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पाकिस्तान में आसिम मुनीर और मोहसिन नकवी का 'पावर गेम', क्या खतरे में है PM शहबाज शरीफ की कुर्सी?

मोहसिन नकवी, जो वर्तमान में पाकिस्तान के गृह मंत्री के साथ-साथ 'पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड' (PCB) के अध्यक्ष भी हैं, उन्हें सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर का बेहद करीबी और भरोसेमंद माना जाता है।

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आसिम मुनीर और मोहसिन नकवी (AI Image)
Written by: Amit Mandal
Updated Aug 6, 2026, 14:54 IST
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पाकिस्तान के सियासी गलियारों में एक बार फिर तख्तापलट और अंदरूनी खींचतान की आहट तेज हो गई है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अगुवाई वाली सरकार और सेना के बीच सत्ता को लेकर नया विवाद गहराता नजर आ रहा है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी और सेना प्रमुख (COAS) जनरल आसिम मुनीर की बढ़ती नजदीकी है, जिसने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की राजनीतिक स्थिति पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। कुल मिलाकर पाकिस्तान की राजनीति के इस नए 'पावर गेम' और पीएम की कुर्सी पर मंडराते खतरे के बीच कई अहम सवाल उठ रहे हैं। विस्तार से समझते हैं क्या है ये पूरा मामला।

गृह मंत्री बनाम प्रधानमंत्री: नकवी का बढ़ता कद

मोहसिन नकवी, जो वर्तमान में पाकिस्तान के गृह मंत्री के साथ-साथ 'पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड' (PCB) के अध्यक्ष भी हैं, उन्हें सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर का बेहद करीबी और भरोसेमंद माना जाता है। पाकिस्तान में आम चर्चा है कि नकवी को कैबिनेट में प्रधानमंत्री शरीफ से भी ज्यादा स्वायत्तता और प्राथमिकता दी जा रही है। सुरक्षा और प्रशासनिक मामलों में सीधे सेना प्रमुख के संपर्क में रहने के कारण वे बिना किसी रुकावट के स्वतंत्र फैसले ले रहे हैं, जिससे शहबाज शरीफ के अपने ही मंत्रिमंडल पर नियंत्रण पर सवाल उठ रहे हैं।

क्या शहबाज शरीफ 'नाममात्र' के प्रधानमंत्री हैं?

विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान में 'डीप स्टेट' (सेना और खुफिया एजेंसी ISI) का दबदबा एक बार फिर चरम पर है। आंतरिक सुरक्षा, बलूचिस्तान व खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवादी गतिविधियों से निपटने और राजनीतिक निर्णयों में शहबाज शरीफ को नजरअंदाज कर सीधे नकवी और जनरल मुनीर के बीच समन्वय बन रहा है। शहबाज शरीफ कमजोर गठबंधन सरकार चला रहे हैं। अगर सेना का समर्थन उनके हाथ से फिसलता है, तो उनकी सरकार ताश के पत्तों की तरह ढह सकती है। शहबाज इसे बखूबी समझते हैं और हालात के मुताबिक ही अपनी चाल चल रहे हैं। लेकिन वह साफ तौर पर एक कमजोर प्रधानमंत्री नजर आते हैं। आसिम मुनीर का दबाव उन पर और सरकार दोनों पर साफ दिखता है।

क्या मोहसिन नकवी बन सकते हैं अगले पीएम?

पाकिस्तान के राजनीतिक हलकों में यह सुगबुगाहट तेज है कि अगर शहबाज शरीफ देश की चरमराती अर्थव्यवस्था, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के विरोध-प्रदर्शनों और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में नाकाम रहते हैं, तो सेना तकनीकी यानू टेक्नोक्रेट सरकार का विकल्प चुन सकती है। पंजाब के कार्यवाहक मुख्यमंत्री रह चुके मोहसिन नकवी को सेना एक ऐसे चेहरे के रूप में देख रही है जो राजनीति और प्रशासन दोनों को नियंत्रित कर सकते हैं। जनरल आसिम मुनीर और नकवी का यह 'पावर गेम' सीधे तौर पर शहबाज शरीफ और उनकी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) को दरकिनार करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

आसिम मुनीर की 'सुपर-अथॉरिटी' और पीएम की कुर्सी पर खतरा

जनरल आसिम मुनीर ने 'स्पेशल इन्वेस्टमेंट फैसिलिटेशन काउंसिल' (SIFC) जैसे मंचों के जरिए देश के आर्थिक और कूटनीतिक फैसलों में सीधी भागीदारी हासिल कर ली है। जब भी सेना प्रमुख अपनी समानांतर सत्ता खड़ी करते हैं, तो पाकिस्तान के इतिहास के अनुसार तत्कालीन प्रधानमंत्री की कुर्सी खतरे में पड़ जाती है। शहबाज शरीफ के सामने इस समय दोहरी चुनौती है। एक तरफ इमरान खान की पीटीआई का सड़क पर दबाव और दूसरी तरफ अपनी ही सरकार के भीतर आसिम मुनीर और मोहसिन नकवी की जोड़ी का बढ़ता दबदबा।

आसिम मुनीर-नकवी के पारिवारिक संबंध

मीडिया रिपोर्ट्स और चर्चाओं के अनुसार, मोहसिन नकवी को सेना प्रमुख (COAS) आसिम मुनीर का करीबी रिश्तेदार (साला या पत्नी का चचेरा भाई) बताया जाता है। नकवी को आसिम मुनीर का सबसे भरोसेमंद 'फ्रंट मैन' और मोहरा माना जाता है। मुनीर के सेना प्रमुख बनने के बाद ही मोहसिन नकवी का राजनीतिक कद तेजी से बढ़ा है और उन्हें कई अहम पद (जैसे पंजाब का केयरटेकर सीएम, गृह मंत्री और पीसीबी चेयरमैन) मिले हैं। नकवी की धमक इतनी है कि भले ही वह पाकिस्तान के गृह मंत्री हों, लेकिन ईरान से लेकर तुर्की के दौरे खूब करते हैं। अमेरिका से युद्ध और तनाव के बीच नकवी आसिम मुनीर के दूत बनकर इन देशों जमकर अपनी मेहमाननवाजी करवाते हैं।

सत्ता की चाबी आज भी रावलपिंडी हेडक्वार्टर के पास

पाकिस्तान में यह नया 'पावर गेम' स्पष्ट संकेत दे रहा है कि असली सत्ता की चाबी आज भी रावलपिंडी (सैन्य मुख्यालय) के पास है। मोहसिन नकवी का लगातार मजबूत होता कद यह दर्शाता है कि शहबाज शरीफ की पीएम पद की कुर्सी केवल सेना की बैसाखियों पर टिकी है, और सेना के इशारे पर किसी भी वक्त इस्लामाबाद का राजनीतिक समीकरण बदल सकता है। पाकिस्तान एक नहीं तीन मोर्चे पर फंसा हुआ है और सरकार के साथ सेना भी बुरी तरह से उलझी हुई है। पीओके, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में विद्रोह के हालात हैं। सरकार बेबस दिख रही है और सेना जुल्म-हत्याओं पर उतर आई है। ऐसे में मौजूदा हालात के बहाने अगर शहबाज को हटाकर नकवी को पीएम बना दिया जाए, तो किसी को हैरत नहीं होगी।

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