगाल की जनता का स्वाभाविक और शांतिपूर्ण आक्रोश है।
