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एक रनवे, दो सिस्टम: क्या है पुणे एयरपोर्ट का डुअल-यूज मॉडल, यहां जानिए सबकुछ

Dual Use Airport: पुणे एयरपोर्ट पर Su-30MKI की हार्ड लैंडिंग के कारण रनवे करीब 9 घंटे बंद रहा, जिससे 30 से ज्यादा उड़ानें प्रभावित हुईं। यह घटना दिखाती है कि डुअल-यूज एयरपोर्ट्स पर मिलिट्री ऑपरेशन का असर सिविल फ्लाइट्स पर भी पड़ता है।

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Su-30MKI की हार्ड लैंडिंग, कैसे रुका पूरा एयर ट्रैफिक? (Photo: AI Generated)

Dual Use Airport: पुणे के पुणे एयरपोर्ट पर 17 अप्रैल 2026 की रात एक ऐसी घटना हुई, जिसने यह दिखा दिया कि मिलिट्री और सिविल ऑपरेशंस एक ही एयरपोर्ट पर चलाने के क्या फायदे और चुनौतियां हो सकती हैं। रात करीब 10:25 बजे Sukhoi Su-30MKI की हार्ड लैंडिंग हुई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, विमान के अंडरकैरिज में तकनीकी खराबी (Su-30MKI landing incident) आ गई थी, जिसकी वजह से वह रनवे के बीच में ही रुक गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि एयरक्रू पूरी तरह सुरक्षित रहे और किसी भी तरह का बड़ा नुकसान नहीं हुआ। लेकिन इस घटना का असर तुरंत सिविल उड़ानों पर पड़ा।

करीब 30 से ज्यादा फ्लाइट्स डायवर्ट या कैंसल

रनवे ब्लॉक होने के कारण कई घंटों तक कोई भी विमान उड़ान नहीं भर सका। करीब 30 से ज्यादा फ्लाइट्स को डायवर्ट या कैंसल करना पड़ा, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। यह घटना इसलिए भी अहम है क्योंकि पुणे एयरपोर्ट एक “डुअल-यूज” एयरपोर्ट है, यानी यहां भारतीय वायु सेना और सिविल एविएशन दोनों एक ही रनवे का इस्तेमाल करते हैं।

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(Photo: iStock)

आम यात्रियों पर पड़ा सीधा असर

ऐसे एयरपोर्ट्स पर अगर मिलिट्री ऑपरेशन में कोई तकनीकी समस्या आ जाए, तो उसका सीधा असर आम यात्रियों पर भी पड़ता है। रात में ही बचाव और रिकवरी का काम शुरू कर दिया गया। भारी मशीनों और क्रेन की मदद से विमान को हटाने की कोशिश की गई। पूरी प्रक्रिया में कई घंटे लगे, लेकिन प्रशासन और तकनीकी टीमों ने तेजी से काम किया। आखिरकार, सुबह करीब 7:30 से 8:00 बजे के बीच रनवे को फिर से चालू कर दिया गया और उड़ानें धीरे-धीरे सामान्य होने लगीं।

आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली मजबूत

यह घटना एक बड़ा सवाल भी उठाती है, क्या भारत में डुअल-यूज एयरपोर्ट्स के लिए अलग से बेहतर मैनेजमेंट सिस्टम की जरूरत है? देश में कई ऐसे एयरपोर्ट हैं जहां सेना और सिविल उड़ानें एक ही रनवे साझा करते हैं। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति का असर सीधे आम यात्रियों पर पड़ता है।

हालांकि, इस मामले में अच्छी बात यह रही कि रिकवरी बहुत तेजी से हुई और कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। इससे यह भी साबित होता है कि हमारी आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली मजबूत है।

Airport runway closure

(Photo: iStock)

फिर भी, भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने और यात्रियों की परेशानी कम करने के लिए बेहतर योजना और इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत महसूस होती है। इस घटना के बाद एयरपोर्ट अथॉरिटी और एयरफोर्स के बीच कोऑर्डिनेशन को और मजबूत करने पर भी चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि रनवे ब्लॉकेज के दौरान वैकल्पिक लैंडिंग प्लान और रैपिड डायवर्जन सिस्टम को और प्रभावी बनाया जाना चाहिए, ताकि यात्रियों को कम से कम असुविधा हो और एयर ट्रैफिक पर असर सीमित रहे।

जरूरी बातें:

  • पुणे एयरपोर्ट पर 17 अप्रैल 2026 की रात Sukhoi Su-30MKI की हार्ड लैंडिंग हुई।
  • विमान के अंडरकैरिज में तकनीकी खराबी के कारण वह रनवे पर बीच में रुक गया।
  • हादसे में एयरक्रू पूरी तरह सुरक्षित रहे और कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।
  • रनवे ब्लॉक होने से 30 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसल या डायवर्ट करनी पड़ीं।
  • पुणे एयरपोर्ट “डुअल-यूज” है, जहां सेना और सिविल उड़ानें एक ही रनवे साझा करती हैं।
  • रातभर क्रेन और भारी मशीनों की मदद से विमान हटाने का काम चला।
  • सुबह करीब 7:30–8:00 बजे तक रनवे फिर से चालू कर दिया गया और उड़ानें सामान्य हुईं।
monu jha
मोनू झा author

मोनू कुमार टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में वायरल और ट्रेंडिंग डेस्क पर काम कर रहे हैं। न्यूजरूम में 4 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले मोनू वायरल कं... और देखें

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