सैफ अली खान पर हमला करने वाले को पुलिस ने पकड़ लेने का दावा किया है। सैफ पर हमला करने वाले आरोपी का नाम मोहम्मद शरीफुल इस्लाम शहजाद है, लेकिन जब पुलिस ने पकड़ा और उसकी पहचान की तो उसने अपना नाम बिजॉय दास बताया। हालांकि जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो कई जानकारी सामने आई, पहला वो हिंदुस्तानी नहीं, बांग्लादेशी है, अवैध रूप से आया है और आते ही नाम बदल लिया था। पुलिस ने सैफ के हमलावर की सारी कहानी बता दी है। आइए जानते हैं कि कैसे और क्यों मोहम्मद शरीफुल इस्लाम शहजाद बना बिजॉय दास और सैफ पर हमला करने से पहले वो क्या करता था?
शहजाद क्यों बना बिजॉय दास
पुलिस ने जिस शख्स को पकड़ा है उसके तार मूल रूप से बांग्लादेश से जुड़े हैं। एक शख्स बांग्लादेश से भारत आता है, वो भारत कोई कागज या वीजा पर नहीं आता है, बल्कि अवैध तरीके से आता है और फिर अपना नाम बदल एक हिंदू नाम बिजॉय दास रख लेता है, ताकि लोग उसे बंगाली समझें न कि बांग्लादेशी। नाम बदलने से न तो पुलिस शक करती और न लोग, उसे काम आसानी से मिल जाता और अगर कोई क्राइम में फंसता तो भी वो एक भारतीय नागरिक के रूप में होता न कि बांग्लादेशी। दूसरा हाल के महीनों में मुंबई समेत कई राज्यों में पुलिस अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ अभियान चलाए हुए हैं, ऐसे में अगर शहजाद किसी रेड में फंसता तो बिजॉय दास के नाम से बच सकता था।
बांग्लादेश से आया मुंबई
शहजाद ने देश में "अवैध रूप से" प्रवेश किया था और इसके बाद मुंबई में बस गया। उसने मुंबई के बाहरी इलाके ठाणे में स्थित एक बार में हाउसकीपिंग का काम शुरू किया। हालांकि, हमले से ठीक एक सप्ताह पहले उसने अपनी नौकरी छोड़ दी थी ताकि उसे बेहतर रोजगार मिल सके। पुलिस ने यह भी बताया कि शहजाद के पास कोई वैध भारतीय पहचान दस्तावेज नहीं था, जिससे यह संकेत मिलता है कि वह भारतीय नागरिक नहीं था और अवैध रूप से देश में प्रवेश किया था।
नौकरी छोड़ करने लगा लूटपाट
शहजाद ने भारत में प्रवेश करने के बाद अपना नाम बदलकर विजय दास रख लिया था और वह मुंबई में सिर्फ छह महीने से रह रहा था। पुलिस के अनुसार, शहजाद का अपराध का मकसद लूटपाट था। हालांकि, पुलिस ने यह भी बताया कि शहजाद को इस बात की जानकारी नहीं थी कि वह चोरी करने के प्रयास में सैफ अली खान के घर में घुसा था।
पकड़ाने पर किया हमला
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, शहजाद कथित तौर पर खान के बांद्रा स्थित आवास में लूटपाट के इरादे से घुसा था, लेकिन पकड़े जाने पर वो हिंसक हो गया, जिसके कारण सैफ पर उसने छह बार चाकू से हमला कर दिया। हमले के बाद, शहजाद भाग गया, बांद्रा से दादर के लिए ट्रेन पकड़ी और फिर वर्ली में अपने अस्थायी निवास की ओर चल पड़ा। जब उसने देखा कि उसकी तस्वीर समाचार चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रही है, तो वह डर गया और उसने छिपने का फैसला किया।
अंतरराष्ट्रीय साजिश की भी जांच
पुलिस ने अदालत को बताया कि कथित हमलावर भारत में अवैध रूप से रहने वाला एक बांग्लादेशी नागरिक था और उसके कृत्य के पीछे के मकसद का पता लगाने की जरूरत है। पुलिस ने अदालत से यह भी कहा कि उन्हें यह पता लगाने की जरूरत है कि इस मामले का संबंध किसी अंतरराष्ट्रीय साजिश से है या नहीं।
बचाव पक्ष का दावा
बचाव पक्ष के वकील संदीप डी शेरखाने ने तर्क दिया कि उनका मुवक्किल कई वर्षों से देश में रह रहा है और उसके पास (देश में रहने के लिए) महत्वपूर्ण दस्तावेज है, और उसका परिवार भी भारत में रह रहा है। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि अभिनेता सैफ अली खान की मौजूदगी के कारण इस मामले को तूल दिया गया है।

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शहजाद तक कैसे पहुंची पुलिस
जांच में सफलता डिजिटल सुरागों की श्रृंखला के माध्यम से मिली, जो शहजाद की गतिविधियों को जोड़ने में मददगार साबित हुई। सबसे पहले, एक मोबाइल फोन की दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे ने शहजाद को वीडियो में कैद किया। लेकिन उसकी पहचान तक पहुंचने में जो अहम भूमिका निभाई, वह थी उसका यूपीआई लेनदेन। शहजाद ने एक मोबाइल कवर खरीदा था, जिसके लिए ऑनलाइन पेमेंट किया था, यहीं से पुलिस को हमले के बाद उसकी गतिविधियों का पता लगाने में मदद मिली। इस ट्रेल के माध्यम से अधिकारियों को शहजाद की लोकेशन और उसकी आगे की योजना का पता चल सका, जिससे उसकी गिरफ्तारी में मदद मिली।
सैफ पर हमला
सैफ अली खान पर बांद्रा के ‘सतगुरु शरण’ बिल्डिंग की 12वीं मंजिल पर स्थित उनके घर में गुरुवार को हमला हुआ था। हमलावर ने सैफ पर कई बार चाकू से वार किया था। सैफ की आपातकालीन सर्जरी करने वाले चिकित्सकों ने बाद में उनकी रीढ़ से टूटे हुए चाकू का 2.5 इंच का टुकड़ा निकाला था। चिकित्सकों का कहना था कि अगर चाकू दो मिलीमीटर और अंदर घुस जाता तो गंभीर चोट लग सकती थी। सैफ अभी भी अस्पताल में हैं और उनका इलाज जारी है।
