Pakeezah Meena Kumari Tragedy Queen: हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई बड़ी एक्ट्रेसेस आईं और गईं, लेकिन 'ट्रेजडी क्वीन' का ताज सिर्फ एक नाम के सिर सजा जिनका नाम था मीना कुमारी। पर्दे पर जब वह रोती थीं तो दर्शकों की आंखें भी नम हो जाती थीं। उनकी मुस्कान में भी एक उदासी छिपी रहती थी, शायद इसलिए क्योंकि उनकी फिल्मों के किरदार ही नहीं, उनकी असल जिंदगी भी दर्द से भरी हुई थी। यही वजह है कि महज 38 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाली मीना कुमारी आज भी बॉलीवुड की सबसे चर्चित एक्ट्रेसेस में गिनी जाती हैं। तो चलिए आपको बताते हैं कि मीना कुमार कैसे एक ट्रेजडी क्वीन बन गईं।

मीना कुमारी की लाइफ (Image Source: Pinterest)
शरीर पर रेंग रही थीं चींटिया
1 अगस्त 1933 को मुंबई में जन्मीं मीना कुमारी का असली नाम महजबीन बानो था। परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। कहा जाता है कि जब उनका जन्म हुआ तो उनके माता-पिता के पास डॉक्टर की फीस चुकाने तक के पैसे नहीं थे। मजबूरी इतनी बड़ी थी कि नवजात बच्ची को अनाथालय में छोड़ दिया गया। हालांकि, कुछ समय बाद उनके पिता का दिल पसीजा और वह बेटी को वापस लेने पहुंचे। बताया जाता है कि तब नन्ही महजबीन के शरीर पर चींटियां रेंग रही थीं। ये घटना उनकी जिंदगी के सबसे दर्दनाक किस्सों में गिनी जाती है।
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मीना कुमारी की लाइफ (Image Source: Pinterest)
मां का हुआ निधन
मीना कुमारी की जिंदगी में मुश्किलों का सिलसिला बचपन से ही शुरू हो गया था और शोहरत मिलने के बाद भी उनका पीछा नहीं छोड़ा। चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर पहचान बनाने के बाद उन्हें महज 13 साल की उम्र में फिल्म 'बच्चों का खेल' में पहली बार बतौर लीड एक्ट्रेस मौका मिला। ये उनके करियर का बड़ा पड़ाव था, लेकिन सफलता की ये खुशी ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकी। फिल्म रिलीज होने के करीब डेढ़ साल बाद उनकी मां का निधन हो गया, जिसने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया।
ऐसे मिला 'ट्रेजडी क्वीन' का टैग
50 और 60 के दशक में मीना कुमारी का नाम सफलता की गारंटी माना जाता था। 'परिणीता', 'दिल अपना और प्रीत पराई', 'साहिब बीवी और गुलाम', 'काजल', 'फूल और पत्थर' और 'पाकीजा' जैसी फिल्मों ने उन्हें हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी एक्ट्रेस बना दिया। खास बात ये थी कि दुख, दर्द और इमोशन्स से भरे किरदारों में वो ऐसी जान डालती थीं कि दर्शक उन्हें अपने दिल से जोड़ लेते थे। यहीं से उन्हें 'ट्रेजडी क्वीन' कहा जाने लगा। लेकिन एक्ट्रेस की फिल्मी लाइफ जितनी चमकदार थी, पर्सनल लाइफ उतनी ही उलझी हुई रही। साल 1952 में उन्होंने मशहूर निर्देशक कमाल अमरोही से शादी की। शुरुआत में सब कुछ ठीक रहा, लेकिन समय के साथ रिश्तों में दूरियां बढ़ने लगीं। दोनों अलग हो गए।
प्यार से मिला दर्द
फिल्मी सफलता के बीच उनकी जिंदगी में प्यार ने भी दस्तक दी। ये कहानी किसी फिल्मी सीन से कम नहीं थी। साल 1949 में उनकी मुलाकात मशहूर निर्देशक कमाल अमरोही से हुई। उस वक्त कमाल पहले से शादीशुदा थे। धीरे-धीरे ये रिश्ता मोहब्बत में बदला और आखिरकार दोनों ने शादी कर ली। शादी के शुरुआती दिन बेहद खूबसूरत रहे, लेकिन वक्त के साथ रिश्ते में दरारें आने लगीं। निजी जिंदगी में भी उन्हें वो सुख नहीं मिला, जिसकी वो हकदार थीं। कमाल अमरोही से शादी के बाद उन्होंने एक सिंपल लाइफ का सपना देखा था, लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। कमाल अमरोही और मीना कुमारी का रिश्ता विवादों के बाद खत्म हो गया।

मीना कुमारी की लाइफ (Image Source: Pinterest)
नहीं बन पाई मां
शादी के बाद मीना कुमारी की निजी जिंदगी आसान नहीं रही। उन्हें कई मुश्किल दौर से गुजरना पड़ा। सबसे बड़ा दुख ये था कि वो कभी मां नहीं बन सकीं। पहली बार गर्भवती होने पर उनका गर्भपात हो गया था। इसके बाद वो दो बार और प्रेग्नेंट हुईं, लेकिन उन्होंने कमाल अमरोही को बताए बिना गर्भपात करा लिया। जब कमाल को इस बात की जानकारी मिली तो दोनों के रिश्ते में तनाव बढ़ गया और गुस्से में उन्होंने मीना कुमारी को थप्पड़ भी मार दिया। बताया जाता है कि पति के सख्त व्यवहार का असर मीना कुमारी पर गहराई से पड़ने लगा था। एक बार फिल्म साहिब, बीवी और गुलाम की शूटिंग के लिए वो देर से पहुंचीं। इस बात को लेकर वो इतनी घबरा गईं कि सेट पर ही रोने लगीं। शूटिंग तो हुई, लेकिन पूरे समय उनकी आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।

मीना कुमारी की लाइफ (Image Source: Pinterest)
विवाद की वजह से लेट हुई 'पाकीजा'
मीना कुमारी की लाइफ का एक विवाद फिल्म पाकीजा से भी जुड़ा हुआ है। फिल्म पाकीजा पर काम साल 1958 में ही शुरू हो गया था। शुरुआत में इस फिल्म में मीना कुमारी के साथ उनके पति कमाल अमरोही ही नजर आने वाले थे। उस दौर में फिल्म ब्लैक एंड व्हाइट में बन रही थी और इसकी आधी शूटिंग भी पूरी हो चुकी थी। फिर वक्त बदला और फिल्मों में कलर प्रिंट का दौर आ गया। इसके बाद कमाल अमरोही ने पाकीजा को नए सिरे से रंगीन फिल्म के तौर पर शूट करने का फैसला किया। लेकिन 1964 आते-आते मीना कुमारी और कमाल अमरोही का रिश्ता टूट गया और दोनों अलग हो गए। इसी के साथ फिल्म का काम भी बीच में रुक गया। कमाल से अलग होने के बाद मीना कुमारी शराब की लत की गिरफ्त में आ गईं और उनकी तबीयत भी लगातार बिगड़ने लगी। लेकिन बाद में मीना कुमारी ने राजकुमार के साथ इस फिल्म को पूरा किया। फिल्म पाकीजा फरवरी 1972 में रिलीज हुई और मार्च 1972 में मीना कुमारी दुनिया छोड़कर चली गईं।
शराब ने ले ली जान
मीना कुमारी अपने पति कमाल अमरोही से अलग होने के बाद काफी परेशान हो गई थीं। मीना कुमारी को शराब की लत लग गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक निधन से पहले उनके पास अस्पताल के बिल तक चुकाने के पैसे नहीं थे और उनकी आर्थिक हालत काफी खराब हो गई थी। ज्यादा शराब पीने वजह से मीना कुमारी की लिवर सिरोसिस से निधन हो गया था। मीना कुमारी महज 38 साल की उम्र में इस दुनिया को छोड़कर चली गईं।
