Raja Shivaji Movie Review: फिल्म राजा शिवाजी आज यानी 1 मई को रिलीज हो गई है। अगर आप भी इस फिल्म को देखने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो ये रिव्यू आपके काफी काम आने वाला है। तो चलिए बिना देर किए पढ़ते हैं फिल्म राजा शिवाजी का ये रिव्यू
फिल्म राजा शिवाजी का रिव्यू (Image Source: Raja Shivaji Movie)
Raja Shivaji Movie Review: 'राजा शिवाजी' एक ऐतिहासिक फिल्म है जो छत्रपति शिवाजी महाराज की जिंदगी पर बनी है। रितेश देशमुख ने इसमें लीड रोल में है और साथ ही डायरेक्टर भी हैं। ये फिल्म महाराष्ट्र डे यानी 1 मई 2026 को बड़े पर्दे पर रिलीज हुई है। फिल्म का बजट करीब 100 करोड़ का बताया जा रहा है और रनटाइम लगभग 3 घंटे 15 मिनट है। फिल्म में रितेश के अलावा जेनेलिया देशमुख (साई के रोल में), भाग्यश्री (जिजाबाई), संजय दत्त (अफजल खान), अभिषेक बच्चन (शंभू राजे), सलमान खान (कैमियो), विद्या बालन और महेश मांजरेकर जैसे कलाकार हैं। ये माराठी सिनेमा में बड़े स्केल की फिल्म है जो हिंदी में भी रिलीज हुई। अगर आप भी इस फिल्म को देखने के तैयारी कर रहे हैं, तो ये रिव्यू आपके काफी काम आने वाला है।
कहानी जिजाबाई के मां बनने के समय से शुरू होती है। वो अपने मायके जाती हैं जहां उनके पिता लखुजी जाधव की मौत हो जाती है। जिजाबाई का रिश्ता शाहजी भोसले से है, जो अलग-अलग साम्राज्यों की नौकरी करते हैं लेकिन आगे नहीं बढ़ पाते। उनका बेटा शिवाजी बड़ा होकर अपने भाई शंभू राजे से वादा करता है कि वो मराठों के लिए स्वतंत्र राज्य और केसरिया झंडा लाएगा।फिल्म शिवाजी की बचपन से लेकर जवानी तक की यात्रा दिखाती है। वो कई मुश्किलों का सामना करते हैं, सत्ता के खिलाफ लड़ते हैं और आखिरकार अफजल खान जैसे दुश्मनों से टकराते हैं। कहानी चैप्टर्स में धीरे-धीरे आगे बढ़ती है, शिवाजी की सोच, साहस और स्वराज्य की चाहत पर जोर देती है।
सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है रितेश देशमुख का परफॉर्मेंस। उन्होंने शिवाजी महाराज के रोल को बहुत सीरियसली लिया है। स्क्रीन पर वो स्केल और मराठा स्पिरिट लेकर आते हैं। डायरेक्टर के तौर पर भी उन्होंने बड़ी फिल्म को अच्छे से हैंडल किया। विजुअल्स बहुत शानदार हैं। कॉस्ट्यूम्स, प्रोडक्शन डिजाइन और सिनेमैटोग्राफी कमाल की है। पुराने मराठा काल को स्क्रीन पर जिंदा कर दिया गया है। एक्शन सीक्वेंस अच्छे से कोरियोग्राफ्ड हैं। जेनेलिया साधारण सूती साड़ी में बहुत खूबसूरत लगीं और शिवाजी-साई का इनोसेंट रोमांस अच्छा लगता है। भाग्यश्री ने जिजाबाई का रोल किया तो मां वाली स्ट्रेंथ दिखी। फिल्म में मराठा गौरव और इमोशंस सही से पकड़े गए हैं। सलमान खान का कैमियो ने रंग जमा दिया।
फिल्म 3 घंटे 15 मिनट की है जो काफी लंबी लगती है। बीच-बीच में थोड़ी थकान महसूस होती है क्योंकि कई जगह पेस धीमा पड़ जाता है। संजय दत्त का अफजल खान वाला रोल काफी वीक है उनमें वो खतरनाक वाली फील नहीं आती। अभिषेक बच्चन एक्शन में ठीक हैं लेकिन इमोशंस और डायलॉग डिलीवरी में थोड़ी दिक्कत लगी। जिजाबाई जैसी स्ट्रॉन्ग फीमेल कैरेक्टर्स को ज्यादा स्क्रीन टाइम और डेप्थ नहीं मिला। फिल्म ज्यादातर सरफेस लेवल पर रह जाती है, गहरी अनकही कहानियां या इमोशनल मोमेंट्स कम हैं। कभी-कभी ये एक-टोन वाली लगने लगती है बस एक्शन और लड़ाई चलती रहती है, उसमें वैरायटी कम है। बड़े सब्जेक्ट के आगे फिल्म थोड़ी छोटी पड़ जाती है।
अगर आपको शिवाजी महाराज की कहानी पसंद है, मराठा हिस्ट्री में इंटरेस्ट है और बड़े स्केल की ऐतिहासिक फिल्में देखना अच्छा लगता है तो एक बार जरूर देख लो। रितेश की मेहनत और सिन्सियरिटी दिखती है, विजुअल्स और एक्शन एंजॉय करेंगे।लेकिन अगर आप लंबी फिल्में पसंद नहीं या आप डीप इमोशंस, टाइट स्क्रिप्ट और तेज रफ्तार चाहते हो तो थोड़ा सोच लेना चाहिए। ये परफेक्ट फिल्म नहीं है, कुछ कमियां हैं लेकिन दिल से बनाई गई फिल्म है।