70th Filmfare Awards South With Kerala Tourism: 21 फरवरी का दिन साउथ इंडस्ट्री के लिए बेहद खास होने वाला है। साउथ फिल्म इंडस्ट्री के बड़े-बड़े सेलेब्स 70वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स साउथ विद केरल टूरिज्म के साथ मिलकर 'कल्कि 2898 एडी', 'पुष्पा 2: द रूल', 'मेयाझगन', 'अमरन', 'आदुजीवितम', 'मंजुम्मेल बॉयज' और 'ऑल वी इमेजिन एज लाइट' जैसी फिल्मों को सम्मानित करने के लिए एक साथ आएंगे। इस ग्रैंड इवेंट को विष्णु वारियर, रंजिनी हरिदास और आरजे मिथुन द्वारा होस्ट किया जाएगा। खास बात यह है कि 70वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स साउथ विद केरल टूरिज्म में अल्लू अर्जुन, साई पल्लवी और अनुराग कश्यप सहित कई बड़ी-बड़ी हस्तियां हिस्सा लेंगी। यह इवेंट कोच्चि के एडलक्स इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित होगा। इससे पहले फिल्म निर्माताओं और अभिनेताओं के लिए एक स्पेशल फिल्ममेकर्स मीट का आयोजन किया गया, जहां उन्होंने अवॉर्ड इवेंट में शामिल होने के अपना उत्साह जाहिर किया। टाइम्स नाउ की नेहा हेब्बाले के साथ बातचीत में उन सभी अहम बातचीत की।
अवॉर्ड विनर और फिल्म निर्माता सुहासिनी मणिरत्नम ने साझा किए अपने विचार
साउथ एक्ट्रेस और फिल्म निर्माता सुहासिनी मणिरत्नम ने बताया कि ऐसे इवेंट्स में पुराने दोस्तों से मिलकर काफी मजा आता है। उन्होंने कहा, 'मुझे नए-नए टैलेंटे देखने को मिलते हैं जिन्हें एजेंसियों के माध्यम से नहीं खोजा जा सकता। मुझे अवॉर्ड इवेंट जाना बहुत पसंद है क्योंकि यहां ऐसे-ऐसे टैलेंटेड एक्टर्स आते हैं, जिन्हें आप अपनी मूवी में लेने के लिए आगे आते हैं।'
सुहासिनी मणिरत्नम ने इस बातचीत के दौरान निर्देशकों और अभिनेताओं को सलाह भी दी। उन्होंने बताया कि पहली फिल्म बनाना आसान होता है क्योंकि कोई आपको यह नहीं बताता कि क्या करना है। उन्होंने कहा, 'आप दिल की कहें, आपकी कहानी होनी चाहिए और वहीं दिखाए तो आप दुनिया को बताना चाहते हैं। एक्टर्स कभी भी इंडस्ट्री में फेमस होने या पैसों की उम्मीद लेकर एंट्री नहीं ले सकते हैं। आपको वही करना होगा जो आपको करना है।'
तमिल फिल्म 'मेयाझगन' के निर्देशक प्रेम कुमार ने भी की बात
'कार्थी' और 'अरविंद स्वामी' स्टारर फिल्म 'मेयाझगन' को बेस्ट मूवी, बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट लीड एक्टर, बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर, बेस्ट सिंगर और बेस्ट पार्श्व गायक श्रेणियों में नामांकित किया गया है। फिल्म निर्माता प्रेम कुमार ने बताया कि उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उन्हें उसी फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए नामांकित किया गया है जिसके लिए उन्हें 'ब्लैक लेडी' पुरस्कार दिया जाता है। उन्हें विश्वास तब हुआ, यह इवेंट शुरू हुआ।
फिल्म निर्माता ने मलयालम फिल्म इंडस्ट्री को क्रेडिट देते हुए कहा, 'मैंने बचपन से ही देखा है कि केरल के लोग हमेशा से अच्छी फिल्मों की सराहना करते आए हैं। इसमें कभी कोई बदलाव नहीं आया है। मुझे खुशी है कि इन सब चीजों के बाद भी मेरी फिल्म ने जगह बनाई।'
अभिनेता-निर्देशक राहुल रविंद्रन ने केरल सरकार की तारीफ
राहुल रविंद्रन ने फिल्म 'जिगरा' से हिंदी सिनेमा में शुरुआत की थी। उन्होंने यह भी कहा कि यह हर इंडस्ट्री से लोगों से मिलने-जुलने का एक शानदार तरीका था। उन्होंने मलयालम इंडस्ट्री को सपोर्ट देने के लिए केरल सरकार की सराहना भी की। राहुल ने कहा, 'सरकार को परवाह है। सरकार सिनेमा और केरल टूरिज्म को बढ़ावा देना चाहती है। खुशी होती है कि सरकार इंडस्ट्री की मदद करना चाहती है। उसे आगे बढ़ने में सक्षम बनाना चाहती है। तेलुगु इंडस्ट्री की फिल्मों के लिए हम केरल में काफी शूटिंग करते हैं।'
मलयालम फिल्म मंजुम्मेल बॉयज के निर्देशक चिदंबरम
'मंजुम्मेल बॉयज' के लिए बेस्ट फिल्म और बेस्ट निर्देशक केटेगरी में दो फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए नोमिनेट चिदंबरम ने अपना पहला फिल्मफेयर पुरस्कार जीता। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए, 'मैं बहुत खुश हूं। 2024 मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक शानदार साल रहा। लोगों ने फिल्म को देखा और मैं खुश हूं। अवॉर्ड मेरे लिए एक बोनस है। देखते हैं आगे क्या होता है। मैं बहुत खुश हूं। उन सभी लोगों का आभारी हूं जिन्होंने इमोशन के साथ किसी भाषा को आड़े नहीं आने दिया आयर सपोर्ट किया।'
लेखिका-निर्देशक अश्विनी अय्यर तिवारी ने किया शेयर किए विचार
'बरेली की बर्फी' की फिल्म निर्माता अश्विनी अय्यर तिवारी ने अपनी पहली फिल्म 'नील बटे सन्नाटा' के लिए मिली पहली जीत को याद करते हुए इसे सबसे बेहतरीन अनुभव बताया। उन्होंने कहा, 'अपनी मां को साड़ी में नाचते देखना और पति नितेश को भावुक होते देखना मेरे लिए बहुत याद भरा पल था। यह दोहरी खुशी थी क्योंकि उसी साल मेरे पति नितेश ने 'दंगल' के लिए भी पुरस्कार जीता था। इसलिए फिल्मफेयर हमेशा से खास रहा है।'
अश्विनी ने आगे कहा,, 'जब मैं फिल्म इंडस्ट्री में कदम रख रही थी, तब मैं उन गिनी-चुनी महिला फिल्म निर्माताओं में से एक थी। मैं बस कहानी सुनाना चाहती थी। आपको एक यात्रा करनी पड़ती है, आपको हर समय कहानियों की तलाश करनी पड़ती है और उन्हें दर्शकों तक पहुंचाना पड़ता है।'
