FLASHBACK: 'संदेशे आते हैं' के लिए सोनू निगम ने रिजेक्ट कर दिया फिल्मफेयर अवॉर्ड, रूप कुमार राठौड़ थे वजह
- Authored by: Abhay
- Updated Jan 15, 2026, 04:47 PM IST
Sonu Nigam Rejected Filmfare Award: बॉलीवुड कई सिंगर्स एक अवॉर्ड पाने के लिए अपनी पूरी लाइफ लगा देते हैं। लेकिन सोनू निगम ने एक बार फिल्म बॉर्डर के गाने 'संदेशे आते हैं' के लिए मिलने वाले अवॉर्ड को रिजेक्ट कर दिया था। इसकी वजह कुछ नहीं बल्कि रूप कुमार राठौड़...
Image Source: Border Movie/ IMDb
Sonu Nigam Rejected Filmfare Award: बॉलीवुड की पुरानी फिल्मों के गानों में एक जादू हुआ करता था, जिसे सुनने के बाद बस लोग सुनते ही रह जाते थे। ऐसा ही एक गाना है फिल्म बॉर्डर का 'संदेशे आते हैं'। इस गाने से जुड़ी एक स्टोरी भी है, जो आज भी लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचती है। जब पूरा देश 1997 में जे.पी. दत्ता की फिल्म बॉर्डर के गाने 'संदेशे आते हैं' पर झूम रहा था, सैनिकों की इमोशन्स को छू रहा था और आंखें नम कर रहा था, तब उसी गाने के लिए सोनू निगम को फिल्मफेयर अवॉर्ड मिलने वाला था। लेकिन उन्होंने क्या किया? सीधे अवॉर्ड ठुकरा दिया। इसकी वजह जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे। तो चलिए जानते हैं इसकी क्या कहानी थी। जिसको लेकर आज भी खूब चर्चा होती है।

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ये कहानी सिर्फ एक गाने की नहीं, बल्कि दोस्ती, ईमानदारी और न्याय की है, जो बॉलीवुड में कम ही देखने को मिलती है। 'संदेशे आते हैं' फिल्म बॉर्डर का वो आइकॉनिक गाना था, जिसे अनु मलिक ने कंपोज किया, जावेद अख्तर ने लिखा और इसे दो महान गायकों सोनू निगम और रूप कुमार राठौड़ ने मिलकर गाया। ये गाना सिर्फ एक डुएट नहीं था, बल्कि एक इमोशनल संवाद था एक तरफ सैनिकों की पत्नियों-मांओं का इंतजार, दूसरी तरफ सरहद पर तैनात जवानों का दर्द। गाने की आवाजें इतनी दिल को छू गईं कि ये न सिर्फ फिल्म का हिट नंबर बना, बल्कि देश का अनऑफिशियल एंथम बन गया। लोग आज भी इसे सुनकर सीना तान लेते हैं और आंखें भर आती हैं।

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लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया, जब 1998 में फिल्मफेयर अवॉर्ड्स के लिए नॉमिनेशन आए। सोनू निगम को उनके शानदार वोकल्स के लिए चुना गया, लेकिन उनके पार्टनर रूप कुमार राठौड़ का नाम कहीं नहीं था। उस वक्त सोनू मुंबई के मड आइलैंड में अपने पहले पॉप गाने की शूटिंग कर रहे थे। तभी एक दोस्त का फोन आया आपको 'संदेशे आते हैं' के लिए अवॉर्ड मिल रहा है, जरूर आना। सोनू ने तुरंत पूछा, 'रूप कुमार राठौड़ जी ने भी तो मेरे साथ गाया है, उन्हें नॉमिनेट किया आपने?' जवाब आया - 'नहीं।' बस, यहीं से सोनू का फैसला पक्का हो गया। उन्होंने साफ कह दिया, 'फिर मैं अवॉर्ड लूंगा ही नहीं एक गाने को दो लोगों ने गाया है, मुझे नॉमिनेट किया आपने, रूप जी को क्यों नहीं? मैं आ सकता हूं तो भी नहीं आऊंगा।'

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ये फैसला सुनकर कई लोगों ने सोचा कि शायद सोनू घमंडी हो गए हैं, लेकिन हकीकत ये थी कि उनके दिल में दोस्ती और न्याय का भावना सबसे ऊपर थी। वो मानते थे कि अगर गाना डुएट है, तो सम्मान भी दोनों को बराबर मिलना चाहिए। एक को ताज पहनाकर दूसरे को भूल जाना उनके लिए बर्दाश्त से बाहर था। सोनू ने न सिर्फ अवॉर्ड रिजेक्ट किया, बल्कि ये संदेश भी दिया कि बॉलीवुड में टैलेंट को इग्नोर नहीं किया जा सकता। बाद में भी उन्होंने कई इंटरव्यूज में यही बात दोहराई कि रूप जी का योगदान बराबर का था और वो इस गाने की कामयाबी में उतने ही जरूरी थे।

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बॉलीवुड में अवॉर्ड्स की चकाचौंध में लोग कई बार छोटी-छोटी बातें भूल जाते हैं, लेकिन सोनू निगम ने साबित कर दिया कि सच्चाई और दोस्ती की कीमत किसी अवॉर्ड से ज्यादा होती है। ये कहानी हमें याद दिलाती है कि असली जीत अवॉर्ड नहीं, बल्कि दिलों में जगह बनाना है। आपको बता दें कि अब सोनू निगम फिल्म बॉर्डर 2 के लिए 'संदेशे आते हैं' गाना गाया है। इस बार लेकिन इस बार रूप कुमार राठौड़ इसका हिस्सा नहीं है। सिंगर सोनू निगम की इस स्टोरी को लेकर आपकी क्या राय है, कमेंट करके हमें जरूर बताएं।
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