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केजरीवाल का 'खेल' बिगाड़ सकता है कांग्रेस का लोकसभा जैसा प्रदर्शन, आक्रामक प्रचार से AAP को होगा सीधा नुकसान

Delhi Assembly Election 2025 : शीला दीक्षित के समय जब कांग्रेस दिल्ली की सत्ता में थी तो उसका वोट प्रतिशत करीब 40 फीसद था। इसके बाद दिल्ली में हुए सभी विधानसभा चुनाव में उसका वोट प्रतिशत गिरता रहा। आलम यह है कि बीते विधानसभा 2020 के चुनाव में कांग्रेस का वोट प्रतिशत 4.26 प्रतिशत रहा। 2015 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हालत थोड़ी बेहतर थी।

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दिल्ली में विधानसभा की 70 सीटों के लिए पांच फरवरी को होगा मतदान।

Delhi Chunav 2025: कांग्रेस दिल्ली में इस बार पूरे दम खम के साथ चुनाव लड़ रही है। अपने प्रदर्शन में सुधार और अपना पुराना वोट बैंक दोबारा हासिल करने के लिए उसने इस बार एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है। बीते दो विधानसभा चुनावों में चुनावी दंगल से खुद को दूर रखने वाले पार्टी के दिग्गज चेहरे इस बार मैदान में हैं। संदीप दीक्षित, अलका लांबा, रागिनी नायक और देवेंद्र यादव जैसे बड़े चेहरे चुनाव लड़ रहे हैं। इस चुनाव में कांग्रेस आम आदमी पार्टी की कमजोरियों को गिनाकर अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है लेकिन यह काम इतना आसान नहीं है। कांग्रेस का जो वोट बैंक शीला दीक्षित के समय हुआ करता था, वह पूरी तरह से खिसक गया है। यह वोट बैंक आज केजरीवाल के साथ है। फिर भी कांग्रेस इस चुनाव में अगर बीते तीन लोकसभा जैसा प्रदर्शन कर देती है तो इससे AAP के लिए सत्ता में वापसी करना बहुत मुश्किल हो जाएगा।

पिछला लोकसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ा था

बीते लोकसभा चुनाव यानी 2024 की अगर बात करें तो दिल्ली में कांग्रेस और आप ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। चार सीटों पूर्वी दिल्ली, नई दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली सीट पर आप और तीन सीटों चांदनी चौक, उत्तर पूर्व दिल्ली, उत्तर पश्चिमी दिल्ली पर कांग्रेस ने चुनाव लड़ा। दोनों पार्टियां साथ मिलकर भी एक भी सीट नहीं जीत पाईं। भाजपा 54.35 प्रतिशत वोटों के साथ दिल्ली की सभी सात सीटें जीतने में सफल रही, वहीं 43.08 फीसद वोट पाकर भी कांग्रेस और AAP का हाथ खाली रहा। खास बात यह है कि विधानसभा चुनाव में लचर प्रदर्शन करने वाली कांग्रेस का वोट बैंक 18.91 प्रतिशत था जबकि आप को 24.17 फीसद वोट मिले।

2019 में कांग्रेस को मिले थे 18.2 प्रतिशत वोट

इसी तरह 2019 के लोकसभा चुनाव नतीजों को अगर देखें तो इस चुनाव में भी भाजपा, कांग्रेस और आप के बीच मुकाबला हुआ। इस चुनाव में भी भाजपा दिल्ली की सभी सात सीटें जीतने में कामयाब रही। भाजपा को जहां 56.85 फीसद वोट मिले। वहीं, कांग्रेस 22.63 और आप को 18.2 प्रतिशत वोट हासिल हुए। इस चुनाव में कांग्रेस का वोट प्रतिशत AAP से ज्यादा रहा। तो वहीं 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का वोट प्रतिशत 46.40 फीसद, कांग्रेस का 15.10 प्रतिशत और आम आदमी पार्टी का वोट 32.90 फीसद रहा। इस चुनाव में भी सभी सात सीटों पर भगवा पार्टी का कब्जा हुआ।

विधानसभा चुनावों में रहा है लचर प्रदर्शन

यानी दिल्ली के बीते तीन लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का यदि प्रदर्शन देखें तो उसका वोट प्रतिशत 2024 में 18.91, 2019 में 18.2 और 2014 में 15.10 प्रतिशत रहा है। यह बात देखने में आई है कि लोकसभा चुनाव में 15 प्रतिशत से ज्यादा वोट हासिल करने वाली देश की सबसे पुरानी पार्टी का प्रदर्शन विधानसभा चुनावों में बिखर जाता है। 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 8 सीटें जीतने में सफल रही थी और अपना समर्थन देकर दिल्ली में पहली बार आम आदमी पार्टी की सरकार बनवाई। AAP को समर्थन देना, एक्सपर्ट कांग्रेस की ऐतिहासिक गलती मानते हैं। यहीं से कांग्रेस का पतन का दौर शुरू हो गया। आगे केजरीवाल की पार्टी कांग्रेस के वोट बैंक में सेंधमारी कर खुद को मजबूत और उसे कमजोर करती रही।

2013 के साथ कांग्रेस का वोट बैंक था 40 फीसद

इसे इस बात से समझा जा सकता है कि शीला दीक्षित के समय जब कांग्रेस दिल्ली की सत्ता में थी तो उसका वोट प्रतिशत करीब 40 फीसद था। इसके बाद दिल्ली में हुए सभी विधानसभा चुनाव में उसका वोट प्रतिशत गिरता रहा। आलम यह है कि बीते विधानसभा 2020 के चुनाव में कांग्रेस का वोट प्रतिशत 4.26 प्रतिशत रहा। 2015 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हालत थोड़ी बेहतर थी। इस चुनाव में उसे 9.7 प्रतिशत वोट मिला था। हालांकि इन दोनों चुनाव में पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई। दिल्ली में अपना जनाधार यदि बढ़ाना है तो जमीन पर मजबूती के साथ लड़ना होगा, यह बात अब कांग्रेस को समझ में आ गई है। बीते विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के प्रचार, रैलियों और जनसंपर्क में आक्रामकता की जो कमी थी वह इस बार नहीं है। इस बार वह आक्रामक तरीके से चुनाव प्रचार कर रही है। लोगों से मिलकर अपने पुराने कार्यों की याद दिला रही है।

इस बार खत्म हो सकता है सीटों का सूखा

कांग्रेस के लिए अपना पुराना वोट बैंक हासिल करना आसान नहीं है। वह भी तब जब बिजली, पानी और बस यात्रा जैसी मुफ्त की योजनाओं का उसके वोट बैंक का एक बड़ा तबका लाभ ले रहा हो। फिर भी जानकारों का कहना है कि कांग्रेस अगर इस चुनाव में लोकसभा जैसा प्रदर्शन कर देती है तो सत्ता तक पहुंचने की AAP की राह आसान नहीं रह जाएगी। यही नहीं, इस तरह के प्रदर्शन से दिल्ली में सीटों का उसका सूखा खत्म हो सकता है। दो-चार सीटें भी यदि वह जीत जाती है तो उसके लिए यह संजीवनी से कम नहीं होगा। एक्सपर्ट्स भी मान रहे हैं कि आक्रामक और तीखे तेवरों के साथ चुनाव मैदान में कांग्रेस के आने से इस बार का चुनाव काफी दिलचस्प और मुकाबले का हो गया है। इस बार के चुनाव नतीजे चौंका भी सकते हैं।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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