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अमेरिका को ईरान से कितना खतरा, क्या सीधे US तक मिसाइल लॉन्च कर सकती है खामेनेई की सेना? 5 प्वाइंट में समझिए

ईरान के तीन परमाणु ठिकानों स्फहान, फोर्दो और नतांज पर अमेरिका ने बमबारी की है। अमेरिकी बमबारी में इन तीनों केंद्रों को नुकसान पहुंचा है, हालांकि यह धरती के काफी नीचे बना हुआ है, इसलिए नुकसान की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। वहीं ईरान इस हमले के बाद अमेरिका को नुकसान पहुंचाने की बात कह रहा है।

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अमेरिका को ईरान से कितना खतरा

ईरान-इजराइल युद्ध में सीधे अमेरिका घुस चुका है। ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर अमेरिका बमबारी कर उसे बर्बाद करने का दावा कर रहा है। हालांकि ईरान हमले की बात तो स्वीकार कर रहा है, लेकिन नुकसान को सिरे से खारिज कर रहा है। ईरान ने इस हमले के बाद अमेरिका को चेतावनी भी दे दी है। इजराइल पर मिसाइलों की बारिश कर रहा है। इजराइल के कई शहर ईरानी मिसाइलों का निशाना बन चुके हैं। अब सवाल ये है कि क्या ईरान, जिस तरह से इजराइल पर सीधे हमला कर रहा है, वैसा ही हमला वो अमेरिका पर कर सकता है, क्या ईरान की मिसाइलें सीधे अमेरिका तक पहुंच सकती है, क्या ईरान की वायुसेना वहां तक पहुंच सकती है?

1. क्या ईरानी मिसाइलें US तक पहुंच सकती हैं?

नहीं, ईरान की मौजूदा बैलिस्टिक मिसाइलें US की मुख्य भूमि (जैसे न्यूयॉर्क, वाशिंगटन) तक नहीं पहुंच सकतीं। इनका अधिकतम रेंज लगभग 2,500 km है, जो अमेरिका की दूरी (9400 km–12000 km) से बहुत कम है। कुछ विश्लेषकों के अनुसार, जो मिसाइलें 2,500 km तक जाती हैं, वो तकनीकी रूप से पेलोड कम करके 4,000 km तक जा सकती हैं। तब भी ईरान, अमेरिका तक नहीं पहुंच सकता।

2. ईरान के पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल नहीं

इस सवाल का एक लाइन में जवाब है नहीं। ईरान की मिसाइलें पावरफुल तो हैं लेकिन उसकी रेंज अमेरिका तक नहीं है। ईरान के पास

इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल नहीं है। ईरान की मौजूदा बैलिस्टिक मिसाइलें संयुक्त राज्य अमेरिका (US) के मैनलैंड (मुख्य स्थल) तक नहीं पहुंच सकतीं। ईरान की मिसाइलें अधिकतर मध्यम-श्रेणी (MRBM) की सीमा में हैं — लगभग 1,000 – 2,500 km तक असरदार, जो सिर्फ मध्य पूर्व, इजराइल और आसपास की देशों को कवर करती हैं।

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ईरानी मिसाइलें (फाइल फोटो)

3. ईरान की मिसाइलें और उसकी रेंज

  • शहाब‑3, ग़दर‑110, इमाद, सेज्जिल, खैबर (खोर्रमशहर‑4): रेंज लगभग 1,000–2,500 km
  • हज कासिम, फत्ताह-1/2, पावेह, खीबर शेकन, कासिम बस्सिर: अधिकतम रेंज 1,200–1,650 km, मध्य पूर्व क्षेत्र तक असरदार
तरीका कहां-कहां कर सकता है हमला
रॉकेट/मिसाइल हमला बलिस्टिक या क्रूज मिसाइलों से घातक हमले, जैसे 2020 में अल-असद और अर्बिल बेस पर मिसाइल हमला किया गया था।
ड्रोन हमला कम ऊंचाई वाले ड्रोन हमले, जैसे 2024 में इजराइल पर हुआ था।
समुद्री माइन और शिपिंग ब्लॉकेज स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद करना, इससे तेल ट्रांजिट रुकेगा और आर्थिक संकट उत्पन्न होगा।
साइबर ऑपरेशन वित्त और इंफ्रास्ट्रक्चर पर साइबर हमले, जैसे DDoS, डेटा चोरी।
प्रॉक्सी गुटों के हमले हुती विद्रोही, इराकी मिलिशिया, हिजबुल्लाह आदि द्वारा अमेरिका या उससे जुड़ी संपत्तियों पर हमले।

4. फिर भी अमेरिका को चोट पहुंचा सकता है ईरान

ईरान के पास अमेरिकी मुख्य भूमि तक पहुंचने की क्षमता तो नहीं, लेकिन मध्य पूर्व और निकटवर्ती ठिकानों, समुद्री मार्गों और साइबर हमले करने की सभी तरह की क्षमता मौजूद है — मिसाइल, ड्रोन, साइबर या प्रॉक्सी गुटों के जरिए। सबसे ज्यादा खतरा अमेरिका के उन सैन्य ठिकानों को है जो मिडिल ईस्ट में मौजूद में हैं। हालांकि अमेरिका का एयर डिफेंस काफी मजबूत है, इसलिए ईरान का हमला कितना सफल होगा, फिलहाल कहा नहीं जा सकता। ईरान ने पहाड़ी इलाकों में छुपे हुए और मजबूत अंडरग्राउंड मिसाइल बेस बनाए हैं, जिससे अचानक और सटीक मिसाइल हमले संभव हैं।

  • अमेरिकी ठिकाने और एयरबेस
इराक (अल‑असद, अर्बिल), कुवैत, कतर (अल‑उदैद), बहरीन (5वीं बेड़े का मुख्यालय), यूएई, जॉर्डन, ओमान एवं सीरिया में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले के लिए ईरान के पास मिसाइल और ड्रोन हमले की क्षमता है।
  • मरीन और शिपिंग रूट्स
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में अमेरिकी पनडुब्बियां, एयरक्राफ्ट कैरियर्स और तेल टैंकर के ऊपर ड्रोन या मिसाइल हमले ईरान कर सकता है।
  • एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर और ग्लोबल सप्लाई चैन
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद करने से वैश्विक तेल आपूर्ति में व्यवधान उत्पन्न हो सकता है — ऐसा ईरान करने की धमकी दे चुका है।
  • साइबर हमले
ईरानी हैकर्स अमेरिकी सरकारी और वित्तीय संस्थानों को निशाना बना सकते हैं — DDoS, डेटा चोरी या अभियान चलाकर आर्थिक व राजनीतिक असर डाल सकते हैं।
  • प्रॉक्सी गुटों के हमले
इरान समर्थित मिलिशिया (इराक, यमन, सीरिया) अमेरिकी ठिकानों व नागरिकों पर मिसाइल, ड्रोन या आतंकी हमले कर सकते हैं।

5. जंग की तैयारी में ईरान

ईरान के विदेश मंत्रालय ने रविवार को कहा कि अमेरिका ने इस्लामिक गणराज्य में तीन परमाणु ठिकानों पर हमला कर खुद ईरान के खिलाफ एक खतरनाक युद्ध की शुरुआत कर दी है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान को पूरा अधिकार है कि वह अमेरिकी सैन्य हमले और इस दुष्ट शासन द्वारा किए गए अपराधों का पूरी ताकत से मुकाबला करे और अपनी सुरक्षा और देश के हितों की रक्षा करे। इससे पहले ईरान के शीर्ष अधिकारियों में विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस्फहान, फोर्दो और नतांज में किए गए अमेरिकी हमलों पर सबसे पहले प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आज सुबह की घटनाएं बहुत ही भयानक हैं और इनके दूरगामी परिणाम होंगे। संयुक्त राष्ट्र चार्टर और आत्मरक्षा के लिए वैध कदम की अनुमति देने संबंधी इसके प्रावधानों के अनुरूप ईरान के पास अपनी संप्रभुता, हितों और लोगों की रक्षा के लिए सभी विकल्प मौजूद हैं।

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अमेरिका का B2 बॉम्बर

पूरी दुनिया पर असर पड़ना तय

अमेरिका के इस जंग में कूदने से पूरी दुनिया पर असर पड़ना तय है। चाहे वो प्रत्यक्ष हो या अप्रत्यक्ष। संयुक्त राष्ट्र ने इसे लेकर चिंतित दिख रहा है।

संयुक्त राष्ट्र ने इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष पर फिक्र जताई है। महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि हालात बहुत खतरनाक हो गए हैं और अब यह संघर्ष तेजी से नियंत्रण से बाहर जा सकता है। इसका बहुत बुरा असर आम लोगों, पूरे इलाके और दुनिया पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वह आज ईरान के विरुद्ध संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा किए गए बल प्रयोग से बेहद फिक्रमंद हैं और चेतावनी दी कि इस बात का खतरा बढ़ रहा है कि यह संघर्ष तेजी से नियंत्रण से बाहर हो सकता है, जिसके नागरिकों, क्षेत्र और विश्व के लिए विनाशकारी परिणाम होंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि इस संकट की घड़ी में जरूरी है कि हम अराजकता और तबाही के इस सिलसिले को रोकें। इस हालात का कोई सैन्य समाधान नहीं है। आगे बढ़ने का रास्ता सिर्फ बातचीत और शांति है।

Shishupal Kumar
शिशुपाल कुमार author

शिशुपाल कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क में कार्यरत एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 13 वर्षों का अनुभव हासिल है। राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय ... और देखें

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