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कैसे टूटी 'वारिस पंजाब दे' की कमर, आखिर घुटने टेकने को क्यों मजबूर हुआ अमृतपाल, 10 प्वाइंट में समझिए

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 23, 2023, 11:35 AM IST

Amritpal Singh Arrest News: अमृतपाल को गिरफ्तार करना पंजाब पुलिस के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका था। वह लगातार पुलिस के पूरे नेटवर्क को चुनौती दे रहा था। ऐसे में पंजाब पुलिस ने वो तरीके अपनाए, जिससे उसके संगठन वारिस पंजाब दे की कमर ही टूट गई और अमृतपाल सरेंडर को मजबूर हो गया।

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अमृतपाल सिंह गिरफ्तार

Amritpal Singh Arrest News: खालिस्तानी समर्थक और वारिस पंजाब दे का मुखिया अमृतपाल सिंह अब पुलिस की गिरफ्त में है। 36 दिन से फरार चल रहे अमृतपाल ने आखिरकार पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर ही दिया। पुलिस ने उसे मोगा जिले के गुरुद्वारा से हिरासत में लिया। अब उसे असम के डिब्रूगढ़ जेल भेजे जाने की तैयारी है।

अमृतपाल इतना शातिर था कि वह लगातार 36 दिनों से पुलिस के पूरे नेटवर्क को चुनौती दे रहा था। वह लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था, इतना ही नहीं समय-समय पर वीडियो भी जारी कर रहा था। ऐसे में उसे गिरफ्तार करना पंजाब पुलिस के लिए प्रतिष्ठा का भी सवाल बन गया था। ऐसे में पंजाब पुलिस ने अमृतपाल को घुटने पर लाने के लिए वो तरीके अपनाए, जिससे उसके संगठन वारिस पंजाब दे की कमर ही टूट गई। आखिरकार उसे पुलिस के सामने सरेंडर करना ही पड़ा। आगे 10 बिंदुओं में समझिए अमृतपाल के खिलाफ पुलिस के 10 बड़े एक्शन...

केंद्र से मिला समर्थन

अमृतपाल के खिलाफ कोई भी एक्शन लेने से पहले पंजाब को केंद्र का समर्थन मिलना जरूरी था। उधर, केंद्रीय एजेंसियों को पहले से ही अमृतपाल के खिलाफ देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के इनपुट मिले थे। ऐसे में सीएम भगवंत मान और गृहमंत्री शाह के बीच हुई मुलाकात में उन्हें केंद्र के पूरे सहयोग का आश्वासन मिला।

18 मार्च का एक्शन

पंजाब पुलिस ने अमृतपाल के खिलाफ एक्शन की शुरुआत 18 मार्च को की थी। यही उसके उभरते साग्राज्य के खिलाफ पुलिस की पहली कील थी। इसके बाद पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए पूरे पंजाब में छापेमारी की। कई समर्थकों को गिरफ्तार किया गया। हालांकि, अमृतपाल गिरफ्तार हो गया।

बलजीत कौर की गिरफ्तारी

अमृतपाल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने धीरे-धीरे उसके नेटवर्क को तोड़ना शुरू किया। पुलिस ने हरियाणा से बलजीत कौर को गिरफ्तारी किया। जानकारी के मुताबिक, 18 मार्च को फरार होने के बाद अमृतपाल 19 से 21 मार्च तक बलजीत के घर पर ही रुका था।

करीबियों पर एक्शन

अमृतपाल के फरार होने के बाद पुलिस ने पंजाब में उसके पूरे नेटवर्क को तोड़ना शुरू कर दिया। पुलिस ने अमृतपाल के चाचा हरजीत सिंह, उसके सोशल मीडिया मैनेजर भगवंत सिंह और लोकल नेटवर्क खड़ा करने में मदद करने वाले गुरमीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया था।

अमृतपाल पर लगाया गया NSA

पंजाब पुलिस ने अमृतपाल के फरार होने के बाद उसे भगोड़ा तो घोषित किया ही, इसके साथ ही उसके खिलापु NSA जैसी गंभीर धारा भी लगा दी। इससे अमृतपाल की मुश्किलें बढ़ती चली गईं, जिसने अमृतपाल को सरेंडर करने के लिए मजबूर किया।

कई प्रदेशों में ताबड़तोड़ छापेमारी

अमृतपाल की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने कई राज्यों में ताबड़तोड़ छापेमारी की। पुलिस ने उसके हर सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया। इसके साथ ही अमृतपाल के देश छोड़कर फरार होने की सूचना के बीच एयरपोर्टों पर भी चौकसी बढ़ा दी गई।

पप्पलप्रीत की गिरफ्तारी

पंजाब पुलिस ने 10 अप्रैल को अमृतपाल के खास सहयोगी पल्पलप्रीत को गिरफ्तार कर लिया। दोनों 28 मार्च तक साथ थे। पूछताछ के दौरान उसने स्वीकार किया कि 28 मार्च के बाद दोनों अलग हो गए। जानकारी के मुताबिक, पप्पलप्रीत सीधे आईएसआई के संपर्क में था।

जोगा सिंह की गिरफ्तारी

पुलिस ने 15 अप्रैल को अमृतपाल के एक और खास सहयोगी जोगा सिंह को गिरफ्तार किया था। उसे फतेहगढ़ साहिब जिले के सरहिंद से गिरफ्तार किया था।

पत्नी के खिलाफ एक्शन

पंजाब पुलिस ने अमृतपाल की पत्नी किरणदीप के खिलाफ भी एक्शन लिया। वह लंदन फरार होने की फिराक में थी। पुलिस ने उसे दो दिन पहले अमृतसर एयरपोर्ट पर पूछताछ की थी। पुलिस को शक है कि विदेशी फंडिंग में किरणदीप कौर का हाथ है और वह वारिस पंजाब दे के लिए धन जुटाने का काम करती है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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