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'सफेद सागर' से लेकर 'ऑपरेशन सिंदूर' तक...कौन हैं देश के नए एयरफोर्स चीफ आशुतोष दीक्षित, बांग्लादेश से भी खास कनेक्शन

एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को भारतीय वायुसेना का नया प्रमुख नियुक्त किया गया है। 1986 में फाइटर स्ट्रीम में कमीशन हुए दीक्षित के पास 3,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है। जानें उनके बारे में विस्तार से...

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एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित भारतीय वायुसेना के नए प्रमुख नियुक्त
Authored by: रवि वैश्य
Updated Oct 6, 2026, 22:27 IST
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भारतीय वायु सेना को अपना 29वां प्रमुख (IAF Chief) मिल गया है। सरकार ने एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित (Air Marshal Ashutosh Dixit) को अगला वायु सेना प्रमुख नियुक्त किया है। मौजूदा वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त होंगे। इसके बाद एयर मार्शल दीक्षित वायुसेना की कमान संभालेंगे।

दीक्षित 6 दिसंबर 1986 को फाइटर स्ट्रीम में कमीशन हुए थे और 3500 घंटे से ज्यादा उड़ान भर चुके हैं। वे कारगिल के ऑपरेशन सफेद सागर से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक में अहम भूमिका निभा चुके हैं और स्वदेशी तेजस कार्यक्रम के हीरो माने जाते हैं।

एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित मौजूदा वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ हैं। एयर मार्शल दीक्षित 31 अक्टूबर 2026 से एयर चीफ मार्शल के पद पर 29वें चीफ ऑफ एयर स्टाफ (CAS) के तौर पर कार्यभार संभालेंगे।

सैन्य कैरियर और पृष्ठभूमि

एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन किया गया था। उनके पास कई प्रकार के विमानों को उड़ाने का लंबा अनुभव है और वह 3,500 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव रखते हैं। वह योग्य उड़ान प्रशिक्षक (Qualified Flying Instructor) और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट भी हैं।

QFI और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट हैं

QFI और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट हैं

आशुतोष दीक्षित का 4 दशक का करियर

एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित भारतीय वायु सेना के एक अत्यंत अनुभवी और प्रतिष्ठित अधिकारी हैं। वर्तमान में एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित वायु सेना के उप प्रमुख (Vice Chief of the Air Staff) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। इससे पहले वे चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ और सेंट्रल एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी रह चुके हैं। करीब 4 दशक के करियर में उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं। वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ बनने से पहले वह चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (CISC) और एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, सेंट्रल एयर कमांड के पद पर रह चुके हैं।

उड़ान अनुभव 3500+ घंटे से ज्यादा

वह एक क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर (QFI) और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट हैं, जिनके पास विभिन्न प्रकार के विमानों को उड़ाने का 3,500 घंटे से अधिक का लंबा और समृद्ध अनुभव है। उन्होंने स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस, मिराज 2000 और जगुआर समेत कई प्रमुख विमान उड़ाए हैं। उनके उड़ाए जहाजों में शामिल हैं- Mirage-2000, MiG वैरिएंट, Jaguar, Hawk, Tejas, HPT-32, An-32, Avro, Kiran, IL-78

तेजस के हीरो आशुतोष दीक्षित

एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने LCA तेजस प्रोग्राम को फोर्स में शामिल कराने में सबसे अहम भूमिका निभाई। वह उन चुनिंदा और वरिष्ठ पायलटों में शामिल हैं जिन्होंने भारत के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान LCA (Light Combat Aircraft) 'तेजस' को उड़ाया है। उन्हें 'तेजस' और भारत की आत्मनिर्भर रक्षा तकनीक के प्रमुख विशेषज्ञों में गिना जाता है। उनके पास मिराज-2000, मिग-21, जगुआर और एचपीटी-32 जैसे 20 से अधिक प्रकार के विमानों के साथ-साथ तेजस को भी उड़ाने का लंबा और समृद्ध अनुभव रहा है। एक अनुभवी 'एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट' और 'क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर' होने के नाते, उन्होंने वायुसेना में भारत के स्वदेशी रक्षा प्रोजेक्ट्स और 'तेजस' जैसे विमानों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

विमानों को उड़ाने का 3,500 घंटे से अधिक का लंबा अनुभव

विमानों को उड़ाने का 3,500 घंटे से अधिक का लंबा अनुभव

प्रमुख ऑपरेशनों में भूमिका

अपने लंबे और विशिष्ट सैन्य करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण अभियानों और सैन्य अभ्यासों में सक्रिय रूप से भाग लिया है। इनमें कारगिल युद्ध के दौरान 'ऑपरेशन सफेद सागर' (Operation Safed Sagar), 'ऑपरेशन रक्षक' (Operation Rakshak) और 'ऑपरेशन सिंदूर' (Operation Sindoor)जैसे अहम अभियान शामिल हैं।

एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को मिले हैं तमाम सम्मान

आशुतोष दीक्षित को को साल 2006 वायु सेना मेडल तो 2011 में विशिष्ट सेवा मेडल, वहीं अति विशिष्ट सेवा मेडल 2023 में और परम विशिष्ट सेवा मेडल साल 2026 में मिला है। वह खड़कवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के 69वें कोर्स के पूर्व छात्र रहे हैं और उन्होंने डिफेंस स्टाफ सर्विस कॉलेज (बांग्लादेश) तथा नेशनल डिफेंस कॉलेज (दिल्ली) से भी शिक्षा प्राप्त की है। उन्हें स्वदेशी एलसीए तेजस और भारतीय विमानन परियोजनाओं को वायुसेना में बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। ऐसे में उनसे सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल को और मजबूती देने की उम्मीद है।

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