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चीन-पाक की गोद में बैठे यूनुस को भारत कैसे सिखा रहा सबक, ये तो अभी झांकी है, नहीं सुधरे तो और भुगतेगा बांग्लादेश

भारत, बांग्लादेश का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच 8 बिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापार होता है। ढाका अपने विकास और जीविका के लिए काफी हद तक विदेशी फंड पर निर्भर है।

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यूनुस के कारनामे बांग्लादेश को पड़ेंगे भारी

India-Bangladesh Relations: भारत के खिलाफ लगातार जहर उगल रहे बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के कार्यवाहक सलाहकार मो. यूनुस की गलतियों का खामियाजा अब देश भुगतने लगा है। लगातार नरमी बरत रहे भारत ने बांग्लादेश पर पहला बड़ा एक्शन लिया है। भारत ने बांग्लादेश को नेपाल और भूटान को छोड़कर मध्य पूर्व, यूरोप और कई देशों में सामान के निर्यात के लिए दी गई ट्रांस-शिपमेंट सुविधा को वापस ले लिया है। यह कदम मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के बढ़ते भारत विरोधी रुख के मद्देनजर उठाया गया है। इस फैसले से बांग्लादेश का नुकसान तय है।

भारत की पहली बड़ी कार्रवाई

हालांकि, विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर दिक्कतें पैदा होने के चलते ढाका को दी गई सुविधा वापस ले ली गई है। लेकिन इस कदम को मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के बढ़ते भारत विरोधी रुख के खिलाफ भारत की पहली जवाबी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। हाल ही में चीन की अपनी चार दिन की यात्रा के दौरान यूनुस ने भारत के पूर्वोत्तर पर टिप्पणी करके मुसीबत मोल ले ली। यूनुस ने पूर्वोत्तर को चारों तरफ जमीन से घिरा हुआ इलाका बताते हुए कहा कि ये जगह समुद्र तक पहुंच के लिए ढाका पर निर्भर है।

यूनुस ने किया भारत को नाराज

यूनुस की इस टिप्पणी ने भारत को नाराज कर दिया। यूनुस के इस बयान के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने बयान से साफ कर दिया कि बांग्लादेश कितने गहरे पानी में है। जयशंकर ने कहा, भारत न सिर्फ पांच बिम्सटेक सदस्यों के साथ सीमा साझा करता है, बल्कि उनमें से अधिकांश को जोड़ता है, बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप और आसियान के बीच बहुत कुछ इंटरफेस भी प्रदान करता है। हमारा पूर्वोत्तर क्षेत्र विशेष रूप से बिम्सटेक के लिए कनेक्टिविटी हब के रूप में उभर रहा है, जिसमें सड़कों, रेलवे, जलमार्गों, ग्रिड और पाइपलाइनों का असंख्य नेटवर्क है। यूनुस के लिए इशारा काफी था कि पूर्वोत्तर को लेकर भारत का क्या नजरिया है और वह इसे कितना महत्व देता है।

बांग्लादेश का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार

भारत, बांग्लादेश का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच 8 बिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापार होता है। ढाका अपने विकास और जीविका के लिए काफी हद तक विदेशी फंड पर निर्भर है। हालांकि, भारत विरोधी भावना बढ़ने के बीच सीमा बंद होने, सीमा शुल्क निकासी के मुद्दों और सुरक्षा निगरानी में बढ़ोतरी के कारण दोनों देशों के बीच माल की आवाजही प्रभावित होने कारण व्यापार में गिरावट आई है।

भारत के कदम से बांग्लादेश को नुकसान

इसके अलावा, दोनों देशों के बीच संपर्क बढ़ाने के उद्देश्य से कई परियोजनाओं को भी रोक दिया गया है। पिछले जून से सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट निलंबित है। इससे न सिर्फ सीमा पार माल भेजने वाले व्यापारियों को नुकसान हुआ है, बल्कि भारत में मेडिकल इलाज की तलाश कर रहे बांग्लादेशियों के लिए भी चुनौतियां पैदा हुई हैं। यूनुस के लगातार उकसावे के बावजूद भारत लगातार संयम बरतता रहा है। ट्रांसपोर्ट में दिक्कतों का हवाला देकर पहली बार भारत ने यूनुस को सख्त संदेश दिया है। अगर यूनुस अब नहीं सुधरे तो भारत आगे इससे भी सख्त कदम उठा सकता है। इससे भारत पर बिल्कुल असर नहीं पड़ेगा, लेकिन बांग्लादेश के सामने दिक्कतों का पहाड़ खड़ा हो जाएगा।

भारत-बांग्लादेश संबंध और पाकिस्तान का खेल

यूनुस ने सार्वजनिक रूप से कई बार कहा है कि भारत के साथ बुनियादी संबंधों में कोई समस्या नहीं है। लेकिन उनकी सरकार ने बार-बार ढाका में घरेलू अराजकता के लिए भारत को दोषी ठहराया है ताकि जिम्मेदारी को दूसरे पर डाला जा सके। इसके साथ ही शेख हसीना को लेकर भी यूनुस और बांग्लादेश सरकार ने भारत पर दबाव डालने की रणनीति अपनाई है। यूनुस अब तेजी से पाकिस्तान के करीब होते जा रहे हैं। पाकिस्तान के साथ ढाका की नई दोस्ती भारत के लिए न सिर्फ हैरान करने वाली बात है बल्कि इसने नई दिल्ली को सावधान भी कर दिया है।

भक्षक के साथ जा मिला बांग्लादेश

ढाका ऐसे देश के करीब जा रहा है जिसके साथ भारत ने बांग्लादेश को आजाद कराने के लिए 1971 में युद्ध लड़ा था। अपने सैनिक गंवाए थे और दुनियाभर का दबाव झेला था। अब दोनों देश भारत विरोधी भावनाओं के साथ अपने संबंधों को फिर से बहाल कर रहे हैं। पाकिस्तान की सेना अब दोनों देशों को 'भाई देश' बताती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश पाकिस्तान से जेएफ-17 थंडर लड़ाकू विमान खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहा है, जिसे चीन-पाक ने संयुक्त रूप से विकसित किया है।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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