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विनेश फोगाट के मुद्दे पर राज्यसभा में ऐसा क्या हुआ, जो आसन छोड़कर चले गए जगदीप धनखड़; 10 पॉइंट में समझिए सबकुछ

Parliament News : राज्यसभा के सभापति और देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने एक बार फिर अपना दुख बयां किया। विनेश फोगाट के मुद्दे पर विपक्ष ने किया राज्यसभा से वॉकआउट किया तो सदस्यों के आचरण से सभापति धनखड़ दुखी हो गए। फोगाट के समर्थन में जमकर नारेबाजी की गई।

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सदन में विनेश फोगाट के मामले को लेकर हंगामा।

Vinesh Phogat Controversy: पेरिस ओलंपिक में स्वर्ण पदक मुकाबले से पहले भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट को अयोग्य ठहराये जाने के मुद्दे पर चर्चा कराए जाने की मांग को राज्यसभा में आसन की ओर से खारिज किए जाने के बाद विपक्ष ने बृहस्पतिवार को उच्च सदन से बहिर्गमन किया। इस दौरान विपक्ष के कुछ सदस्यों के अमर्यादित आचरण से दुखी होकर सभापति जगदीप धनखड़ यह कहते हुए आसन छोड़कर चले गए कि वह कुछ समय के लिए आसन पर बैठने में खुद को सक्षम नहीं पा रहे हैं।

1). फोगाट के मुद्दे चर्चा कराने की मांग

सुबह सदन की कार्यवाही आरंभ होने पर धनखड़ ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए और उसके बाद शून्यकाल आरंभ करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अजीत गोपचड़े को अपना मुद्दा उठाने को कहा। इसके तुरंत बाद कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस सहित विपक्ष के कुछ सदस्य अपने स्थान पर खड़े हो गए और फोगाट को अयोग्य ठहराए जाने के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग करने लगे। हंगामे के बीच ही गोपचड़े अपना मुद्दा उठा रहे थे।

2). विनेश के समर्थन में नारेबाजी हुई

इसी दौरान तृणमूल के डेरेक ओब्रायन कुछ कहते हुए सुने गए। सभापति ने जब हंगामा कर रहे सदस्यों की बात को अनसुनी कर दिया तो सदन में शोरगुल और तेज हो गया। विपक्षी सदस्यों की ओर से फोगाट के समर्थन में नारेबाजी शुरू कर दी गई। सभापति ने इसके बाद विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को मौका दिया। उन्होंने कहा कि कल ही हमने यह मुद्दा उठाया था और यह बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है। उन्होंने कहा, 'यह मुद्दा व्यक्तिगत तौर पर किसी के लिए चिंता में डालने वाला नहीं है।'

3). सभापति ने खड़गे से ऐसा क्या कहा?

खड़गे अभी बोल ही रहे थे कि सभापति ने उनसे पूछा कि वह कौन सा मुद्दा उठाना चाहते हैं। खड़गे ने कहा कि फोगाट का मुद्दा। इस पर सभापति ने खड़गे से पूछा कि क्या वह इस मुद्दे पर चर्चा चाहते हैं? नेता प्रतिपक्ष ने कहा, 'चर्चा कीजिए...इसके पीछे कौन है? और कैसे केवल 100 ग्राम...।' सभापति ने खड़गे को मुद्दा उठाने देने से रोकते हुए कहा कि वह इस सदन को ऐसे मंच के रूप में इस्तेमाल नहीं करने देंगे। उन्होंने खड़गे से कहा कि वह नियमों का उपयोग करें।

4). 'आसन पर चिल्लाने की हिम्मत कैसे की?'

इसी दौरान विपक्ष के सदस्यों का हंगामा शुरू हो गया। हंगामा देख सभापति ने डेरेक का नाम लेकर कहा कि वह आसन पर चिल्ला रहे हैं। उन्होंने डेरेक से कहा, 'सदन में आपका आचरण सबसे खराब है। आप आसन पर चिल्ला रहे हैं। मैं इसकी निंदा करता हूं। अगली बार मैं आपको दरवाजा दिखा दूंगा। आपने आसन पर चिल्लाने की हिम्मत कैसे की?' विपक्ष के नेता की ओर हाथ करते हुए सभापति ने कहा कि और वरिष्ठ नेता इस पर (डेरेक के आचरण पर) कोई ध्यान नहीं रहे हैं। उन्होंने कहा, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण आचरण है।'

5). सभी विपक्षी सांसदों ने किया वॉकआउट

इसी दौरान समूचा नारेबाजी करता हुआ समूचा विपक्ष सदन से बहिर्गमन (वॉकआउट) कर गया। सभापति ने इस पर कहा, 'हमने सबसे बदसूरत दृश्य देखा है। हमने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र का काला दौर देखा है। हम जानते हैं कि यह कैसे शुरू होता है। इसकी शुरुआत सबसे पहले संसदीय संस्थाओं को चुनौती देने से होती है। और यह चुनौती जून 1975 में दी गई थी। यहां एक गंभीर चुनौती थी। क्या कोई इस तरह का आचरण कर सकता है।'

6). जे पी नड्डा ने विपक्ष के लिए क्या कहा?

सभापति की इस टिप्पणी के बाद सदन के नेता जे पी नड्डा ने कहा कि विपक्ष ने आसन को तकलीफ पहुंचाई और यह संसदीय मर्यादाओं का उल्लंघन हुआ है। उन्होंने कहा, 'यह सच में निंदनीय है।' उन्होंने विशेषतौर पर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों के आचरण की निंदा करते हुए कहा कि यह उनके लिए चिंतन करने वाला प्रश्न है। उन्होंने कहा, 'जहां तक विनेश फोगाट का सवाल है। यह पक्ष और विपक्ष का सवाल नहीं है। यह देश का सवाल है। सारा देश उनके साथ खड़ा है। यह भारतीय खेल को आगे बढ़ाने का विषय है, जिसमें सब लोग भावनात्मक तरीके से जुड़े हुए हैं और विनेश के साथ खड़े हैं।'

7). सदन को अराजकता का केंद्र बनाने का आरोप

उन्होंने कहा कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विनेश को चैंपियन ऑफ चैंपियंस कहा है और यह भी कहा है कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा, 'दुर्भाग्य इस बात का है इसको भी हम पक्ष और विपक्ष में बांटने का प्रयास कर रहे हैं। शायद विपक्ष विषय विहीन हो चुका है। मुद्दा विहीन हो चुका है। कोई ठोस मुद्दा नहीं है उनके पास।' इसके बाद धनखड़ ने कहा कि इस पवित्र सदन को अराजकता का केंद्र बनाना, भारतीय प्रजातंत्र के ऊपर कुठाराघात करना, सभापति की गरिमा को धूमिल करना और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण वातावरण बनाना यह अब मर्यादित आचरण नहीं है।

8). 'यह सभापति के पद को दी जा रही है'

उन्होंने कहा, 'मैं हाल के दिनों में देख रहा हूं, जिस तरीके से आसन को चुनौती दी जा रही है। शब्दों से, पत्र के द्वारा, अखबार के माध्यम से...कितनी गलत टिप्पणी की है। मैंने देखा है। मेरे को यह चुनौती नहीं दी जा रही है। यह सभापति के पद को दी जा रही है। यह चुनौती है इसलिए दी जा रही है कि जो व्यक्ति इस पद पर बैठा है वह इसके लायक नहीं है, ऐसा यह सोचते हैं।'

9). मैं अपनी शपथ से दूर नहीं भाग रहा हूं- धनखड़

जगदीप धनखड़ ने कहा कि उन्हें सदन का जितना समर्थन मिलना चाहिए था उतना नहीं मिला है जबकि उन्होंने प्रयास में कोई कमी नहीं रखी है। उन्होंने कहा, 'अब मेरे पास एक ही विकल्प है। दुखी मन से... मैं अपनी शपथ से दूर नहीं भाग रहा हूं पर जो आज मैंने देखा है... जिस तरीके का व्यवहार सदस्य ने किया है... शारीरिक रूप से किया है... जिस तरीके का व्यवहार इधर (विपक्ष) से भी हुआ है। मैं कुछ समय के लिए बैठने में अपने आप को सक्षम नहीं पा रहा हूं। मैं दुखी मन से...'

10). धनखड़ के बाद हरिवंश ने किया संचालन

इतना कहते हुए धनखड़ आसन छोड़कर चले गए। इसके बाद उपसभापति हरिवंश ने शून्यकाल की कार्यवाही का संचालन किया। विनेश को बुधवार को महिलाओं के 50 किग्रा वर्ग के फाइनल से पहले 100 ग्राम अधिक वजन होने के कारण अयोग्य ठहराया गया था। उन्होंने आज सुबह संन्यास की घोषणा की।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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