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कौन हैं स्वाति मालीवाल? पति से तलाक; जानें कैसे हुई सियासत में उनकी एंट्री और निजी जिंदगी से जुड़ी 5 बातें

Delhi News: इन दिनों स्वाति मालीवाल सुर्खियों में हैं, दिल्ली के मुख्यमंत्री आवास में सीएम अरविंद केजरीवाल के पीएस से मारपीट के मामले ने जोर पकड़ लिया है। क्या आप जानते हैं कि आखिर स्वाति मालीवाल हैं कौन और इन्होंने सियासत का रुख कब और कैसे किया? आपको इस रिपोर्ट में सबकुछ बताते हैं।

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स्वाति मालीवाल को जानिए।

Photo : Times Now Digital

Who is Swati Maliwal: आम आदमी पार्टी की ओर से राज्यसभा सदस्य चुनी जाने वाली स्वाति मालीवाल से जुड़ा विवाद इन दिनों खूब सुर्खियां बंटोर रहा है। मालीवाल केस में लगातार नए-नए खुलासे हो रहे हैं। सीएम अरविंद केजरीवाल के पीएस विभव कुमार के खिलाफ पुलिस भी एक्शन मोड में आ चुकी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर स्वाति मालीवाल कौन हैं और इन्होंने सियासत में कब एंट्री की?

कौन हैं स्वाति मालीवाल?

स्वाति मालीवाल का नाता उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से है। इसी शहर में उनका जन्म 15 अक्टूबर, 1984 को हुआ था। उनके पिता रिटायर्ड एयरफोर्स अफसर और माता रिटायर्ड स्कूल प्रिंसिपल हैं। मालीवाल ने अपनी पढ़ाई एमिटी इंटरनेशन स्कूल से की, वो आईटी से ग्रेजुएट हैं। ग्रेजुएशन के बाद स्वाति मालीवाल अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के एनजीओ (NGO) से जुड़ गईं और समाजसेवा का काम करने लगीं। अन्ना आंदोलन (इंडिया अगेंस्ट करप्शन आदोलन) की वो सबसे कम उम्र की मेंबर रहीं। इसी के बाद वो सियासत में एंट्री करती हैं।

कैसे सियासत में हुई एंट्री?

अन्ना आंदोलन के बाद मालीवाल एक प्रखर वक्ता और कर्मठ कार्यकर्ता के रूप में उभरीं और इसके बाद उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सलाहकार के रूप में काम किया। वर्ष 2015 में जब दूसरी बार दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सरकार बनी तो उन्हें दिल्ली महिला आयोग की कमान दे दी गई। वो दिल्ली महिला आयोग की सबसे कम उम्र की अध्यक्ष बनीं। करीब 9 वर्षों तक स्वाति मालीवाल ने बड़े ही बेबाक अंदाज में इस पद का निर्वहन किया। वो महिलाओं से जुड़े मुद्दे उठाने के लिए मशहूर होती चली गईं। उनके बेबाक अंदाज और कार्यशैली को देखते हुए आम आदमी पार्टी ने इसी साल उन्हें राज्यसभा सदस्य के लिए आगे किया। फिलहाल वो राज्यसभा सांसद हैं।

स्वाति से जुड़ी 5 बातें

1जन्म15 अक्टूबर, 1984 (गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश)
2पिताअशोक मालीवाल
3मातासंगीता मालीवाल
4पूर्व पतिनवीन जयहिंद (तलाक- वर्ष 2020)
5शिक्षाएमिटी इंटरनेशनल स्कूल, IT ग्रेजुएट

8 साल चली स्वाति की शादी

स्वाति मालीवाल का विवाद नवीन जयहिंद नाम के व्यक्ति के साथ वर्ष 2012 में हुआ था। स्वाति ने नवीन जयहिंद से 23 जनवरी 2012 को शादी की थी, जिनसे उनकी मुलाकात 2011 में अन्ना हजारे के नेतृत्व वाले भारतीय भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के शुरुआती दिनों में हुई थी। नवीन के साथ स्वाति का रिश्ता 8 साल तक ही चल सका। नवीन जयहिंद भी आम आदमी पार्टी से जुड़े हुए थे। वर्ष 2020 के फरवरी माह में दोनों ने तलाक ले लिया।

अदालत पहुंचीं स्वाति मालीवाल

आम आदमी पार्टी की सांसद स्वाति मालीवाल अपने साथ मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सहयोगी बिभव कुमार द्वारा की गई कथित बदसलूकी के मामले में मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज कराने के लिए शुक्रवार को तीस हजारी अदालत पहुंचीं। मालीवाल सोमवार (13 मई, 2024) की सुबह सिविल लाइन्स थाने में पहुंची थीं और उन्होंने आरोप लगाया था कि केजरीवाल के निजी स्टाफ के एक सदस्य ने मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर उनके साथ मारपीट की थी। अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने बृहस्पतिवार को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की और बिभव कुमार को आरोपी बनाया।

महिला आयोग के समक्ष नहीं हुए पेश

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सहयोगी बिभव कुमार आम आदमी पार्टी (आप) की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ कथित बदसलूकी के सिलसिले में शुक्रवार (17 मई, 2024) को राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) के समक्ष पेश नहीं हुए। एनसीडब्ल्यू ने कुमार को सुबह 11 बजे आयोग के समक्ष पेश होने के लिए समन भेजा था।

स्वाति से मारपीट के बाद उनकी ओर से 13 मई को पुलिस को दी गई शिकायत को ही एफआईआर में बदला गया है। इसके अलावा उस दिन सीएम हाउस के अंदर का वीडियो भी सामने आया है जब स्वाति के साथ मारपीट हुई थी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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