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असीम मुनीर को लेकर ऐसे ही नहीं लग रही अटकलें, समझिए कहां से उठ रहा पाकिस्तान में मिलिट्री राज का धुआं

भारत से साथ तनाव के बाद असीम मुनीर का कद इतना बढ़ गया है कि वो सीधे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मुलाकात कर रहे हैं। जबकि आम तौर पर राष्ट्र के मुखिया को ऐसी मुलाकात करते हैं और देश के संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए बात करते हैं।

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पाकिस्तान में तख्तापलट की लग रही हैं अटकलें (फोटो- AP)

क्या पाकिस्तान में एक बार फिर से मिलिट्री राज की आहट है। पाकिस्तान का इतिहास रहा है तख्तापलट का, सेना जब-जब मात खाकर ताकतवर हुई है पाकिस्तान में तख्तापलट हुआ है। एक बार फिर पाकिस्तानी सेना ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत से मात खा चुकी है। हमेशा की तरह हार के बाद भी पाकिस्तानी सरकार अपनी पीठ थपथपाते हुए सेना का गुणगान कर रही है, सेना प्रमुख असीम मुनीर को फील्ड मार्शल बना चुकी है। अब उसी असीम मुनीर से तख्तापलट की शंका पैदा हो रही है। पाकिस्तान की सरकार कह रही है कि ये सिर्फ अटकलें हैं, सच्चाई नहीं है, लेकिन फील्ड मार्शल बनने के बाद से असीम मुनीर जिस तरह से सुप्रीम बॉस जैसा व्यवहार कर रहे हैं, वो यह तो स्पष्ट कर दे रहा है कि सरकार में असीम मुनीर का काफी दखल हो चुका है। विदेश और रक्षा मामलों में असीम मुनीर की सीधी मर्जी चल रही है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से उनकी नाराजगी सबके सामने रही है।

असीम मुनीर सुप्रीम बॉस?

फील्ड मार्शल बनने के बाद से असीम मुनीर एक अलग ही अंदाज में दिख रहे हैं। पाकिस्तानी मीडिया में भी असीम मुनीर छाए हैं, पीएम शहबाज शरीफ पर्दे से गायब ही दिख रहे हैं। विदेश नीति से लेकर रक्षा नीति तक के फैसलों पर असीम मुनीर की छाप दिख रही है। अब वो श्रीलंका के सीधे दौरे पर जा रहे हैं, अमेरिका का दौरा तो वो पहले ही कर चुके हैं।

ट्रंप से सीधी मुलाकात

भारत से साथ तनाव के बाद असीम मुनीर का कद इतना बढ़ गया है कि वो सीधे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मुलाकात कर रहे हैं। जबकि आम तौर पर राष्ट्र के मुखिया को ऐसी मुलाकात करनी चाहिए। इस बैठक में ट्रंप और जनरल मुनीर ने व्यापार, ऊर्जा, एआई, क्रिप्टोकरेंसी, खनिज संसाधन और आतंकवाद निरोधक सहयोग जैसे कई मुद्दों पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने आपसी संबंधों को मजबूत करने के लिए साझा हितों पर ध्यान केंद्रित किया।

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असीम मुनीर को फील्ड मार्शल की उपाधि प्रदान करते हुए पीएम शहबाज शरीफ और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी (फोटो- @ShehbazSharif)

पाकिस्तान में लगने लगी तख्तापलट की अटकलें

ट्रंप के साथ असीम मुनीर की मुलाकात के बाद से ही पाकिस्तान में तख्तापलट की अटकलें लगने लगीं। ट्रंप के साथ जो बातचीत पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ को करनी चाहिए थी, वो बातचीत असीम मुनीर कर रहे थे। इस मुलाकात ने पाकिस्तान में राजनीतिक हलचल मचा दी है, क्योंकि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को इस बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया था, जबकि सेना प्रमुख को व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित किया गया। जो यह दर्शाता है कि देश की सैन्य शक्ति नागरिक सरकार से ऊपर मानी जा रही है।

अब श्रीलंका दौरे पर पीएम से भी ज्यादा सुविधाएं?

असीम मुनीर अब श्रीलंका जाने वाले हैं। इस दौरे के दौरान उनके लिए जो व्यवस्थाएं की गईं हैं, वो इतनी भव्य है कि शायद ही पाकिस्तानी पीएम के लिए उस तरह की व्यवस्था की जाती रही हो। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार असीम मुनीर की यह यात्रा सरकारी नहीं है, बल्कि वो छुट्टियां बिताने श्रीलंका जा रहे हैं। हालांकि खर्चा जाहिर तौर पर सरकारी ही होगा। असीम मुनीर के लिए खास जेट की व्यवस्था की गई है, श्रीलंका में सेरेमोनियल बाइक एस्कॉर्ट्स उनके साथ होगा, हेलीकॉप्टर्स से हवाई मजा की व्यवस्था की गई है। इतना ही नहीं सबसे बेहतरीन होटल में उनका रहने का इंतजाम किया गया है। असीम मुनीर को जो सुविधाएं दी गईं है, वो फिलहाल पाकिस्तान के मंत्रियों के लिए भी उपलब्ध नहीं है। उनकी तो विदेश यात्रा पर भी रोक लगी है, फाइव स्टार होटल में भी रूकने पर पाबंदी है। गैर जरूरी खर्चों को बचाने के लिए पाक सरकार ने यह कदम उठाया था, लेकिन असीम मुनीर इस दायरे में नहीं आते हैं।

  • विशेष विमान: यात्रा के लिए विशेष विमान की व्यवस्था की गई है।
  • हेलीकॉप्टर सैर: श्रीलंका के ऐतिहासिक स्थलों जैसे सिगिरिया किला और ऐडम्स पीक की हवाई यात्रा।
  • भव्य आवास: कोलंबो के प्रमुख लग्जरी होटलों में ठहरने की योजना है।
  • सैन्य सम्मान: औपचारिक बाइक एस्कॉर्ट्स और सैन्य सम्मान समारोह।
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (फोटो- AP)

इतिहास के गर्भ में छिपा है पाकिस्तान के तख्तापलट का राज

असीम मुनीर को लेकर ये अटकलें कितनी सच हैं, इसका जवाब पाकिस्तान के इतिहास के गर्भ में छिपा हुआ है। पाकिस्तान में तख्तापलट आम रहा है। तीन बार तख्तापलट हो चुका है और तीनों बार सेना की ओर से ही किया गया है।

  • 1958 – जनरल अय्यूब खान: 1948 में राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्जा ने प्रधानमंत्री फिरोज खान नून की सरकार को बर्खास्त कर मार्शल लॉ लागू किया। इसके 13 दिन बाद ही जनरल अय्यूब खान ने मिर्जा को पदच्युत कर खुद राष्ट्रपति पद संभाला। 1969 में अय्यूब खान के इस्तीफे के बाद जनरल याह्या खान ने सत्ता संभाली। उनका शासन 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम और भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय तक चला।
  • 1977 – जनरल जिया उल हक: प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो को सत्ता से हटाकर मार्शल लॉ लागू किया गया। भुट्टो को गिरफ्तार कर बाद में फांसी दी गई।
  • 1999 – जनरल परवेज मुशर्रफ: प्रधानमंत्री नवाज शरीफ द्वारा उन्हें पद से हटाने के प्रयास के बाद, मुशर्रफ ने सैन्य तख्तापलट कर सत्ता पर कब्जा किया।

राजनीतिक अस्थिरता चरम पर

2024 के आम चुनावों के बाद पाकिस्तान में स्थिति और भी अस्थिर हो गई है। इमरान खान की गिरफ्तारी, उनके पार्टी कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई और विवादित चुनावी नतीजों ने सरकार की वैधता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्तमान प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ की सरकार पर “आर्मी बैक्ड” होने के आरोप पहले दिन से लगते रहे हैं। विपक्षी दलों – खासकर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) – का दावा है कि सरकार पूरी तरह असंवैधानिक तरीके से सत्ता में आई है और सैन्य प्रतिष्ठान इसकी डोरियां खींच रहा है। दावा किया जाता रहा है कि पाकिस्तान आर्मी ने सीधे सत्ता में आने के बजाय "हाइब्रिड मॉडल" अपनाया, जिसमें सेना बैकस्टेज से नियंत्रण करती है, जबकि एक चुनी हुई सरकार प्रतीकात्मक रूप से काम करती है। अगर हालात और ज्यादा बिगड़ते हैं – जैसे कि आर्थिक हालात पूरी तरह चरमरा जाएं, या इमरान खान को रिहा कर दिया जाए और वह फिर से सड़कों पर जनता को लामबंद करें – तो सेना मजबूरन फ्रंट पर आ सकती है।

पाक में ताजा घटनाक्रम

पाकिस्तान में असीम मुनीर और सेना दोनों सवालों के घेरे में रहे हैं, विपक्ष के नेता भी उनके बढ़ते कद को लेकर आशंका जताते रहे हैं, लेकिन वर्तमान में भी ऐसा कुछ हुआ है जिससे सेना और सरकार के बीच टकराव बढ़ता दिख रहा है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से तो असीम मुनीर की नाराजगी पुरानी है। नियुक्तियों और शासन की सामान्य दिशा को लेकर। अब इस मामले में एंट्री हुई है, बिलावल भुट्टो जरदारी की। बिलावल भुट्टो, आसिफ अली जरदारी के बेटे हैं और पाकिस्तान सरकार में उनकी पार्टी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी शामिल है, जिसके वो वर्तमान अध्यक्ष हैं। भुट्टो ने हाफिज सईद और मसूद अजहर को भारत को सौंपने की बात कही थी, जिसके बाद से सेना और आतंकियों के सपोर्टर जिहादी समूह नाराज हो गए हैं। असीम मुनीर भी इस मामले पर भुट्टो से नाराज हैं। ऐसे में तख्तापलट की अटकलें को और हवा मिल रही है।

तख्तापलट से सेना को भी हो सकता है नुकसान

पहली बार ऐसा हो रहा है कि पाकिस्तान की सेना की छवि में आम लोगों के बीच गिरावट आई है। यह सेना के लिए एक बड़ा झटका है। इससे सैन्य प्रतिष्ठान भी सोच-समझकर ही कोई बड़ा कदम उठाना चाहेगा। पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार घट रहा है। IMF की शर्तों पर लिए गए बेलआउट पैकेज से जनता पर बोझ बढ़ा है। महंगाई और बेरोज़गारी चरम पर है। ऐसे हालातों में सेना यदि सत्ता पर काबिज होती है, तो उसे आर्थिक मोर्चे पर भी जवाबदेह होना पड़ेगा – जिसे सेना परंपरागत रूप से टालती आई है।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमारauthor

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय और क्राइम रिपोर्टिंग में गहरी रुचि और मजबूत पकड़ के साथ वे समाचारों की बारीकियों को समझने और उन्हें प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। शिशुपाल ने अपने करियर की शुरुआत एक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट के रूप में की, जहां उन्होंने प्रोडक्शन से लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग तक पत्रकारिता के कई महत्वपूर्ण पहलुओं में काम किया। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क दोनों स्तरों पर उनकी दक्षता है। अब तक शिशुपाल कुमार 15,000 से अधिक खबरें प्रकाशित कर चुके हैं। वह ब्रेकिंग न्यूज, रियल-टाइम कवरेज, डेटा-आधारित विश्लेषण और एक्सप्लेनर लिखने में खास महारत रखते हैं। उनकी स्टोरीज तथ्यों की सटीकता और सहज भाषा की वजह से पाठकों पर मजबूत प्रभाव छोड़ती हैं।

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