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राज्यसभा सीट, लोकसभा चुनाव...,AAP की आंख में पहले से खटक रही थीं स्वाति मालीवाल? प्वाइंटर्स में जानिए सभी कारण

Swati Maliwal Assault Case: स्वाति मालीवाल और आम आदमी पार्टी के बीच झगड़े की शुरुआत बहुत पहले ही हो चुकी थी। इसके पीछे राज्यसभा सीट से लेकर अरविंद केजरीवाल का जेल जाना और लोकसभा चुनाव जैसे बड़े कारण थे। कई मुद्दों को लेकर पार्टी नेताओं और स्वाति मालीवाल के बीच दूरियां बढ़ती गईं और 13 मई की सुबह यह सबकुछ सामने आ गया।

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स्वाति मालीवाल

Photo : Twitter

Swati Maliwal Assault Case: आम आदमी पार्टी और राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के बीच अंदर ही अंदर चली आ रही अंदरूनी कलह खुलकर अब सामने आ चुकी है। यह सब तब हुआ जब 13 मई की सुबह यह खबर आई कि अरविंद केजरीवाल के आवास पर उनके निजी सचिव बिभव कुमार ने स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट की है। इसकी शिकायत पुलिस में की गई। हालांकि, तीन दिन तक स्वाति मालीवाल और आम आदमी पार्टी इस मुद्दे पर साइलेंट मोड पर रहीं। 16 मई को जब स्वाति मालीवाल ने पुलिस में बिभव कुमार के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई, पार्टी और दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष मालीवाल आमने-सामने आ गए।

हालांकि, इस अंदरूनी कलह की शुरुआत 13 मई से शुरू नहीं हुई है। सूत्रों का कहना है कि स्वाति मालीवाल और पार्टी के बीच झगड़े की शुरुआत बहुत पहले ही हो चुकी थी। इसके पीछे स्वाति मालीवाल की राज्यसभा सीट से लेकर अरविंद केजरीवाल का जेल जाना और लोकसभा चुनाव जैसे बड़े कारण थे। कई मुद्दों को लेकर पार्टी नेताओं और स्वाति मालीवाल के बीच दूरियां बढ़ती गईं और 13 मई की सुबह यह सबकुछ सामने आ गया। आइए जानते हैं वो कौन से कारण थे जिनसे स्वाति मालीवाल पार्टी की आंख में चुभ रही थीं...

राज्यसभा सीट

विश्वसनीय सूत्रों ने बताया कि स्वाति मालीवाल द्वारा आप के राज्यसभा सांसद के रूप में पद छोड़ने के लिए पूर्व-मसौदा त्याग पत्र पर हस्ताक्षर करने से इनकार करने के कारण केजरीवाल के करीबी सहयोगी ने उन पर हमला किया। सूत्रों ने कहा कि पार्टी नेतृत्व, मालीवाल की सीट को एक वरिष्ठ वकील को देने का इच्छुक है, जो अदालतों में केजरीवाल का मुकदमा देख रहे हैं। इस साल जनवरी में, मालीवाल को दिल्ली से आप के राज्यसभा सदस्य के रूप में चुना गया था। इनका कार्यकाल 2030 में समाप्त होगा। राज्यसभा सीट के लिए होने वाले उप-चुनाव (अगर ऐसी स्थिति बनी तो) के लिए आप जिसे भी टिकट देगी, उसका जीतना लगभग तय है।

लोकसभा चुनाव और मालीवाल का विदेश भ्रमण

जब केजरीवाल को आबकारी नीति मामले में गिरफ्तार किया गया, तो मालीवाल विदेश में थीं। पार्टी के अन्य नेता जब इस मामले पर बयान जारी कर रहे थे, तो वह अनुपस्थित थीं। सूत्रों ने कहा कि उन्हें दिल्ली लौटने और लोकसभा चुनाव अभियान में भाग लेने के लिए कहा गया। लेकिन उनके वापस आने पर उन्हें कोई सार्थक कार्यभार नहीं दिया गया।

केजरीवाल की जेल और पार्टी में बदलाव

कथित शराब घोटाले में केजरीवाल के जेल जाने के बाद से आप में कुछ बदलाव आ गया है। हालांकि केजरीवाल निर्विवाद रूप से 'बॉस' बने हुए हैं और आप में उनकी बात अंतिम है, कुछ नए सत्ता केंद्र, चाहे वे किसी भी क्षमता के हों, अपने लिए जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं, उनको मालीवाल से काफी शिकायतें हैं। सूत्रों ने बताया कि मालीवाल इन मुद्दों और कुछ अन्य चीजों पर केजरीवाल के साथ चर्चा करना चाहती थीं, इसलिए वह 13 मई की सुबह सीएम के आधिकारिक आवास पर गईं।

दूसरे पद के लिए राजी न होना

सूत्रों ने यह भी कहा कि जब मालीवाल से राज्यसभा के सभापति को संबोधित त्याग पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया, तो उन्होंने पूछा, वह क्यों? राज्यसभा में पार्टी के नौ अन्य लोग हैं, तो कोई और क्यों नहीं। निकट भविष्य में उन्हें कुछ और पद देने का वादा किया गया। सूत्रों ने कहा, लेकिन उन्होंने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया।

(एजेंसी इनपुट -IANS)

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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