गुजरात सीमा से लगे संवेदनशील सर क्रीक (Sir Creek) क्षेत्र में पाकिस्तान द्वारा नौसैन्य और सैन्य क्षमता में तेजी से विस्तार करने की रिपोर्ट सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान की नौसेना ने इस दलदली समुद्री इलाके में नए ड्रोन, होवरक्राफ्ट और नौसेना के स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG) कमांडो की तैनाती शुरू की है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि पाकिस्तान के इस सैन्य आधुनिकरण को चीन और तुर्की से सीधा तकनीकी व रक्षा सहयोग मिल रहा है। भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और तटीय रक्षा के लिहाज से सर क्रीक में पाकिस्तान की यह नापाक हलचल एक गंभीर चुनौती पेश करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस कदम से भारत के लिए कई बड़े खतरे पैदा हो गए हैं।
सैन्य ढांचे का विस्तार कर रहा पाकिस्तान
खबरों के मुताबिक, पाकिस्तान सर क्रीक के पास अपने नौसैनिक और सैन्य ढांचे का विस्तार कर रहा है, जिससे भारत-पाकिस्तान समुद्री सीमा पर सुरक्षा जोखिम बढ़ रहे हैं। पाकिस्तान का यह सैन्य विस्तार "अबाबील - द डिवाइन स्ट्राइक" नामक एक नए प्रोजेक्ट का हिस्सा है। सीएनएन-न्यूज18 के मुताबिक, पाकिस्तानी नौसेना ने अबाबील परियोजना के तहत सर क्रीक में अपने नौसेना विशेष सेवा समूह (SSG-N) के कमांडो तैनात किए हैं। गौरतलब है कि एसएसजी-एन एक समुद्री विशेष अभियान बल है जो समुद्र, वायु और भूमि पर उच्च जोखिम वाले मिशनों को अंजाम देने के लिए प्रशिक्षित होता है।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान आधुनिक रॉकेट और वायु रक्षा प्रणालियों के साथ-साथ तुर्की ड्रोन, आधुनिक चीनी होवरक्राफ्ट और उच्च गति वाली नौसैनिक नौकाएं तैनात कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक तुर्की ड्रोन विस्फोटक सामग्री ले जाने में सक्षम हैं और इनका उपयोग निगरानी के लिए भी किया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, अबाबील प्रोजेक्ट में एक एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम शामिल है जो सर क्रीक क्षेत्र और अरब सागर में पाकिस्तानी सेना के नवस्थापित रॉकेट बल के समन्वय से कार्य करेगी। इस सिस्टम का उद्देश्य बाहरी खतरों को नियंत्रित करना है।
कच्छ और गुजरात के तटीय क्षेत्र में घुसपैठ का बढ़ा खतरा
सर क्रीक का इलाका बेहद जटिल, दलदली और खाड़ियों (creeks) से भरा हुआ है। पारंपरिक नौकाओं का यहाँ चलना काफी कठिन होता है। पाकिस्तान द्वारा नए होवरक्राफ्ट की तैनाती से उनकी सेना दलदल और पानी दोनों पर बहुत तेज गति से आवाजाही कर सकेगी। इससे गुजरात के कच्छ क्षेत्र में गुप्त घुसपैठ, आतंकवादियों को भारतीय सीमा में दाखिल कराने और मादक पदार्थों व हथियारों की तस्करी का जोखिम कई गुना बढ़ गया है।
पाकिस्तान-चीन-तुर्की का 'त्रिकोण गठजोड़'
सर क्रीक में पाकिस्तान को चीन और तुर्की द्वारा उन्नत सैन्य ड्रोन, निगरानी प्रणालियां और होवरक्राफ्ट मुहैया कराए जा रहे हैं। चीन का मकसद अरब सागर और हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी बढ़ाना और भारत को उसके पश्चिमी तट पर उलझाकर रखना है। इसमें तुर्की भी सहयोग दे रहा है। तुर्की के आधुनिक ड्रोन (जैसे सोनगार और असिसगार्ड) और निगरानी तकनीक का इस्तेमाल कर पाकिस्तान भारत की सीमाई चौकियों पर कड़ी नजर रखने की कोशिश कर रहा है।
अहम ठिकानों पर हवाई व समुद्री हमले का जोखिम
गुजरात का तटीय क्षेत्र भारत का बहुत बड़ा आर्थिक केंद्र है। यहां देश की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरियां (जैसे जामनगर), कांडला और मुंद्रा जैसे प्रमुख बंदरगाह, और महत्वपूर्ण सैन्य प्रतिष्ठान स्थित हैं। सर क्रीक के पास पाकिस्तानी ड्रोन और नौसैन्य कमांडो की मौजूदगी से इन अति-संवेदनशील औद्योगिक व ऊर्जा परिसंपत्तियों पर अचानक हवाई या समुद्री हमले का खतरा बना रहता है।
26/11 जैसी समुद्री आतंकी साजिश की आशंका
पाकिस्तानी नौसेना द्वारा 'अबाबील' (Ababeel) प्रोजेक्ट के तहत एसएसजी (SSG) नेवी कमांडो को जल, थल और नभ तीनों मोर्चों पर काम करने के लिए तैनात किया जा रहा है। अतीत में 2008 के मुंबई आतंकी हमले (26/11) के दौरान भी आतंकवादियों ने समुद्री मार्ग का इस्तेमाल किया था। सर क्रीक के मुहाने पर कमांडो और तेज गति वाली नौकाओं की मौजूदगी से भारत के पश्चिमी समुद्री तट पर किसी बड़ी आतंकी साजिश का अंदेशा बढ़ जाता है।
पाकिस्तानी चाल..भारत की तैयारी और जवाब
सर क्रीक भारत और पाकिस्तान के बीच आजादी के समय से ही एक अनसुलझा सीमा विवादित क्षेत्र रहा है। पाकिस्तान यहां भारी सैन्य उपकरण और ड्रोन तैनात करके यथास्थिति को बदलने की कोशिश कर रहा है, ताकि विवादित समुद्री सीमा पर अपना पलड़ा भारी कर सके। भारतीय रक्षा बल (भारतीय नौसेना, तटरक्षक बल (Coast Guard) और BSF का क्रीक क्रोकोडाइल कमान्डो दस्ता) सर क्रीक इलाके में पूरी तरह सतर्क हैं। भारत ने इस क्षेत्र में एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली, रडार स्टेशन और फास्ट इंटरसेप्टर बोट्स तैनात की हैं, ताकि पाकिस्तान की किसी भी दुस्साहस का करारा जवाब दिया जा सके।