टीवी एक्टर करण पटेल ने 'ये है मोहब्बतें' में रमन भल्ला का रोल निभाकर लाखों लोगों के दिल में जगह बनाई थी और घर-घर अपनी पहचान बनाई थी। बीते दिन करण पटेल ने अपनी एक पोस्ट से सबको हैरान कर दिया था। करण पटेल ने सोशल मीडिया पर काम मांगा था, उन्होंने कहा था कि अगर कहीं कोई कास्टिंग हो रही है तो मुझे भी बताना। आज इसपर श्वेता तिवारी ने चुप्पी तोड़ी है। आइए जानते हैं उन्होंने क्या कहा है।
टाइम्स नाउ के साथ हाल ही में श्वेता तिवारी ने खास बातचीत की है। इस बातचीत के दौरान एक्ट्रेस ने करण पटेल के बारे में भी बात की, जिसमें वह कास्टिंग एजेंसियों से काम मांग रहे थे। श्वेता ने बताया कि उन्हें लगता है कि इन दिनों लोकप्रिय अभिनेता संघर्ष कर रहे हैं और इसके लिए उनके पास दो सिद्धांत हैं। इतना ही नहीं अभिनेत्री ने यह भी खुलासा किया कि उन्हें कई अच्छे प्रोजेक्ट क्यों छोड़ने पड़े जो उन्हें ऑफर किए गए थे।
5000-6000 रुपये में शो करते हैं
श्वेता तिवारी ने कहा "मुझे लगता है कि इन दिनों टेलीविजन में जाने-माने और लोकप्रिय अभिनेता अधिक संघर्ष कर रहे हैं। कोई भी आजकल एक्टर बनने आ जाता है कम कीमत में। अगर मैं कोई शो कर रही हूं, तो मैं एक निश्चित पैसा लूंगी क्योंकि मेरा प्रोफाइल ऐसा है, लेकिन आजकल मैंने मुख्य अभिनेताओं को 5000-6000 रुपये में शो करते देखा है।"
लोकप्रिय चेहरों को कास्ट ना करने पर तोड़ी चुप्पी
"दूसरी बात यह है कि नए कलाकार किसी भी किरदार में बहुत आसानी से ढल जाते हैं। लोकप्रिय कलाकारों के लिए अपने पिछले किरदार से हटकर अपनी छवि बदलना मुश्किल होता है। उदाहरण के लिए लोग मुझे प्रेरणा के नाम से जानते थे, इसलिए नए शो के लिए नया किरदार बनने में थोड़ा समय लगेगा, लेकिन दर्शक नए कलाकारों को आसानी से स्वीकार कर लेते हैं, क्योंकि उन्हें पहले कहीं और नहीं देखा गया होता।" उन्होंने कहा "इसी वजह से लोकप्रिय कलाकार संघर्ष कर रहे हैं। वे हमें वह फीस देने को तैयार नहीं हैं। उनके पास बजट नहीं है, इसलिए वे सस्ते दामों पर काम करने वाले कलाकारों को चुनते हैं। फिर वे लोकप्रिय चेहरों को क्यों कास्ट करेंगे?"
वे दिन चले गए जब मैं पागलों की तरह काम करती थी
श्वेता तिवारी ने बताया कि उन्होंने कई प्रोजेक्ट क्यों ठुकराए, उन्होंने कहा, "मेरे बारे में बात करें तो मेरे बच्चे हैं इसलिए मैं पूरे 30 दिन काम नहीं करना चाहती। मैं सिर्फ़ 15-20 दिन की शूटिंग चाहती हूँ या कम से कम रविवार को छुट्टी होनी चाहिए। वे दिन चले गए जब मैं पागलों की तरह काम करती थी। मुझे इस बात से कोई ऐतराज नहीं कि वे मेरे दिन के 12 घंटे ले लें। इसलिए अगर मुझे कोई कॉन्सेप्ट पसंद भी आता है, तो मैं उसमें फंस जाती हूँ। मेरे घर और बच्चों को मेरी जरूरत है। मेरी माँ बूढ़ी हो रही हैं उन्हें मेरी जरूरत है।"
