The India Story Movie Review: काजल अग्रवाल और श्रेयस तलपड़े की फिल्म द इंडिया स्टोरी सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। कोर्टरूम ड्रामा और सामाजिक मुद्दे पर बनी इस फिल्म ने क्या दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतर पाई?
संवेदनशील मुद्दे को ढंग से नहीं दिखा पाए Chetan DK (The India Story Movie)
The India Story Movie Review: कोर्टरूम ड्रामा हमेशा से दर्शकों की पसंदीदा फिल्म शैली रही है। जॉली एलएलबी, दामिनी और हाल ही में रिलीज हुई इक्का जैसी फिल्मों को लोगों ने भरपूर प्यार दिया। अब इसी कड़ी में काजल अग्रवाल और श्रेयस तलपड़े की फिल्म द इंडिया स्टोरी (The India Story) सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म के ट्रेलर ने रिलीज से पहले ही दर्शकों के बीच अच्छी-खासी चर्चा बटोर ली थी और इसकी कहानी को लेकर काफी उत्सुकता देखने को मिली। यह फिल्म कोर्टरूम ड्रामा के साथ एक सामाजिक मुद्दे को भी उठाने की कोशिश करती है। लेकिन क्या द इंडिया स्टोरी दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरती है या नहीं? आइए जानते हैं इस रिव्यू में। (Times Now Navbharat पर ये भी पढ़ें-Prabhas की Spirit में कैमियो करेंगी Katrina Kaif? बॉक्स ऑफिस पर मचेगा तहलका!!)
फिल्म द इंडिया स्टोरी की कहानी योगेश पाटिल (श्रेयस तलपड़े) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी सात साल की बेटी परी (तृषा सरदा) की ब्लड कैंसर से मौत हो जाती है। योगेश का मानना है कि उसकी बेटी की मौत बीमारी से नहीं बल्कि जहरीले और केमिकल वाले खाने की वजह से हुई है। वह किसानों के खिलाफ केस लड़ना चाहता है, लेकिन उसके पास न पैसे हैं और न ही सबूत, इसलिए कोई वकील उसका साथ नहीं देता। आखिरकार यह मामला वकील अर्चना (काजल अग्रवाल) के पास पहुंचता है। वह अदालत में योगेश का केस लड़ने का फैसला करती हैं। कोर्ट में उनका सामना अनुभवी वकील (मनीष वाधवा) से होता है, जो इस केस को कमजोर साबित करने की पूरी कोशिश करता है। बाद में अर्चना को आईजी राठौड़ (मुरली शर्मा) की मदद से सबूत जुटाने का मौका मिलता है। इसके बाद फिल्म में परी की मौत की सच्चाई, अर्चना के इस केस से जुड़ने की वजह और पिता-बेटी के रिश्ते को दिखाया गया है।
श्रेयस तलपड़े ने अपने किरदार को पूरी ईमानदारी के साथ निभाया है, लेकिन कमजोर निर्देशन और साधारण स्क्रीनप्ले की वजह से उनका अभिनय पूरी तरह असर नहीं छोड़ पाता। काजल अग्रवाल स्क्रीन पर प्रभावशाली नजर आती हैं और उन्हें भरपूर स्क्रीन टाइम भी मिला है। वहीं तृषा सरदा इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरती हैं। उन्होंने अपने दमदार अभिनय से कई भावुक दृश्यों को जीवंत बना दिया है। कुल मिलाकर सभी कलाकारों ने अपनी-अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया है, लेकिन कमजोर कहानी और ढीले निर्देशन के कारण फिल्म अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच पाती।
फिल्म द इंडिया स्टोरी हद से ज्यादा स्लो है। मूवी को देखकर आप पता लगा लेंगे कि एडिटिंग भी बहुत कमजोर है। वहीं इसकी सबसे बड़ी कहानी है। फिल्म किसानों पर गंभीर सवाल उठाती है, लेकिन जिस तरीके से इन बातों को दिखाया गया है, वह ज्यादा असर नहीं छोड़ पाता। कई इमोशनल सीन भी दर्शकों के दिल को छूने में नाकाम रहते हैं। ओवरएक्टिंग की वजह से भी मूवी फीकी लगती है।
अगर आप दामिनी या जॉली एलएलबी जैसी दमदार और रोमांचक कोर्टरूम ड्रामा फिल्म की उम्मीद लेकर सिनेमाघर जाएंगे, तो द इंडिया स्टोरी शायद आपको पूरी तरह संतुष्ट न कर पाए। हालांकि, फिल्म एक गंभीर सामाजिक मुद्दे को उठाने की ईमानदार कोशिश करती है और इसी वजह से इसे एक मौका दिया जा सकता है। अगर आप संदेश देने वाली फिल्मों में दिलचस्पी रखते हैं, तो यह फिल्म एक बार देखी जा सकती है। हमारी तरफ से द इंडिया स्टोरी को 2.5 स्टार