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संभल में फिलहाल कैसे हैं हालात? सपा सांसदों को पुलिस ने रोका, यूपी-दिल्ली बॉर्डर के पास लगा जाम; 10 पॉइंट में समझें सबकुछ

Sambhal Updates: क्या आप जानते हैं हिंसा के बाद इस वक्त उत्तर प्रदेश के संभल में कैसे हालात हैं? संभल में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक 10 दिसंबर तक बढ़ा दी गई है। वहीं पुल‍िस ने सपा सांसदों को संभल जाने से रोक दिया, जिसके बाद यूपी-दिल्ली बॉर्डर के पास भारी जाम लग गया। आपको 10 पॉइंट में सबकुछ समझाते हैं।

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पुलिस ने संभल जाने से सपा सांसदों को रोका।

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के संभल में फिलहाल कैसे हालात है? बीते 24 नवंबर को यूपी के संभल में हुई हिंसा के बाद यहां शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन द्वारा बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर लगाई गई रोक को 10 दिसंबर तक बढ़ा दिया गया है। साथ ही दिल्ली से संभल जा रहे सपा सांसदों के एक डेलिगेशन को यूपी पुलिस ने यूपी-दिल्ली बॉर्डर के पास रोक लिया। इसकी वजह से कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। आपको इस पूरे विवाद से जुड़ा ताजा अपडेट 10 पॉइंट में समझाते हैं।

सपा सांसदों को संभल जाने से पुलिस ने रोका

मुजफ्फरनगर से समाजवादी पार्टी के सांसद और सपा प्रतिनिधिमंडल में शामिल हरेंद्र मलिक को यूपी गेट पर रोका गया। दिल्ली से संभल जाते हुए मुजफ्फरनगर के सांसद हरेंद्र मलिक को दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे पर गाजीपुर बॉर्डर पर रोक लिया गया। इसकी वजह से लंबा जाम देखने को मिला। इसके साथ साथ दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर पर संभल के सांसद जिया उर रहमान वर्क और रामपुर के सांसद मोहिबुल्ला नदवी को भी रोका गया है।

दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर पर लगा भारी जाम

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर बड़ी संख्या पर पुल‍िस तैनात थी और जैसे ही सपा सांसद वहां पहुंचे, उनकी गाड़ियों को रोक द‍िया गया। पुलिस ने एक-एक गाड़ी को चेक कर आगे जाने की अनुमति दी। इसके चलते पीछे कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। पुलिसकर्मियों ने मुजफ्फरनगर के सपा सांसद हरेंद्र मलिक से कहा क‍ि उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं है। एसीपी के आने पर ही पोजीशन क्लियर हो पाएगी।

सत्ताधारी पार्टी पर मनमानी का लगाया आरोप

इस मौके पर सांसद हरेंद्र मलिक ने कहा कि यह सत्ताधारी पार्टी की मनमानी है। इसके चलते उन्‍हें आगे जाने से रोका जा रहा है। कोई भी व्यक्ति कहीं भी जा सकता है। उन्होंने कहा कि वह संभल जरूर जाएंगे और अगर पुलिस ने उन्हें रोका, तो कानून के दायरे में वह अगला कदम उठाएंगे। फिलहाल सांसदों को काफी देर रूकने के बाद दिल्ली वापस लौटना पड़ा है। उन्होंने कहा है कि वह इस मुद्दे को सोमवार को संसद में जरूर उठाएंगे। उनके रोके जाने के दौरान कई किलोमीटर का जाम लगा रहा।

बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर 10 दिसंबर तक रोक

संभल में 24 नवंबर को हुई हिंसा के बाद यहां शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन द्वारा बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर लगाई गई रोक को 10 दिसंबर तक बढ़ा दिया है। जिला प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा की अवधि भी एक दिसंबर से बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दी है। जिला मजिस्ट्रेट राजेंद्र पेसीया ने यहां जारी एक बयान में कहा, "कोई भी बाहरी व्यक्ति, कोई सामाजिक संगठन या जनप्रतिनिधि जनपद की सीमा में सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना 10 दिसंबर तक प्रवेश नहीं करेगा।"

सोशल मीडिया के लिए जारी हुए जरूरी आदेश

जिला मजिस्ट्रेट ने आदेश में कहा, “कोई भी व्यक्ति यदि सोशल मीडिया पर किसी समूह में अफवाह फैलाने का प्रयास करता है तो ‘ग्रुप एडमिन’ उक्त पोस्ट हटाकर तत्काल इसकी सूचना पुलिस को देगा। जिले में साइबर कैफे एक रजिस्टर रखेंगे जिसमें प्रत्येक ग्राहक के नाम लिखे जाएंगे। संभल में कोई भी सार्वजनिक स्थल पर पुतला नहीं फूंकेगा।’’

सांसद ने पूछा- हमें क्यों रोका जा रहा?

यह कदम इस लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि समाजवादी पार्टी (सपा) का एक प्रतिनिधिमंडल हिंसा के बारे में जानकारी एकत्र करने के लिए शनिवार को संभल का दौरा करने वाला था। मुजफ्फरनगर से सपा के सांसद हरेन्द्र मलिक को गाजियाबाद से संभल आने से रोक दिया गया। मलिक ने कहा, ‘‘मेरी समझ में यह नहीं आता कि हमें क्यों रोका जा रहा है। क्या विपक्ष के नेता, सांसद इतने गैर जिम्मेदार हैं कि उन्हें राज्य के भीतर घूमने नहीं दिया जा सकता।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारे प्रतिनिधिमंडल में संभल से सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और कैराना से इकरा हसन भी शामिल हैं। हम क्या कर सकते हैं। यह सरकार एक निरंकुश शासक की तरह काम कर रही है।’’ वहीं, मुरादाबाद से सपा सांसद रुचि वीरा के आवास की पुलिस ने घेराबंदी कर दी है।

अखिलेश यादव ने सरकार पर लगाया आरोप

इस बीच, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, “प्रतिबंध लगाना भाजपा सरकार के शासन, प्रशासन और सरकारी प्रबंधन की नाकामी है। अगर सरकार ऐसा प्रतिबंध उन लोगों पर पहले ही लगा देती जिन्होंने दंगा-फसाद करवाने का सपना देखा और उन्मादी नारे लगवाए तो संभल में सौहार्द एवं शांति का माहौल नहीं बिगड़ता।” अखिलेश ने कहा, “भाजपा जैसे पूरी की पूरी कैबिनेट एक साथ बदल देती है, वैसे ही उसे संभल में ऊपर से लेकर नीचे तक का पूरा प्रशासन मंडल निलंबित करके उन पर साजिशन लापरवाही का आरोप लगाते हुए सच्ची कार्रवाई करके बर्खास्त भी करना चाहिए और किसी की जान लेने का मुकदमा भी चलना चाहिए।”

'संभल हिंसा का सच छिपा रही है भाजपा सरकार'

समाजवादी पार्टी ने एक बयान जारी कर कहा, ‘‘संभल में हुई हिंसा की जांच के लिए बनाए गए सपा प्रतिनिधिमंडल में शामिल नेताओं के घरों पर सरकार द्वारा पुलिस तैनात कर उन्हें संभल जाने से रोकने की घटना घोर निंदनीय एवं अलोकतांत्रिक है। भाजपा सरकार संभल हिंसा का सच छिपा रही है। सपा प्रतिनिधिमंडल को संभल जाने की अनुमति मिले।’’ सपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने शुक्रवार को कहा था कि विधानसभा में विपक्ष के नेता माता प्रसाद पांडेय की नेतृत्व में पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के निर्देश पर शनिवार को संभल जाएगा और वहां हुई हिंसा की विस्तृत जानकारी लेकर रिपोर्ट पार्टी प्रमुख को सौंपेगा।

दो दिसंबर को जाएगा कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल

कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय ने को बताया कि संभल मामले की जानकारी हासिल करने के लिए कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल दो दिसंबर को वहां जाएगा। इस बीच, माता प्रसाद पांडेय ने लखनऊ में अपने आवास के बाहर संवाददाताओं से कहा, ‘‘गृह सचिव संजय प्रसाद ने मुझे फोन कर संभल नहीं जाने का अनुरोध किया था। संभल के जिला मजिस्ट्रेट ने भी मुझे फोन कर बताया कि जिले में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक 10 दिसंबर तक के लिए बढ़ा दी गई है इसलिए मैं अब पार्टी कार्यालय जाऊंगा और इस मुद्दे पर चर्चा करूंगा।’’ पांडेय ने कहा, ‘‘यह सरकार संभल में शायद अपनी गलतियों को छिपाने के लिए मुझे रोकना चाहती है क्योंकि हमारे दौरे से कई गलतियां सामने आ जाएंगी।’’ पांडेय के आवास के बाहर शुक्रवार रात से ही भारी सुरक्षा लगाई गई है।

सर्वेक्षण के बाद से ही बनी तनाव की स्थिति

संभल में अदालत के आदेश पर 19 नवंबर को जामा मस्जिद के पहली बार किए गये सर्वेक्षण के बाद से ही तनाव की स्थिति पैदा हो गई। अदालत ने यह आदेश जिस याचिका पर दिया उसमें दावा किया गया है कि जिस जगह पर जामा मस्जिद है वहां पहले कभी हरिहर मंदिर था। इसके बाद 24 नवंबर को मस्जिद का दोबारा सर्वेक्षण किये जाने के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प में चार लोगों की मौत हो गयी थी तथा 25 अन्य घायल हो गये थे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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